पटना : बिहार दारोगा भर्ती मुख्य परीक्षा के प्रश्नपत्र और आंसर-की लीक मामले की जांच कर रही आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की विशेष जांच टीम (SIT) ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। जांच के दौरान 26 परीक्षा केंद्रों की पड़ताल में 14 केंद्रों पर कथित गड़बड़ी के संकेत मिलने की बात सामने आई है। इसके बाद SIT ने संबंधित केंद्राधीक्षकों को समन जारी कर पूछताछ शुरू कर दी है। वहीं, कथित कोचिंग सिंडिकेट से जुड़े लोगों की तलाश में पटना, गया और पूर्णिया में छापेमारी की जा रही है।
14 परीक्षा केंद्र जांच के घेरे में
दारोगा भर्ती मुख्य परीक्षा के पेपर लीक मामले में EOU की SIT कई बिंदुओं पर जांच कर रही है। अब तक 26 परीक्षा केंद्रों की जांच की जा चुकी है। इनमें से 14 केंद्रों पर परीक्षा व्यवस्था में गड़बड़ी के संकेत मिलने की जानकारी सामने आई है। SIT इन केंद्रों से जुड़े अधिकारियों और परीक्षा कर्मियों से पूछताछ कर रही है।
जांच टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्रों की सुरक्षा व्यवस्था में कहां चूक हुई और कथित तौर पर प्रश्नपत्र परीक्षा केंद्रों से बाहर कैसे पहुंचा।
WhatsApp से Telegram तक पहुंचा कथित लीक पेपर
जांच के अनुसार, पूर्णिया के राजकीय गर्ल्स हाईस्कूल और गया कॉलेज स्थित परीक्षा केंद्रों से प्रश्नपत्र बाहर निकलने और कथित रूप से लीक करने वाले नेटवर्क तक पहुंचने की आशंका है। बताया जा रहा है कि प्रश्नपत्र WhatsApp के माध्यम से आगे भेजा गया। इसके बाद प्रश्नपत्र और आंसर-की को Telegram के जरिए प्रसारित किए जाने की बात सामने आई है।
जांच में कुछ लोगों द्वारा फोटो और स्क्रीनशॉट के माध्यम से परीक्षा सामग्री सुरक्षित किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। SIT अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
केंद्राधीक्षकों से पूछताछ, सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
14 परीक्षा केंद्रों पर गड़बड़ी के संकेत मिलने के बाद संबंधित केंद्राधीक्षकों को समन जारी किया गया है। उनसे प्रश्नपत्र के रखरखाव, वितरण व्यवस्था, परीक्षा के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल और केंद्र पर तैनात कर्मियों से जुड़े सवाल पूछे जा रहे हैं।
SIT यह जानने का प्रयास कर रही है कि प्रश्नपत्रों की निगरानी में किस स्तर पर चूक हुई और क्या किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध रही है।
पटना, गया और पूर्णिया में छापेमारी
कथित कोचिंग सिंडिकेट से जुड़े लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। इसी सिलसिले में जांच एजेंसी की टीमों ने पटना, गया और पूर्णिया में छापेमारी की है। जांच का फोकस प्रश्नपत्र के कथित लीक से लेकर उसे आगे प्रसारित करने वाले नेटवर्क तक की गतिविधियों पर है।
59 केंद्रों पर आयोजित हुई थी मुख्य परीक्षा
बिहार दारोगा भर्ती मुख्य परीक्षा पटना, गया, पूर्णिया, दरभंगा और भागलपुर के कुल 59 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की गई थी। SIT ने अब तक 26 केंद्रों की जांच की है। इनमें 14 केंद्रों पर गड़बड़ी से जुड़े संकेत मिलने की बात कही जा रही है। हालांकि, इन मामलों में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
720 पेज के डोजियर में 220 सवाल
SIT ने अभ्यर्थियों की ओर से उठाए गए सवालों और जांच से जुड़े विभिन्न बिंदुओं को शामिल करते हुए करीब 720 पेज का डोजियर तैयार किया है। इसमें लगभग 220 सवाल शामिल होने की जानकारी सामने आई है। इन सवालों के जवाब जुटाने के लिए संबंधित अधिकारियों, परीक्षा कर्मियों और अन्य लोगों से पूछताछ की जा रही है।
सॉल्वर समेत कई लोगों की गिरफ्तारी
मामले में नालंदा निवासी कथित सॉल्वर आशुतोष कुमार और पूर्णिया के केहट स्थित राजकीय कन्या उच्च विद्यालय के कमरा नंबर 23 में तैनात वीक्षक मृत्युंजय कुमार समेत कुछ अन्य लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है।
जांच के दौरान आशुतोष कुमार के पास से वॉकी-टॉकी, लैपटॉप और इयरफोन बरामद किए जाने की बात कही गई है। पुलिस और EOU अब गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ के आधार पर कथित नेटवर्क की अन्य कड़ियों की पड़ताल कर रही है।
जांच के अगले चरण पर अभ्यर्थियों की नजर
SIT की जांच आगे बढ़ने के साथ अभ्यर्थियों की निगाहें मामले के निष्कर्ष और संभावित कार्रवाई पर टिकी हैं। जांच से जुड़े अधिकारियों के हवाले से अगले 10 से 12 दिनों में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आने की बात कही जा रही है। हालांकि, जांच पूरी होने और आधिकारिक रिपोर्ट आने तक सभी आरोपों को जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही देखा जाएगा।
अभ्यर्थी प्रतिनिधिमंडल ने EOU अधिकारियों से की मुलाकात
सोमवार को धरने पर बैठे अभ्यर्थियों के प्रतिनिधियों ने EOU के DIG मानवजीत सिंह ढिल्लों और SIT प्रमुख राजेश कुमार से मुलाकात की। प्रतिनिधियों ने पेपर लीक मामले की जांच, परीक्षा की निष्पक्षता और अभ्यर्थियों से जुड़े विभिन्न सवालों को अधिकारियों के सामने रखा।
अब जांच एजेंसी की आगे की कार्रवाई और आधिकारिक रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि कथित पेपर लीक मामले में कौन-कौन लोग शामिल थे और परीक्षा केंद्रों पर हुई गड़बड़ी की वास्तविक वजह क्या रही।
