पटना : बिहार में सड़क कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने वाली गोरखपुर-सिलीगुड़ी ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे परियोजना को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। यह एक्सप्रेसवे बिहार के 8 जिलों से होकर गुजरेगा और उत्तर बिहार तथा सीमांचल को उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल से बेहतर कनेक्टिविटी देगा। परियोजना को क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक कॉरिडोर के रूप में देखा जा रहा है।
बिहार के किन 8 जिलों से गुजरेगा एक्सप्रेसवे?
प्रस्तावित एक्सप्रेसवे बिहार में पश्चिम से पूर्व की ओर बढ़ते हुए इन जिलों से गुजरेगा-
- पश्चिम चंपारण
- पूर्वी चंपारण
- शिवहर
- सीतामढ़ी
- मधुबनी
- सुपौल
- अररिया
- किशनगंज
किशनगंज के बाद यह कॉरिडोर पश्चिम बंगाल की ओर बढ़ते हुए सिलीगुड़ी से जुड़ेगा। इससे उत्तर बिहार और सीमांचल के कई क्षेत्रों को तेज सड़क संपर्क मिलने की उम्मीद है।
कैसा होगा पूरा रूट?
एक्सप्रेसवे बिहार में पश्चिम चंपारण से प्रवेश करेगा। इसके बाद पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी और मधुबनी होते हुए यह सुपौल पहुंचेगा।
इसके बाद रूट अररिया और किशनगंज की ओर बढ़ेगा। किशनगंज के बाद एक्सप्रेसवे पश्चिम बंगाल में प्रवेश करेगा और सिलीगुड़ी से जुड़ेगा।
किन इलाकों को मिलेगा सीधा फायदा?
प्रस्तावित एलाइनमेंट के अनुसार अलग-अलग जिलों में कई प्रमुख प्रखंड और इलाके इस कॉरिडोर से जुड़ेंगे।
मधुबनी: लौकही, फुलपरास, बाबूबरही, खजौली, राजनगर, कलुआही और बेनीपट्टी जैसे इलाके प्रस्तावित रूट में बताए गए हैं।
सुपौल: निर्मली, करहरी, छातापुर, प्रतापगंज और राघोपुर क्षेत्र से एक्सप्रेसवे गुजरने का प्रस्ताव है।
अररिया: नरपतगंज, फारबिसगंज, अररिया, कुर्साकांटा और सिकटी जैसे क्षेत्र रूट में शामिल बताए गए हैं।
किशनगंज : बहादुरगंज, कोईमारी, पोठिया, बरचौंडी और हरिंदुबल सहित कई इलाके प्रस्तावित एलाइनमेंट में हैं।
नोट: एलाइनमेंट से जुड़े गांवों और स्थानीय मार्गों में संशोधन संभव है। भूमि अधिग्रहण और अंतिम स्वीकृति की प्रक्रिया के साथ अंतिम रूट स्पष्ट होगा।
कितनी लंबी होगी यह परियोजना?
उपलब्ध रिपोर्टों में परियोजना की लंबाई अलग-अलग चरणों में अलग बताई गई है। बिहार में इसका हिस्सा करीब 400–416 किलोमीटर बताया गया है, जबकि विस्तृत परियोजना का कुल कॉरिडोर लगभग 520 किलोमीटर तक बताया गया है।
परियोजना की अनुमानित लागत करीब 32 हजार करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है। वहीं कुछ रिपोर्टों में पूरे प्रोजेक्ट की लागत लगभग 37,465 करोड़ रुपये बताई गई है।
120 किमी प्रति घंटे तक की रफ्तार
यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे हाई-स्पीड कनेक्टिविटी को ध्यान में रखकर विकसित किया जा रहा है। प्रस्तावित सड़क पर वाहनों की अधिकतम गति करीब 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक हो सकती है।
इससे लंबी दूरी के सफर में समय की बचत होने के साथ-साथ माल ढुलाई भी तेज होने की उम्मीद है।
उत्तर बिहार और सीमांचल की बदलेगी तस्वीर?
इस परियोजना को सिर्फ सड़क निर्माण के तौर पर नहीं, बल्कि आर्थिक कॉरिडोर के रूप में देखा जा रहा है।
एक्सप्रेसवे बनने के बाद-
- उत्तर बिहार से यूपी की कनेक्टिविटी बेहतर होगी।
- सीमांचल से पश्चिम बंगाल तक पहुंच आसान होगी।
- माल परिवहन और लॉजिस्टिक्स को गति मिल सकती है।
- स्थानीय व्यापार और उद्योग को फायदा मिलने की उम्मीद है।
- होटल, ट्रांसपोर्ट और अन्य सेवाओं में रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।
- पिछड़े ग्रामीण इलाकों में नए बाजार विकसित होने की संभावना है।
जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण
परियोजना को जमीन पर उतारने के लिए प्रभावित जिलों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। रिपोर्ट के अनुसार जमीन का मूल्यांकन और रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया कई क्षेत्रों में चल रही है। इसके बाद आपत्तियों के निपटारे और मुआवजे की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
2028 तक पूरा करने का लक्ष्य
उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार परियोजना को 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, इतने बड़े ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट में भूमि अधिग्रहण, निर्माण और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण समयसीमा में बदलाव संभव है।







