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विश्वकर्मा पूजा आज: जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और भगवान विश्वकर्मा की पूजा का महत्व

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पटना : भगवान विश्वकर्मा की पूजा का पर्व आज, 17 सितंबर 2026 को मनाया जाता है। कन्या संक्रांति के अवसर पर मनाए जाने वाले इस पर्व का विशेष महत्व है। इस दिन कारखानों, वर्कशॉप, दुकानों, गैराज, औद्योगिक प्रतिष्ठानों और अन्य कार्यस्थलों पर मशीनों, औजारों, वाहनों और उपकरणों की पूजा की जाती है। बिहार समेत देश के कई राज्यों में विश्वकर्मा पूजा को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है।

धार्मिक मान्यताओं में भगवान विश्वकर्मा को देवताओं का शिल्पकार, वास्तुकार और निर्माण कला का अधिष्ठाता माना गया है। विश्वकर्मा पूजा के दिन लोग अपने कार्यस्थल की साफ-सफाई करते हैं और भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं। इसके साथ ही काम में इस्तेमाल होने वाले औजारों और मशीनों की भी पूजा की जाती है।

विश्वकर्मा पूजा का शुभ मुहूर्त

2026 में भगवान विश्वकर्मा की पूजा 17 सितंबर, गुरुवार यानि आज की जा रही है। पंचांग के अनुसार 17 सितंबर की सुबह 7 बजकर 58 मिनट पर सूर्य कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। इसी कारण इस दिन कन्या संक्रांति के साथ विश्वकर्मा पूजा मनाई जा रही है।

पूजा के लिए अलग-अलग पंचांगों में स्थानीय गणना के आधार पर समय में थोड़ा अंतर बताया गया है। बिहार-पटना क्षेत्र के लिए प्रकाशित पंचांग जानकारी के अनुसार सुबह 5:37 बजे से 7:09 बजे तक शुभ समय, सुबह 10:12 बजे से दोपहर 2:47 बजे तक चर-लाभ-अमृत का समय और सुबह 11:19 बजे से दोपहर 12:08 बजे तक अभिजीत मुहूर्त बताया गया है।

वहीं, एक अन्य पंचांग आधारित गणना में कन्या संक्रांति का समय सुबह 7:58 बजे बताया गया है और पूजा के लिए सुबह 7:58 से 10:43 बजे तथा दोपहर 12:15 से 1:48 बजे तक के समय का उल्लेख है।

राहुकाल में पूजा से बचने की सलाह

17 सितंबर को दोपहर के समय राहुकाल भी रहेगा। प्रकाशित पंचांग गणनाओं में पटना क्षेत्र के लिए राहुकाल लगभग 1:48 बजे से 3:20 बजे तक बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में शुभ कार्य करने से बचने की परंपरा है। इसलिए पूजा के लिए उपलब्ध शुभ मुहूर्त में से किसी एक समय का चयन किया जा सकता है।

मशीनों और औजारों की होती है पूजा

विश्वकर्मा पूजा का सबसे खास पहलू मशीनों और औजारों की पूजा है। इस दिन मैकेनिक, इंजीनियर, कारीगर, तकनीकी कर्मचारी, दुकानदार, कारोबारी और औद्योगिक प्रतिष्ठानों से जुड़े लोग अपने काम में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों को साफ कर उनकी पूजा करते हैं। कई जगहों पर मशीनों और वाहनों को फूल-माला से सजाया जाता है।

पूजा में भगवान विश्वकर्मा को फूल, अक्षत, रोली, चंदन, फल और मिठाई अर्पित की जाती है। इसके बाद आरती और प्रसाद वितरण किया जाता है। कई कारखानों और प्रतिष्ठानों में कर्मचारियों के लिए विशेष आयोजन भी किए जाते हैं।

विश्वकर्मा पूजा केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं है, बल्कि यह मेहनत, तकनीकी कौशल, निर्माण और शिल्प के महत्व को भी दर्शाता है। इस अवसर पर लोग भगवान विश्वकर्मा से अपने काम में सफलता, सुरक्षा और समृद्धि की कामना करते हैं।

बिहार में भी पटना समेत कई शहरों में गैराज, वर्कशॉप, हार्डवेयर प्रतिष्ठानों और अन्य कार्यस्थलों पर विश्वकर्मा पूजा की तैयारियां की गई हैं। श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ भगवान विश्वकर्मा की पूजा-अर्चना कर रहे हैं और अपने कामकाज में सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं।

शुभ मुहूर्त अलग-अलग पंचांगों की स्थानीय गणना के कारण थोड़ा अलग मिल रहा है, इसलिए समाचार में मैंने पटना/बिहार के लिए उपलब्ध पंचांग समय को प्रमुखता दी है।

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