गया : विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला 2026 की तैयारियों के बीच गया शहर को नया और आकर्षक रूप देने का काम तेज हो गया है। इसी कड़ी में जिला प्रशासन की ओर से चलाए जा रहे ‘पेंट द सिटी’ अभियान में IIM के छात्र-छात्राओं ने भी हिस्सा लिया। विद्यार्थियों ने गायत्री घाट की दीवारों पर आकर्षक वॉल पेंटिंग बनाकर गया की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को रंगों के जरिए जीवंत किया।
गायत्री घाट पर छात्रों ने दिखाई कलात्मक प्रतिभा
पितृपक्ष मेला के दौरान देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के गया पहुंचने की उम्मीद है। इसे देखते हुए शहर के प्रमुख घाटों, मेला क्षेत्र और संपर्क मार्गों का सौंदर्यीकरण किया जा रहा है।
इसी अभियान के तहत IIM के छात्र-छात्राओं ने रविवार को गायत्री घाट पर वॉल पेंटिंग की। उनकी बनाई कलाकृतियों में गया की धार्मिक पहचान और पितृपक्ष से जुड़ी परंपराओं की झलक देखने को मिल रही है।
भगवान विष्णु से लेकर रामायण के प्रसंग तक
‘पेंट द सिटी’ अभियान के तहत बनाई जा रही पेंटिंग में भगवान विष्णु के चरण, गया तीर्थ का पौराणिक इतिहास, रामायण के प्रसंग, पितृपक्ष और पिंडदान की परंपराएं प्रमुखता से दिखाई जा रही हैं।
इसके साथ ही बिहार की पारंपरिक लोककलाओं को भी दीवारों पर जगह दी जा रही है। इससे धार्मिक स्थलों का सौंदर्य बढ़ने के साथ गया की सांस्कृतिक पहचान भी लोगों के सामने नए अंदाज में आएगी।
रंगों के साथ स्वच्छता का संदेश
यह अभियान केवल शहर के सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं है। दीवारों पर बनाई जा रही कलाकृतियों के जरिए लोगों को ‘स्वच्छ गया-स्वस्थ गया’, जल संरक्षण और सिंगल यूज प्लास्टिक से बचने का संदेश भी दिया जा रहा है।
इस पहल का उद्देश्य श्रद्धालुओं को धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण के साथ स्वच्छ एवं सुंदर गया का अनुभव कराना है।
प्रमुख घाटों को भी दिया जा रहा नया रूप
जिला प्रशासन की ओर से देवघाट, विष्णुपद मंदिर क्षेत्र, सीताकुंड, गायत्री घाट और गदाधर घाट समेत मेला क्षेत्र के कई प्रमुख स्थानों का सौंदर्यीकरण किया जा रहा है।
घाटों और प्रमुख रास्तों की दीवारों पर भित्ति चित्र बनाए जा रहे हैं, ताकि पितृपक्ष के दौरान गया आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर और आकर्षक वातावरण मिल सके।
IIM के विद्यार्थियों की रचनात्मक पहल बनी आकर्षण
इस अभियान में IIM के कई छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। विद्यार्थियों ने अपनी कला के माध्यम से धार्मिक परंपराओं और स्थानीय संस्कृति को आधुनिक प्रस्तुति देने का प्रयास किया।
इस पहल से युवाओं की भागीदारी भी पितृपक्ष की तैयारियों से जुड़ी है और शहर के सौंदर्यीकरण को एक नया आयाम मिल रहा है।







