नवगछिया: गोपालपुर प्रखंड के राघोपुर-काजीकोरैया जमींदारी तटबंध पर इस साल चलाए गए फ्लड फाइटिंग अभियान को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। जल संसाधन विभाग की ओर से तटबंध की सुरक्षा के लिए बड़े स्तर पर संसाधन और राशि खर्च किए जाने के बावजूद जुलाई में शुरू हुआ कटाव अगस्त में बांध टूटने और सितंबर की शुरुआत तक ब्रीच के 400 मीटर से अधिक बढ़ जाने तक पहुंच गया। ऐसे में अभियान की प्रभावशीलता और खर्च की पारदर्शिता को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
जुलाई में 110 मीटर कटाव, अगस्त में टूटा तटबंध
जानकारी के अनुसार, जुलाई में राघोपुर-काजीकोरैया तटबंध पर करीब 110 मीटर का कटाव हुआ था। इसके बाद कटावरोधी और फ्लड फाइटिंग कार्य शुरू किए गए। हालांकि 24 अगस्त की रात तटबंध टूट गया। सितंबर की शुरुआत तक टूटे हिस्से की लंबाई बढ़कर 400 मीटर से अधिक हो गई। इससे इलाके में बाढ़ का खतरा और बढ़ गया।
पिछले वर्षों में भी खर्च हुआ है बड़ा बजट
तटबंध क्षेत्र में कटावरोधी कार्यों पर पहले भी बड़ी राशि खर्च किए जाने का दावा किया जाता रहा है। वर्ष 2005-06 में स्थायी कटावरोधी कार्य के लिए करीब 13 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का रिकॉर्ड बताया गया है। वहीं वर्ष 2006 से 2019 के बीच पूरे नवगछिया अनुमंडल में स्थायी कटावरोधी और फ्लड फाइटिंग कार्यों पर करीब 686 करोड़ रुपये खर्च होने की जानकारी सामने आई है।
इस वर्ष भी तटबंध की सुरक्षा के लिए करीब 5 करोड़ रुपये की योजना स्वीकृत किए जाने की बात कही गई। इसके बावजूद तटबंध के बड़े हिस्से के टूटने के बाद अब योजनाओं के क्रियान्वयन और परिणाम को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
हजारों जियो बैग और बोरियों की उपलब्धता का दावा
प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, 3 सितंबर तक घटनास्थल पर 2,800 मेगा जियो बैग और करीब 1.25 लाख बालू भरी बोरियां उपलब्ध कराए जाने की बात कही गई थी। इसके अलावा पड़ोसी प्रमंडलों से करीब दो लाख अतिरिक्त बोरियां मंगाए जाने का दावा भी किया गया।
अब सवाल यह है कि उपलब्ध कराई गई सामग्री की वास्तविक खपत कितनी हुई। हाथी पांव, बंबू रोल, पोकलेन, जेसीबी और नावों के इस्तेमाल से संबंधित स्वीकृत मात्रा, बिल और वास्तविक कार्यस्थल पर हुई खपत का मिलान भी जांच का अहम हिस्सा हो सकता है।
सांसद पप्पू यादव ने उठाए पारदर्शिता पर सवाल
सांसद पप्पू यादव ने इस पूरे मामले में पारदर्शिता की मांग करते हुए विभाग से कई बिंदुओं पर जानकारी सार्वजनिक करने की बात कही है। उन्होंने पूछा है कि फ्लड फाइटिंग अभियान में कितने संवेदकों को काम दिया गया और प्रत्येक को कितना कार्यादेश जारी किया गया।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि 24 अगस्त से 11 सितंबर के बीच किन अभियंताओं ने मौके पर कैंप किया और मेजरमेंट बुक (MB) पर किस अधिकारी ने कार्य की पुष्टि कर भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।
नाव हादसे के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल
फ्लड फाइटिंग कार्य के दौरान नाव पलटने और मजदूरों के लापता होने की घटना ने भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए थे। बताया गया है कि मामले में जिलाधिकारी की ओर से कार्यपालक अभियंता से स्पष्टीकरण भी मांगा गया था। ऐसे में राहत और बचाव कार्य में लगे श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा की मांग उठ रही है।
खर्च और काम का ऑडिट कराने की मांग
स्थानीय स्तर पर अब मांग की जा रही है कि जल संसाधन विभाग फ्लड फाइटिंग अभियान से जुड़े खर्च और कार्यों का विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक करे। इसमें स्वीकृत राशि, वास्तविक भुगतान, संवेदकों को जारी कार्यादेश, जियो बैग और बालू भरी बोरियों की खरीद व खपत, मशीनों और नावों के उपयोग तथा मजदूरों के मस्टर रोल जैसी जानकारियां शामिल हों।
इसके साथ ही तटबंध की सुरक्षा में किसी स्तर पर लापरवाही हुई है या नहीं, इसकी भी जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की जा रही है। तटबंध के लगातार क्षतिग्रस्त होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद कटाव को समय रहते नियंत्रित क्यों नहीं किया जा सका।
