सीवान: कालाजार के खिलाफ चल रही नियंत्रण गतिविधियों को और प्रभावी बनाने के लिए केंद्रीय टीम ने जिले के कालाजार प्रभावित गांवों में पहुंचकर बीमारी के प्रमुख वाहक बालू मक्खी (सैंड फ्लाई) की सघनता का वैज्ञानिक आकलन किया। टीम ने गोरेयाकोठी प्रखंड के सिसई और भगवानपुर हाट प्रखंड के रतौली गांव में वेक्टर डेंसिटी का निरीक्षण किया।
इस दौरान निर्धारित वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत बालू मक्खियों को पकड़कर सुरक्षित रूप से संग्रहित किया गया। इन नमूनों का आगे प्रयोगशाला स्तर पर परीक्षण एवं वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा। केंद्रीय टीम के निरीक्षण का उद्देश्य केवल प्रभावित गांवों में बालू मक्खी की मौजूदगी का पता लगाना नहीं, बल्कि उसकी संख्या, वितरण और सघनता का आकलन करना भी था। इससे कालाजार संक्रमण के संभावित जोखिम और वर्तमान वेक्टर नियंत्रण गतिविधियों की प्रभावशीलता को समझने में स्वास्थ्य विभाग को मदद मिलेगी। केंद्रीय निरीक्षण दल ने पहले गोरियाकोठी प्रखंड के सिसई गांव का दौरा किया। इसके बाद भगवानपुर हाट प्रखंड के कालाजार प्रभावित रतौली गांव में वेक्टर डेंसिटी का सर्वे किया गया। दोनों स्थानों पर टीम ने निर्धारित वैज्ञानिक प्रक्रिया के अनुसार बालू मक्खियों को पकड़ा और उन्हें आगे की जांच के लिए सुरक्षित रखा।
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, बालू मक्खी कालाजार का प्रमुख वाहक है। ऐसे में प्रभावित क्षेत्रों में इसकी संख्या और सघनता की जानकारी बीमारी के नियंत्रण की रणनीति तैयार करने में अहम भूमिका निभाती है। केंद्रीय टीम के लिए 7 से 11 सितंबर 2026 तक वेक्टर डेंसिटी निरीक्षण कार्यक्रम निर्धारित किया गया है। इसके तहत सीवान के गोरेयाकोठी, भगवानपुर हाट और बसंतपुर प्रखंड के कालाजार प्रभावित गांवों के साथ गोपालगंज के बरौली, बैकुंठपुर और मांझा प्रखंड के प्रभावित गांवों में भी बालू मक्खी की सघनता का आकलन किया जाएगा।
निरीक्षण दल में राष्ट्रीय, राज्य, जोनल एवं जिला स्तर के अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल रहे। राष्ट्रीय स्तर से नेशनल एंटोमोलॉजिस्ट यज्ञ नाथ प्रसाद शर्मा, मलेरिया इंस्पेक्टर अनिल नेगी एवं जुग्गुल किशोर मीणा, राज्य स्तर से स्टेट एंटोमोलॉजिस्ट मोहन कुमार तथा जोनल स्तर से मुजफ्फरपुर के जोनल एंटोमोलॉजिस्ट नीरज कुमार सिंह ने निरीक्षण में भाग लिया। जिला स्तर पर जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. ओम प्रकाश लाल, पीरामल स्वास्थ्य के राजेश कुमार तिवारी, इंसेक्ट कलेक्टर रोहित कुमार एवं एफडब्ल्यू उपेंद्र कुमार सिंह मौजूद रहे।
डॉ. ओम प्रकाश लाल ने बताया कि कालाजार नियंत्रण के लिए नियमित निगरानी और वैज्ञानिक अध्ययन बेहद जरूरी है। बालू मक्खी की वेक्टर डेंसिटी से प्राप्त आंकड़ों और एकत्र किए गए नमूनों के अध्ययन के आधार पर प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी और नियंत्रण गतिविधियों की आगे की कार्ययोजना तैयार करने में मदद मिलेगी। स्वास्थ्य विभाग का प्रयास है कि कालाजार नियंत्रण को केवल मरीजों की पहचान और उपचार तक सीमित न रखते हुए बीमारी के प्रमुख वाहक बालू मक्खी की स्थिति पर भी लगातार निगरानी रखी जाए।







