पटना : बिहार में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए लगातार नई पहल की जा रही है। अब इसका सीधा लाभ किसानों को मिलने की उम्मीद है। खेतों की सिंचाई के लिए डीजल पंप और महंगी बिजली पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से राज्य में आधुनिक सिंचाई व्यवस्था विकसित की जा रही है। इसके तहत पारंपरिक जल स्रोतों को सौर ऊर्जा आधारित तकनीक से जोड़ने की तैयारी है।
आशा मॉडल किया जा रहा विकसित
जानकारी के मुताबिक, बिहार में ‘आशा मॉडल’ यानी ऑटोमेटेड सोलर पॉवर्ड बेस्ड हाई इफिशिएंसी इरीगेशन एप्लीकेशन को विकसित किया जा रहा है। इस मॉडल के जरिए पारंपरिक आहर-पाइन प्रणाली को आधुनिक तकनीक से जोड़ा जाएगा।
इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य किसानों की सिंचाई लागत को कम करना और उन्हें डीजल पंप तथा महंगी बिजली पर निर्भरता से राहत दिलाना है। इससे किसानों को कम लागत में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में मदद मिल सकती है।
पहली बार किसानों के लिए तैयार हो रही ऐसी व्यवस्था
बताया जा रहा है कि राज्य में पहली बार इस तरह की आधुनिक व्यवस्था को बड़े स्तर पर विकसित करने की तैयारी है। योजना के तहत पारंपरिक जल स्रोतों जैसे आहर और तालाब के आसपास सोलर पैनल लगाए जाएंगे। इन सोलर पैनलों से पैदा होने वाली बिजली का इस्तेमाल पानी के पंप चलाने में किया जाएगा।
पंप के जरिए जल स्रोतों से पानी खेतों तक पहुंचाया जाएगा। खास बात यह होगी कि सिंचाई की जरूरत पूरी होने के बाद बची हुई सौर ऊर्जा को सरकारी बिजली ग्रिड में भेजने की व्यवस्था भी की जा सकती है। पटना के पालीगंज में इस तरह की व्यवस्था विकसित करने की तैयारी की जा रही है।
बारिश और नहर के पानी का होगा बेहतर इस्तेमाल
नए मॉडल में मानसून के दौरान होने वाली बारिश और नहरों से मिलने वाले पानी को आहर या तालाब में संरक्षित किया जाएगा। जरूरत के समय इसी पानी का इस्तेमाल खेतों की सिंचाई के लिए किया जा सकेगा।
अगर खेतों में पानी की जरूरत होगी तो ऑटोमेटिक पंप को चालू किया जा सकेगा। ये पंप सोलर पैनल से मिलने वाली बिजली से संचालित होंगे। इससे जल स्रोत से खेतों तक पानी पहुंचाने की प्रक्रिया आसान और कम खर्चीली हो सकती है।
किसानों को मिलेंगे कई फायदे
सौर ऊर्जा आधारित इस सिंचाई व्यवस्था से किसानों को कई स्तर पर फायदा मिलने की उम्मीद है। बारिश कम होने की स्थिति में भी संरक्षित पानी का इस्तेमाल सिंचाई के लिए किया जा सकेगा। इससे खेती के लिए पानी की उपलब्धता बेहतर हो सकती है।
इसके अलावा किसानों को डीजल और महंगी बिजली पर होने वाले खर्च से राहत मिल सकती है। अंडरग्राउंड पाइपलाइन के माध्यम से खेतों तक पानी पहुंचाने से पानी की बर्बादी को भी कम किया जा सकेगा।
सौर ऊर्जा से संचालित पंप होने के कारण सिंचाई की लागत कम करने में मदद मिल सकती है। वहीं, जरूरत से अधिक पैदा होने वाली सौर ऊर्जा को ग्रिड में भेजने की व्यवस्था होने पर इस मॉडल का आर्थिक लाभ भी बढ़ सकता है।
बिहार में सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई व्यवस्था को बढ़ावा देने की यह पहल किसानों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। यदि इसका सफलतापूर्वक विस्तार होता है तो आने वाले समय में राज्य के ग्रामीण इलाकों में सिंचाई व्यवस्था को अधिक सस्ती, आधुनिक और टिकाऊ बनाने में मदद मिल सकती है।







