पटना : बिहार में जमीन से जुड़े रिकॉर्ड में होने वाली गलतियों को सुधारने के लिए राज्य सरकार अब बड़े स्तर पर अभियान चलाने जा रही है। 15 सितंबर 2026 से राज्यव्यापी अभियान शुरू किया जाएगा, जिसके तहत जमीन के दस्तावेजों में दर्ज गलतियों और विसंगतियों को चिह्नित कर उन्हें सुधारने की प्रक्रिया तेज की जाएगी।
सरकार का उद्देश्य जमीन मालिकों को लंबे समय से चली आ रही रिकॉर्ड संबंधी परेशानियों से राहत देना और भूमि रिकॉर्ड को अधिक सटीक एवं पारदर्शी बनाना है।
जमीन रिकॉर्ड में किस तरह की गलतियां होंगी दूर?
अभियान के दौरान जमीन से जुड़े रिकॉर्ड में मौजूद विभिन्न प्रकार की त्रुटियों की पहचान की जाएगी। इनमें जमाबंदी, स्वामित्व संबंधी विवरण और अन्य राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज गलत या अधूरी जानकारी को ठीक करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
सरकार की कोशिश है कि रिकॉर्ड दुरुस्त होने के बाद जमीन मालिकों को भविष्य में दाखिल-खारिज, बिक्री, विरासत या अन्य राजस्व कार्यों के दौरान अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
15 सितंबर से पूरे बिहार में चलेगा अभियान
राज्य सरकार की ओर से शुरू किया जा रहा यह अभियान केवल किसी एक जिले तक सीमित नहीं रहेगा। इसे पूरे बिहार में लागू किया जाएगा। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अधिकारियों को रिकॉर्ड की त्रुटियों की पहचान और उनके समाधान की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
अभियान के दौरान पुराने और डिजिटल दोनों तरह के भूमि रिकॉर्ड में सामने आने वाली विसंगतियों को दूर करने पर जोर रहेगा।
जमीन मालिकों को क्या होगा फायदा?
भूमि रिकॉर्ड में गलती होने पर जमीन मालिकों को अक्सर राजस्व कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। छोटी-सी गलती को ठीक कराने में भी समय लग जाता है और कई मामलों में दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया लंबी हो जाती है।
महाअभियान के जरिए ऐसी लंबित समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर दूर करने की कोशिश की जाएगी। इससे जमीन मालिकों को राहत मिलने और रिकॉर्ड सुधार की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है।
डिजिटल रिकॉर्ड को भी बनाया जाएगा ज्यादा भरोसेमंद
बिहार में भूमि रिकॉर्ड को लगातार डिजिटल किया जा रहा है। ऐसे में रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी का सही और अद्यतन होना बेहद जरूरी है।
सरकार की यह पहल डिजिटल भूमि रिकॉर्ड को अधिक विश्वसनीय बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सही रिकॉर्ड होने से जमीन के लेन-देन और स्वामित्व से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बढ़ सकती है।
लंबित मामलों के निपटारे पर भी रहेगा फोकस
अभियान के दौरान लंबे समय से लंबित जमीन रिकॉर्ड संबंधी मामलों की भी समीक्षा की जाएगी। राजस्व विभाग के अधिकारी रिकॉर्ड में मौजूद विसंगतियों को चिह्नित कर उनके समाधान की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएंगे।
सरकार का लक्ष्य है कि जमीन मालिकों को अपनी समस्या के समाधान के लिए बार-बार अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
जमीन विवाद कम करने में मिल सकती है मदद
जमीन के रिकॉर्ड में गलत नाम, गलत विवरण या अन्य विसंगतियां कई बार विवाद का कारण बन जाती हैं। ऐसे रिकॉर्ड को समय पर ठीक करने से भविष्य में होने वाले विवादों को कम करने में मदद मिल सकती है।
साथ ही, जमीन की खरीद-बिक्री और दूसरे कानूनी कार्यों में भी सही रिकॉर्ड महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
