पटना : बिहार में मिलावटखोरी और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर निगरानी के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से लगातार जांच और सैंपलिंग अभियान चलाए जा रहे हैं। हाल के दिनों में दूध, पनीर, मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थों के नमूने भी लिए गए हैं और कई मामलों में खराब या मिलावटी खाद्य सामग्री को जब्त कर नष्ट किया गया है।
हालांकि, राज्य के सात जिलों में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के बुनियादी संसाधनों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इन जिलों में विभागीय कामकाज के लिए पर्याप्त कार्यालय, मानव संसाधन और फील्ड में इस्तेमाल होने वाले वाहनों की कमी है। इसका सीधा असर नियमित निरीक्षण, खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग और कार्रवाई की क्षमता पर पड़ सकता है।
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों पर बढ़ता दबाव
खाद्य सुरक्षा व्यवस्था में फूड सेफ्टी ऑफिसर की भूमिका अहम होती है। उन्हें खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण करने, नमूने लेने, नियमों के अनुपालन की जांच करने और गड़बड़ी मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होती है।
ऐसे में यदि एक अधिकारी के जिम्मे कई क्षेत्रों की निगरानी हो या फील्ड विजिट के लिए पर्याप्त वाहन उपलब्ध न हों, तो नियमित निरीक्षण प्रभावित होना स्वाभाविक है।
त्योहारों से पहले बढ़ी जिम्मेदारी
त्योहारी सीजन में मिठाई, दूध, पनीर, खोया, तेल और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ जाती है। इसी दौरान मिलावट और खराब गुणवत्ता वाले खाद्य पदार्थों की शिकायतों की आशंका भी बढ़ती है।
बिहार में हालिया जांच अभियान के दौरान अलग-अलग जिलों में खराब और एक्सपायर्ड खाद्य सामग्री जब्त की गई है। खाद्य सुरक्षा टीमों ने कई जगह नमूने लेकर उन्हें प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा है।
मोबाइल फूड टेस्टिंग की भी जरूरत
खाद्य पदार्थों की मौके पर जांच और दूरदराज के इलाकों तक पहुंच बढ़ाने के लिए FSSAI की Food Safety on Wheels व्यवस्था भी महत्वपूर्ण है। FSSAI के अनुसार बिहार में वर्तमान में पांच मोबाइल फूड सेफ्टी वाहन सूचीबद्ध हैं, जिनका इस्तेमाल खाद्य जांच, जागरूकता और फील्ड निगरानी के लिए किया जा सकता है।
संसाधन मजबूत हुए तो निगरानी भी होगी प्रभावी
खाद्य सुरक्षा केवल छापेमारी या सैंपल लेने तक सीमित नहीं है। इसके लिए पर्याप्त अधिकारी, नियमित फील्ड निरीक्षण, परिवहन सुविधा, नमूनों के सुरक्षित रखरखाव और समय पर प्रयोगशाला जांच की पूरी व्यवस्था जरूरी है।
ऐसे में सात जिलों में सामने आई संसाधनों की कमी का समाधान खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। खासकर त्योहारों के दौरान मिलावट पर प्रभावी नियंत्रण के लिए विभागीय ढांचे को पर्याप्त मानव संसाधन और फील्ड सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी होगा।
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत नियमित निगरानी, निरीक्षण और सैंपलिंग की जिम्मेदारी राज्य की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर होती है।







