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बिहार के गांवों में मकानों पर नहीं लगेगा होल्डिंग टैक्स, सरकार ने लिया बड़ा फैसला

पटना : बिहार के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले करोड़ों परिवारों के लिए बड़ी राहत की खबर है। राज्य सरकार अब गांवों में आवासीय मकानों पर होल्डिंग टैक्स नहीं लगाने की तैयारी कर रही है। पक्के और अर्धपक्के मकानों से प्रस्तावित मकान कर के प्रावधान को हटाने के लिए पंचायती राज विभाग नियमों में संशोधन करेगा।

इस फैसले से ग्रामीण परिवारों पर पड़ने वाले अतिरिक्त आर्थिक बोझ को कम करने की उम्मीद है। हालांकि, संशोधित नियमों की अंतिम अधिसूचना अभी जारी होना बाकी है।

पहले पक्के और अर्धपक्के मकानों पर था टैक्स का प्रावधान

ग्राम पंचायत कर, दर एवं शुल्क नियमावली-2026 को मंजूरी मिलने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में अलग-अलग कर और शुल्क लगाने का प्रावधान किया गया था।

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत अर्धपक्के मकानों से 50 रुपये और पक्के मकानों से 100 रुपये सालाना होल्डिंग टैक्स लेने की बात थी। कच्चे मकानों को इस दायरे से बाहर रखा गया था।

अब सरकार आवासीय मकानों को इस कर के दायरे से बाहर करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

करीब 8 करोड़ ग्रामीणों को मिल सकती है राहत

सरकार के इस बदलाव से बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले करीब 8 करोड़ से अधिक लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। खासकर किसान, मजदूर, छोटे दुकानदार और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ग्रामीण परिवारों के बीच मकान पर अतिरिक्त टैक्स को लेकर पहले से ही चिंता और नाराजगी सामने आ रही थी। इसी के बाद सरकार ने नियमों की समीक्षा शुरू की।

मुख्यमंत्री ने भी साफ किया था सरकार का रुख

होल्डिंग टैक्स को लेकर विधानसभा परिषद में उठे सवाल पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया था कि सरकार की गरीब परिवारों पर टैक्स लगाने की मंशा नहीं है।

मुख्यमंत्री ने कहा था कि गरीबों पर होल्डिंग टैक्स लगाए जाने की बात निराधार है और नियमों में आवश्यक बदलाव किए जाएंगे।

व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर लग सकता है टैक्स

सरकार का फोकस अब ग्रामीण क्षेत्रों में व्यावसायिक और औद्योगिक गतिविधियों से राजस्व जुटाने पर रह सकता है।

होटल, पेट्रोल पंप, गैस एजेंसी, सिनेमा हॉल, ईंट-भट्ठा, बड़ी मिल और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान कर या शुल्क के दायरे में रह सकते हैं।

यानी सामान्य ग्रामीण परिवार के आवासीय मकान को राहत देने के साथ पंचायतों की आय बढ़ाने के लिए व्यावसायिक गतिविधियों से राजस्व जुटाने की व्यवस्था पर जोर दिया जा सकता है।

प्रधानमंत्री आवास योजना के घरों को भी राहत की उम्मीद

ग्रामीण क्षेत्रों में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनाए गए मकानों को लेकर भी टैक्स का प्रावधान प्रस्तावित था। अब नियमों में बदलाव के दौरान ऐसे गरीब परिवारों को भी राहत मिलने की संभावना है।

पंचायतों की आय बढ़ाने का था उद्देश्य

सरकार ने ग्राम पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के उद्देश्य से ग्राम पंचायत कर, दर एवं शुल्क नियमावली-2026 को मंजूरी दी थी। इसके तहत पंचायतों को स्थानीय स्तर पर विभिन्न कर और शुल्क वसूलने का अधिकार दिया गया था।

अब आवासीय मकानों से कर हटाने के बाद पंचायतों की आय बढ़ाने के लिए व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और अन्य गतिविधियों पर शुल्क वसूली का रास्ता अपनाया जा सकता है।

अभी अंतिम अधिसूचना का इंतजार

सरकार की ओर से नियमों में संशोधन की प्रक्रिया शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई है, लेकिन अंतिम अधिसूचना जारी होने के बाद ही नई व्यवस्था पूरी तरह स्पष्ट होगी। इसलिए फिलहाल ग्रामीण परिवारों को प्रस्तावित राहत को लेकर आधिकारिक आदेश का इंतजार करना होगा।

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