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2015 की चुनावी भिड़ंत से 2026 के MLC चुनाव तक, क्यों बार-बार आमने-सामने आते रहे दोनों नेता?

पटना/मोकामा : बिहार की राजनीति में मोकामा का नाम आते ही अनंत सिंह का जिक्र स्वाभाविक रूप से होता है। लेकिन मोकामा की राजनीति की एक और कहानी है-अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक खींचतान। करीब एक दशक से समय-समय पर सामने आता यह विवाद 2026 में एक बार फिर सुर्खियों में है।

इस बार वजह है पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का विधान परिषद चुनाव। जदयू की ओर से नीरज कुमार चुनावी मैदान में हैं, जबकि मोकामा के जदयू विधायक अनंत सिंह ने सार्वजनिक रूप से उनके समर्थन से इनकार किया है। इतना ही नहीं, अनंत सिंह ने नीरज कुमार को चुनाव में हराने के लिए पूरी ताकत लगाने की बात कही है।

2015 में आमने-सामने आए थे अनंत और नीरज

दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक दूरी की बड़ी वजह 2015 का मोकामा विधानसभा चुनाव माना जाता है। उस चुनाव में जदयू ने अनंत सिंह की जगह नीरज कुमार को उम्मीदवार बनाया था। इसके बाद अनंत सिंह ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा।

नतीजों में अनंत सिंह को 54,005 वोट, जबकि नीरज कुमार को 35,657 वोट मिले थे। अनंत सिंह ने करीब 18,348 वोटों के अंतर से चुनाव जीता था। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता और ज्यादा स्पष्ट हो गई।

2019 में AK-47 मामले ने बढ़ाई राजनीतिक तल्खी

2019 में अनंत सिंह से जुड़े AK-47 मामले ने इस विवाद को एक नया मोड़ दिया। अनंत सिंह ने इस मामले को लेकर नीरज कुमार पर गंभीर आरोप लगाए और दावा किया कि उन्हें फंसाने की साजिश की गई थी।

इन आरोपों को नीरज कुमार ने खारिज किया। 2026 में विवाद दोबारा सामने आने के बाद भी अनंत सिंह ने इसी मामले का जिक्र करते हुए नीरज कुमार को नार्को टेस्ट की चुनौती दी है। हालांकि, ये अनंत सिंह के आरोप हैं, जिन्हें नीरज कुमार ने स्वीकार नहीं किया है।

2026 में MLC चुनाव बना नया सियासी अखाड़ा

अब एक बार फिर दोनों नेता आमने-सामने हैं। इस बार मुकाबला मोकामा विधानसभा सीट का नहीं, बल्कि पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के MLC चुनाव का है।

अनंत सिंह ने साफ कहा है कि वह नीरज कुमार का समर्थन नहीं करेंगे और उनके खिलाफ चुनावी अभियान में अपनी ताकत लगाएंगे। उनका तर्क है कि विधान परिषद का यह चुनाव पार्टी के चुनाव चिह्न पर नहीं होता, इसलिए नीरज का विरोध करना जदयू का विरोध नहीं माना जाना चाहिए।

वहीं नीरज कुमार ने भी अनंत सिंह के आरोपों पर पलटवार किया है। उन्होंने आरोपों के प्रमाण अदालत में पेश करने की बात कही और सार्वजनिक तौर पर कहा कि वे इस तरह की चुनौती से पीछे हटने वाले नहीं हैं।

अनंत सिंह ने डॉ. अनुज कुमार का किया समर्थन

इस विवाद के बीच अनंत सिंह पहले ही डॉ. अनुज कुमार सिंह के समर्थन का ऐलान कर चुके हैं। इससे MLC चुनाव की लड़ाई में एक और राजनीतिक समीकरण जुड़ गया है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अनुज कुमार को जन सुराज से संभावित उम्मीदवार के तौर पर भी देखा जा रहा है। ऐसे में अनंत सिंह का समर्थन इस चुनावी मुकाबले को और चर्चित बना रहा है।

जदयू ने सुलह की कोशिश भी की

दोनों नेताओं के बीच विवाद को देखते हुए जदयू नेतृत्व की ओर से सुलह कराने की कोशिश भी हुई। पार्टी नेताओं ने दोनों पक्षों को साथ बैठाकर विवाद खत्म करने का प्रयास किया, लेकिन इसके बाद भी अनंत सिंह के सार्वजनिक बयानों से साफ है कि मतभेद पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं।

मोकामा की राजनीति से निकलकर पटना तक पहुंची लड़ाई

अनंत सिंह और नीरज कुमार की कहानी सिर्फ दो नेताओं की व्यक्तिगत राजनीतिक खींचतान तक सीमित नहीं है। 2015 में मोकामा विधानसभा चुनाव से शुरू हुआ सीधा राजनीतिक मुकाबला, 2019 के विवाद और अब 2026 के MLC चुनाव तक पहुंच चुका है।

इस बार खास बात यह है कि दोनों एक ही राजनीतिक दल से जुड़े हैं, लेकिन चुनाव को लेकर उनके रुख अलग-अलग हैं। ऐसे में पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव न केवल उम्मीदवारों के बीच मुकाबला है, बल्कि जदयू के भीतर उभरे इस पुराने राजनीतिक मतभेद की भी एक महत्वपूर्ण परीक्षा बन गया है।

आगे क्या?

फिलहाल दोनों नेताओं के बीच बयानबाजी जारी है और चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। अनंत सिंह अपने समर्थित उम्मीदवार के पक्ष में खड़े हैं, जबकि नीरज कुमार जदयू के उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में हैं।

अब देखना यह है कि मोकामा की करीब एक दशक पुरानी सियासी कहानी 2026 के पटना स्नातक MLC चुनाव में किस तरह नया मोड़ लेती है।

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