पटना : बिहार में सड़क और परिवहन व्यवस्था को नई रफ्तार देने के लिए कई बड़े एक्सप्रेसवे और हाई-स्पीड कॉरिडोर पर काम आगे बढ़ रहा है। राज्य में पांच प्रमुख एक्सप्रेसवे परियोजनाओं से अलग-अलग जिलों को बेहतर कनेक्टिविटी देने की योजना है। इन परियोजनाओं का असर केवल यात्रा के समय तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कारोबार, निवेश, उद्योग, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होने की उम्मीद है।
बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेसवे से 13 जिलों को फायदा
बक्सर से भागलपुर तक करीब 336 किलोमीटर लंबा छह लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे प्रस्तावित है। अगस्त 2026 में बिहार कैबिनेट ने इस परियोजना को मंजूरी दी है। परियोजना पर करीब ₹3,700 से ₹3,750 करोड़ खर्च होने का अनुमान बताया गया है।
यह एक्सप्रेसवे बक्सर, भोजपुर, अरवल, जहानाबाद, गया, नालंदा, शेखपुरा, लखीसराय, मुंगेर, नवादा, जमुई, बांका और भागलपुर समेत 13 जिलों से होकर गुजरने की योजना है।
इससे दक्षिण बिहार के जिलों के बीच आवागमन आसान होने के साथ दूसरे राज्यों तक पहुंच भी बेहतर हो सकती है।
आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे से पटना, गया और दरभंगा की कनेक्टिविटी मजबूत
आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे बिहार के महत्वपूर्ण हिस्सों को जोड़ने वाली प्रमुख परियोजनाओं में शामिल है। इसका बिहार में लगभग 170 किलोमीटर का हिस्सा बताया गया है, जबकि पूरी परियोजना की लंबाई करीब 189 किलोमीटर है।
यह औरंगाबाद, गया, जहानाबाद, पटना, वैशाली, समस्तीपुर और दरभंगा जैसे क्षेत्रों को बेहतर सड़क संपर्क देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इसके अलावा बोधगया और राजगीर को इस नेटवर्क से जोड़ने के लिए संपर्क सड़क का प्रस्ताव भी सामने आया है। इससे बिहार के प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है।
पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे से घटेगा सफर का समय
पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे को बिहार के महत्वपूर्ण हाई-स्पीड कॉरिडोर के रूप में देखा जा रहा है। यह करीब 245 से 250 किलोमीटर लंबा छह लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे होगा।
रिपोर्ट के अनुसार, इसके बनने के बाद पटना से पूर्णिया के बीच यात्रा का समय काफी कम हो सकता है। परियोजना में कई छोटे-बड़े पुल, रेलवे ओवरब्रिज, इंटरचेंज और अंडरपास बनाए जाने की योजना है।
इससे उत्तर बिहार और सीमांचल के क्षेत्रों को राजधानी पटना से बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है।
रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेसवे से कारोबार को मिलेगा फायदा
नेपाल सीमा के पास स्थित रक्सौल से पश्चिम बंगाल के हल्दिया बंदरगाह तक प्रस्तावित रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेसवे बिहार के लिए आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है।
इसकी कुल लंबाई करीब 585 से 600 किलोमीटर और बिहार में इसका हिस्सा लगभग 406 किलोमीटर बताया गया है। परियोजना की अनुमानित लागत करीब ₹40 हजार करोड़ बताई गई है।
इसके बनने से नेपाल, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के बीच माल परिवहन और व्यापारिक गतिविधियों को बेहतर सड़क संपर्क मिलने की उम्मीद है।
गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे से उत्तर बिहार को फायदा
गोरखपुर-सिलीगुड़ी ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बिहार के लिए एक और बड़ी परियोजना है। बिहार में इसका करीब 416 किलोमीटर हिस्सा होने की जानकारी सामने आई है।
यह पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज जैसे जिलों से होकर गुजरने की योजना है। परियोजना की लागत करीब ₹37,465 करोड़ बताई गई है और इसे 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य बताया गया है।
इस कॉरिडोर से उत्तर प्रदेश, बिहार और पूर्वोत्तर भारत के बीच सड़क संपर्क और मजबूत हो सकता है।
सिर्फ सड़क नहीं, विकास का नया कॉरिडोर बनेंगे एक्सप्रेसवे
इन परियोजनाओं का सबसे बड़ा असर लॉजिस्टिक्स और माल परिवहन पर पड़ने की उम्मीद है। बेहतर सड़क नेटवर्क से किसानों को बड़े बाजारों तक अपनी उपज पहुंचाने में सुविधा मिल सकती है, वहीं कारोबारियों के लिए माल ढुलाई का समय और लागत कम हो सकती है।
इसके साथ ही एक्सप्रेसवे के आसपास नए वेयरहाउस, लॉजिस्टिक्स हब, औद्योगिक इकाइयां, होटल और सर्विस सेक्टर विकसित होने की संभावना है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।
पर्यटन को भी मिलेगी नई रफ्तार
बोधगया, राजगीर, गया और उत्तर बिहार के कई पर्यटन स्थलों को बेहतर सड़क कनेक्टिविटी मिलने से पर्यटकों की आवाजाही बढ़ सकती है।
सड़क संपर्क बेहतर होने पर धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक कम समय में पहुंच संभव होगी, जिससे स्थानीय होटल, परिवहन, रेस्तरां और छोटे कारोबार को भी फायदा मिल सकता है।
बिहार के आर्थिक विकास में अहम भूमिका
बिहार सरकार के 2026-27 के विकास रोडमैप में पांच नए एक्सप्रेसवे के निर्माण पर जोर दिया गया है। राज्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के साथ इन्हें औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में देखा जा रहा है।







