पटना : बिहार में जमीन के रिकॉर्ड से जुड़ी गड़बड़ियों को दूर करने के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग अब विशेष अभियान चलाने जा रहा है। राज्य में करीब पांच लाख जमाबंदियों में खाता, खेसरा, प्लॉट या रैयत का नाम गलत दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। रिकॉर्ड में इन गलतियों के कारण जमीन मालिकों को अपनी संपत्ति से जुड़े कई जरूरी काम कराने में परेशानी हो रही है।
विभाग ने अब ऐसे लंबित मामलों के समाधान के लिए 45 दिन का विशेष अभियान चलाने का फैसला किया है। अभियान के दौरान जमाबंदी में दर्ज गलत विवरणों को दुरुस्त करने और लंबे समय से लंबित मामलों का निपटारा करने पर जोर दिया जाएगा।
कहीं खाता नंबर तो कहीं रैयत का नाम गलत
जमीन की जमाबंदी में अलग-अलग तरह की गड़बड़ियां सामने आई हैं। कई मामलों में खाता नंबर गलत दर्ज है, जबकि कुछ जमाबंदियों में खेसरा या प्लॉट से जुड़ी जानकारी में त्रुटि है। कई रिकॉर्ड में रैयत यानी जमीन मालिक का नाम भी गलत दर्ज किया गया है।
इन विसंगतियों के कारण कई जमाबंदियों को लॉक कर दिया गया है। ऐसी स्थिति में जमीन मालिक राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर अपनी जमीन का सही विवरण नहीं देख पाते हैं। रिकॉर्ड लॉक होने से सुधार और अन्य राजस्व संबंधी प्रक्रियाएं भी प्रभावित होती हैं।
दो-तीन साल से लॉक हैं कई जमाबंदियां
कई अंचलों में रजिस्टर-2 के पन्ने फटने या गायब होने के कारण भी जमीन का सही रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हो सका। कुछ मामलों में रजिस्टर-2 में दर्ज जमाबंदी में गलत तरीके से बदलाव कर नई जमाबंदी तैयार किए जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं।
ऐसे रिकॉर्ड के आधार पर दाखिल-खारिज की प्रक्रिया पूरी होने और मालगुजारी की रसीद जारी होने के मामले भी सामने आए हैं। बाद में कुछ मामलों में अपीलीय प्राधिकार या न्यायालय द्वारा आदेश दिए जाने के बावजूद जमाबंदी में सुधार नहीं हो सका।
इस वजह से कई जमाबंदियां दो-तीन साल या उससे भी अधिक समय से लॉक पड़ी हैं। इससे जमीन मालिकों को लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
रजिस्टर-2 के मामलों में होगा जमाबंदी का पुनर्गठन
रजिस्टर-2 के फटे या गायब पन्नों से जुड़े मामलों को सुलझाने के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने अंचल स्तर पर जमाबंदी पुनर्गठन का निर्देश दिया है। इसके तहत उपलब्ध पुराने रिकॉर्ड और दस्तावेजों के आधार पर जमाबंदी को व्यवस्थित करने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
हालांकि, बड़ी संख्या में मामले अब भी लंबित हैं। कई जमीन मालिकों ने सुधार के लिए आवेदन और जरूरी दस्तावेज जमा किए हैं, लेकिन प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी कुछ मामलों में रिकॉर्ड में बदलाव नहीं हो सका है।
जमीन बेचने से लेकर लोन लेने तक में परेशानी
जमाबंदी में गलती का सीधा असर जमीन मालिकों पर पड़ता है। रिकॉर्ड में नाम या जमीन का विवरण सही नहीं होने के कारण जमीन की बिक्री, खरीद और अन्य राजस्व संबंधी कार्यों में परेशानी आती है।
इसके अलावा जमीन के आधार पर बैंक से ऋण लेने और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने में भी दिक्कत हो सकती है। ऐसे में 45 दिन का विशेष अभियान जमीन मालिकों के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अभियान के दौरान लंबित जमाबंदियों की जांच कर रिकॉर्ड में दर्ज खाता, खेसरा, प्लॉट और रैयत के नाम जैसी गड़बड़ियों को ठीक करने की कोशिश की जाएगी। इससे जमीन के रिकॉर्ड को अधिक सटीक और व्यवस्थित बनाने के साथ लंबे समय से परेशान जमीन मालिकों को भी राहत मिलने की उम्मीद है।







