पटना : बिहार में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए अब गांवों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की तैयारी है। गांव में कितने सोलर सिस्टम लगाए गए हैं, इसके आधार पर उसकी रैंकिंग तय की जाएगी। बेहतर प्रदर्शन करने वाले गांवों को सोलर विलेज के रूप में प्रोत्साहित किया जाएगा।
सोलर सिस्टम की संख्या बनेगी रैंकिंग का आधार
प्रस्तावित व्यवस्था में गांव में स्थापित सोलर सिस्टम की संख्या को महत्वपूर्ण आधार माना जाएगा। जिस गांव में अधिक संख्या में घरों और अन्य स्थानों पर सौर ऊर्जा प्रणाली स्थापित होगी, उसकी स्थिति रैंकिंग में बेहतर हो सकती है।
इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ लोगों को स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है।
टॉप सोलर विलेज को मिलेगा इंसेंटिव
सौर ऊर्जा के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करने वाले गांवों को प्रोत्साहन देने की व्यवस्था की जा रही है। शीर्ष स्थान हासिल करने वाले सोलर विलेज को इंसेंटिव दिए जाने का प्रावधान होगा। इससे पंचायतों और ग्रामीण परिवारों को अपने स्तर पर सोलर सिस्टम लगाने के लिए प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
घरों की छतों पर सोलर लगाने पर जोर
केंद्र सरकार की पीएम-सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के तहत भी आवासीय उपभोक्ताओं को रूफटॉप सोलर लगाने के लिए केंद्रीय वित्तीय सहायता दी जाती है। योजना का उद्देश्य घरों में सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ाना और बिजली की लागत को कम करने में मदद करना है।
पंचायतों की भी बढ़ेगी भूमिका
सोलर विलेज की दिशा में पंचायतों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। गांव में अधिक से अधिक घरों तक सौर ऊर्जा पहुंचाने, लोगों को योजना की जानकारी देने और सोलर सिस्टम लगाने के लिए प्रेरित करने से गांव की स्थिति बेहतर हो सकती है।
क्या होगा फायदा?
सोलर सिस्टम की संख्या बढ़ने से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ेगा। साथ ही बिजली पर होने वाला खर्च कम करने, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने और गांवों को ऊर्जा के क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिल सकती है।
यानी आने वाले समय में बिहार के गांवों के बीच सिर्फ विकास के दूसरे पैमानों पर ही नहीं, बल्कि सौर ऊर्जा अपनाने को लेकर भी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है।
