पटना: बिहार के सरकारी स्कूलों में बिजली की समस्या को दूर करने के लिए शिक्षा विभाग ने बड़ी योजना तैयार की है। राज्य के करीब 78 हजार सरकारी स्कूलों में सोलर पैनल लगाए जाएंगे। इस योजना पर 800 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने का अनुमान है। स्कूलों को सौर ऊर्जा से जोड़ने की यह योजना तीन चरणों में पूरी की जाएगी।
फिलहाल सरकारी स्कूलों में बिजली बिल पर हर साल करीब 60 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। इसके अलावा बिजली से जुड़े रखरखाव पर लगभग 8 करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं। सोलर पैनल लगने के बाद बिजली के इस खर्च को काफी कम करने की योजना है।
69 हजार स्कूलों में लगेंगे 2 किलोवाट के सोलर पैनल
जल-जीवन-हरियाली अभियान और नवीन ऊर्जा संवर्धन नीति के तहत प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में सोलर पैनल लगाए जाएंगे। ऐसे करीब 69 हजार स्कूलों को योजना में शामिल किया गया है। इन स्कूलों में 2 किलोवाट क्षमता के सोलर पैनल लगाए जाएंगे।
एक स्कूल में सोलर पैनल लगाने पर करीब 50 हजार से 80 हजार रुपये तक खर्च आने का अनुमान है। सौर ऊर्जा से स्कूलों में पंखे, लाइट और मोटर पंप चलाने के लिए बिजली उपलब्ध हो सकेगी।
9 हजार हाई स्कूल भी होंगे सौर ऊर्जा से लैस
राज्य के करीब 9 हजार उच्च माध्यमिक विद्यालयों में 3 से 5 किलोवाट क्षमता वाले सोलर पैनल लगाए जाएंगे। इन स्कूलों में सोलर सिस्टम लगाने पर करीब 1 लाख से 2.50 लाख रुपये तक खर्च होने का अनुमान है।
योजना के पहले चरण में उच्च माध्यमिक विद्यालयों को प्राथमिकता दी गई है। इसका उद्देश्य स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर और साइंस लैब जैसी सुविधाओं को बिजली कटौती की समस्या से मुक्त करना है।
हर दिन 10 से 25 यूनिट बिजली उत्पादन का अनुमान
सोलर पैनल लगने के बाद प्रत्येक स्कूल में प्रतिदिन करीब 10 से 25 यूनिट बिजली पैदा होने का अनुमान है। इससे स्कूलों की बिजली जरूरत का बड़ा हिस्सा पूरा किया जा सकेगा।
गर्मी और सर्दी की छुट्टियों के दौरान यदि स्कूलों में बिजली की खपत कम रहती है तो अतिरिक्त बिजली को पावर ग्रिड में भेजा जा सकेगा। अतिरिक्त बिजली का सालाना हिसाब मार्च में किया जाएगा।
नेट मीटरिंग से घटेगा बिजली बिल
स्कूलों में नेट मीटरिंग की व्यवस्था भी लागू की जाएगी। इसके तहत ऊर्जा शुल्क शून्य तक हो सकता है। हालांकि, स्कूलों को स्वीकृत लोड के आधार पर निर्धारित फिक्स्ड चार्ज का भुगतान करना होगा। इससे स्कूलों का सालाना बिजली बिल काफी कम होने की उम्मीद है।
सोलर पैनल से पढ़ाई और नल-जल व्यवस्था को भी मिलेगा फायदा
सौर ऊर्जा की उपलब्धता से ग्रामीण इलाकों में बिजली कटौती के बावजूद स्मार्ट टीवी, कंप्यूटर और इंटरनेट राउटर जैसी सुविधाएं चलती रहेंगी। इससे बिजली की कमी के कारण पढ़ाई प्रभावित होने की समस्या कम होगी।
इसके अलावा समरसेबल पंप को भी सौर ऊर्जा से चलाया जा सकेगा। इससे स्कूलों में नल-जल व्यवस्था को बेहतर बनाने और शौचालयों में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
छुट्टियों के दौरान अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भेजे जाने से स्कूलों का बिजली खर्च और कम हो सकता है। साथ ही सौर ऊर्जा के इस्तेमाल से कार्बन उत्सर्जन घटाने में मदद मिलेगी। बच्चों को स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने में भी यह योजना उपयोगी साबित हो सकती है।
स्कूलों को बिजली के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि सरकारी स्कूलों को बिजली के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। सोलर पैनल के माध्यम से स्कूलों में जरूरत के अनुसार बिजली पैदा होगी। उन्होंने कहा कि यह योजना पर्यावरण संरक्षण के साथ आर्थिक रूप से भी फायदेमंद साबित होगी।







