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पटना में अलाव से बढ़ रहा वायु प्रदूषण, PM2.5 में 18 से 30% तक वृद्धि

बिहार: पटना में सर्दियों के दौरान खुले में जलाए जाने वाले अलाव से वायु प्रदूषण बढ़ने का मामला सामने आया है। एक विशेष अध्ययन में पाया गया है कि अलाव जलाने के कारण आसपास के वातावरण में PM2.5 के स्तर में लगभग 18 से 30 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है। इससे विशेष रूप से कमजोर और संवेदनशील वर्गों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने का खतरा है।

राष्ट्रीय वायु दिवस पर नगर आयुक्त ने जारी की अध्ययन रिपोर्ट

राष्ट्रीय वायु दिवस के अवसर पर पटना नगर निगम के नगर आयुक्त यशपाल मीणा ने सोमवार को ‘Beyond the Bonfires: Rethinking Winter Heating for Vulnerable Populations of Patna’ अध्ययन रिपोर्ट का विमोचन किया। इस दौरान नगर आयुक्त ने विशेषज्ञों के साथ अध्ययन के निष्कर्षों और सर्दियों में वायु प्रदूषण कम करने के उपायों पर चर्चा की।

आवासहीन से लेकर स्ट्रीट वेंडर्स तक, इन लोगों पर हुआ अध्ययन

एयर पॉल्यूशन एक्शन ग्रुप (A-PAG) के विशेषज्ञों ने पटना नगर निगम के सहयोग से यह अध्ययन किया। इसका उद्देश्य सर्दियों में ठंड से बचने के लिए अलाव पर निर्भरता, उससे होने वाले वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य जोखिमों को समझना था।

अध्ययन के दौरान आवासहीन लोगों, रात की शिफ्ट में काम करने वाले कर्मियों, यात्रियों, स्ट्रीट वेंडर्स और बस्तियों में रहने वाले लोगों से बातचीत की गई। आश्रय स्थलों, स्लम क्षेत्रों और बस स्टैंड सहित विभिन्न स्थानों का दौरा कर ठंड से बचने के लिए अपनाए जाने वाले तरीकों की जानकारी जुटाई गई।

अलाव से बढ़ता है PM2.5, स्वास्थ्य पर भी खतरा

अध्ययन में सामने आया कि सर्दियों में खुले में जलाए जाने वाले अलाव वायु प्रदूषण का एक महत्वपूर्ण स्रोत हैं। अलाव के कारण आसपास के वातावरण में PM2.5 के स्तर में करीब 18 से 30 प्रतिशत तक की वृद्धि देखी गई। इससे खासकर संवेदनशील आबादी के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

955 बेड वाले आश्रय स्थलों पर मिलेंगी हीटिंग की सुविधाएं

नगर आयुक्त यशपाल मीणा ने बताया कि पटना नगर निगम की ओर से सर्दियों में आवासहीन और जरूरतमंद लोगों के लिए आश्रय स्थलों की व्यवस्था की जाती है। निगम के छह स्थायी आश्रय स्थल, 12 जर्मन हैंगर और आठ स्थानों पर टेंट लगाए जाते हैं। इन सभी आश्रय स्थलों में कुल 955 बेड की व्यवस्था है।

इन जगहों पर पेयजल, शौचालय, बिस्तर, कंबल और हीटर सहित जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। नगर आयुक्त ने कहा कि बेहतर आश्रय और हीटिंग सुविधाएं मिलने से जरूरतमंद लोगों की खुले में अलाव जलाने पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।

गिग वर्कर्स के लिए AC लाउंज को विंटर-रेडी करने की तैयारी

पटना नगर निगम क्षेत्र में वर्तमान में गिग वर्कर्स के लिए दो स्थानों पर एसी लाउंज की सुविधा उपलब्ध है। बैठक में इन लाउंज को सर्दियों के दौरान विंटर-रेडी बनाने और जरूरत के अनुसार इनकी संख्या बढ़ाने पर भी चर्चा की गई।

विशेषज्ञों के अनुसार, सुरक्षित और सुविधायुक्त स्थान उपलब्ध होने से सड़कों और खुले स्थानों पर ठंड से बचने के लिए अलाव जलाने की जरूरत कम हो सकती है।

वायु प्रदूषण नियंत्रण में बेहतर काम के लिए दो अंचलों को पुरस्कार

कार्यक्रम में A-PAG के विशेषज्ञों ने पटना नगर निगम की ओर से वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। विशेष रूप से निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट यानी C&D Waste के प्रबंधन और कचरा उठाव एवं कचरा प्वाइंट के त्वरित प्रबंधन को महत्वपूर्ण पहल बताया गया।

C&D Waste और कचरा प्वाइंट से जुड़ी शिकायतों के त्वरित निष्पादन और प्रभावी प्रबंधन के लिए अजीमाबाद अंचल और नूतन राजधानी अंचल को पुरस्कृत भी किया गया।

वैकल्पिक विंटर हीटिंग व्यवस्था पर जोर

अध्ययन के निष्कर्षों के बाद सर्दियों में खुले में अलाव जलाने की निर्भरता कम करने के लिए सुरक्षित और वैकल्पिक विंटर हीटिंग व्यवस्था उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। इसके साथ ही जरूरतमंद और संवेदनशील आबादी के लिए बेहतर आश्रय एवं आवश्यक सुविधाएं बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।

कार्यक्रम में अपर नगर आयुक्त, मुख्य नगर अभियंता, नूतन राजधानी अंचल के कार्यपालक पदाधिकारी, A-PAG की एसोसिएट डायरेक्टर कृतिका चौधरी, KCT ग्रुप की संस्थापक निताशा थापर, आगा खान फाउंडेशन के विशेषज्ञ, निगम के NCAP कंसल्टेंट सहित अन्य पदाधिकारी और विशेषज्ञ मौजूद रहे।

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