डेस्क : अगर आपके बैंक खाते में अचानक आपकी सामान्य आय और लेनदेन के मुकाबले बहुत ज्यादा रकम का लेनदेन होने लगे, तो आने वाले समय में बैंक उस पर अतिरिक्त निगरानी रख सकता है। साइबर फ्रॉड और फर्जी यानी ‘मनी म्यूल’ खातों पर लगाम लगाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग व्यवस्था में बदलाव का मसौदा तैयार किया है।
खाते की प्रोफाइल के आधार पर होगी निगरानी
नई व्यवस्था में बैंक खाताधारक की वित्तीय प्रोफाइल तैयार करेंगे। इसमें ग्राहक की सामान्य आय, खाते में होने वाले नियमित लेनदेन और उसकी बैंकिंग गतिविधियों को ध्यान में रखा जाएगा।
अगर किसी खाते में अचानक ऐसा लेनदेन होता है जो ग्राहक की सामान्य प्रोफाइल से काफी अलग है, तो बैंक का सिस्टम उसे संदिग्ध गतिविधि के रूप में चिन्हित कर सकता है।
साइबर फ्रॉड से जुड़ी रकम पर भी होगी नजर
RBI की प्रस्तावित व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य साइबर अपराध से हासिल रकम को एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर करने वाले नेटवर्क पर रोक लगाना है। बैंक संदिग्ध मनी-म्यूल गतिविधियों और साइबर धोखाधड़ी से जुड़े लेनदेन की पहचान के लिए तकनीक, AI और मशीन लर्निंग आधारित सिस्टम का इस्तेमाल कर सकते हैं।
संदिग्ध लेनदेन मिलने पर क्या होगा?
अगर बैंक को किसी खाते में संदिग्ध गतिविधि दिखाई देती है, तो संबंधित खाते या लेनदेन पर अस्थायी रोक लगाई जा सकती है। बैंक को खाताधारक को रोक लगाने का कारण और आगे की प्रक्रिया की जानकारी देनी होगी।
खाताधारक को अपनी स्थिति स्पष्ट करने और लेनदेन के वास्तविक होने का प्रमाण देने के लिए 20 दिन तक का समय दिए जाने का प्रावधान प्रस्तावित है। इसके बाद बैंक को जांच कर निर्णय लेना होगा।
अधिकतम कितने समय तक रह सकती है रोक?
प्रस्तावित प्रक्रिया के अनुसार बैंक की शुरुआती जांच और आगे संबंधित एजेंसी की कार्रवाई को मिलाकर रोक की अवधि अधिकतम 60 दिन तक हो सकती है। अगर जांच में खाते या लेनदेन को संदिग्ध बनाए रखने का आधार नहीं मिलता है, तो रोक हटाई जानी होगी।
आम खाताधारकों को क्या सावधानी रखनी चाहिए?
- अपने बैंक खाते का इस्तेमाल किसी दूसरे व्यक्ति के पैसे को इधर-उधर ट्रांसफर करने के लिए न करें।
- बड़ी रकम के लेनदेन का उचित रिकॉर्ड और स्रोत से जुड़े दस्तावेज रखें।
- अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने खाते में रकम मंगाकर आगे ट्रांसफर न करें।
- बैंक खाते में मोबाइल नंबर और ई-मेल हमेशा अपडेट रखें।
- संदिग्ध या अनजान UPI/बैंकिंग लेनदेन होने पर तुरंत बैंक को सूचित करें।
- अपनी आय और कारोबार के अनुरूप बैंकिंग लेनदेन रखें तथा जरूरत पड़ने पर लेनदेन का वैध कारण बताने में सक्षम रहें।
1 अप्रैल 2027 से लागू होने की तैयारी
RBI की प्रस्तावित नई व्यवस्था 1 अप्रैल 2027 से अनिवार्य रूप से लागू होने की बात सामने आई है। हालांकि, बैंक चाहें तो इसे इससे पहले भी लागू कर सकते हैं। इसका उद्देश्य आम ग्राहकों को परेशान करना नहीं, बल्कि साइबर फ्रॉड की रकम को बैंकिंग सिस्टम में घुमाने वाले फर्जी खातों पर प्रभावी नियंत्रण करना है।
