नई दिल्ली : IRCTC होटल मामले में RJD प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार को फिलहाल राहत नहीं मिली है। मामले में न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ रही है और अदालत ने संबंधित याचिकाओं पर अपना फैसला टाल दिया है। अब अगली सुनवाई और संभावित आदेश को लेकर 10 सितंबर की तारीख पर नजर बनी हुई है।
दिल्ली की अदालत में चल रहे इस मामले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ पहले ही आरोप तय किए जा चुके हैं। सभी आरोपियों ने आरोपों से इनकार किया है और मामले में मुकदमे का सामना कर रहे हैं।
क्या है IRCTC होटल मामला?
यह मामला वर्ष 2004 से 2009 के बीच लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहने के दौरान IRCTC के रांची और पुरी स्थित होटलों के रखरखाव से जुड़े ठेकों में कथित अनियमितताओं से संबंधित है।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि इन होटलों के संचालन और रखरखाव का ठेका एक निजी कंपनी को दिया गया था और इसके बदले जमीन से जुड़े लाभ पहुंचाए गए। मामले में CBI और ED की जांच के आधार पर कानूनी कार्रवाई चल रही है।
लालू परिवार के कई सदस्य मामले में आरोपी
इस मामले में लालू प्रसाद यादव के अलावा राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव सहित परिवार के अन्य सदस्यों के नाम भी सामने आए हैं।
अदालत ने अक्टूबर 2025 में मामले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और अन्य आरोपियों के खिलाफ अलग-अलग धाराओं के तहत आरोप तय किए थे। आरोपियों ने अदालत के सामने खुद को निर्दोष बताया था।
दिल्ली हाईकोर्ट में भी चल रही कानूनी लड़ाई
मामले में आरोप तय किए जाने को चुनौती देते हुए लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया गया है। CBI ने इन याचिकाओं का विरोध किया है।
हाईकोर्ट ने फिलहाल चल रहे ट्रायल पर रोक लगाने से इनकार किया है। यानी निचली अदालत में मामले की कार्यवाही जारी रहने का रास्ता खुला हुआ है।
कोर्ट के फैसले पर टिकी नजर
मामले में अदालत की अगली कार्रवाई अब महत्वपूर्ण मानी जा रही है। लालू परिवार की ओर से दायर याचिकाओं और आरोपों को लेकर अदालत का रुख आगे की कानूनी प्रक्रिया की दिशा तय कर सकता है।
फिलहाल मामले में अंतिम दोषसिद्धि का कोई सवाल नहीं है; मामला न्यायिक प्रक्रिया में है और आरोपों का परीक्षण अदालत में होना बाकी है।
क्या है CBI और ED का आरोप?
जांच एजेंसियों के अनुसार, IRCTC के दो होटलों के रखरखाव का ठेका देने में कथित तौर पर नियमों का पालन नहीं किया गया। एजेंसियों का आरोप है कि इसके बदले पटना में करीब तीन एकड़ जमीन से जुड़ा लाभ पहुंचाया गया।
वहीं, लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार की ओर से इन आरोपों को खारिज किया जाता रहा है।







