डेस्क : बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और पेपर लीक का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। पिछले करीब 9 वर्षों में राज्य में 13 परीक्षाएं पेपर लीक या दूसरी अनियमितताओं के कारण विवादों में रही हैं। हाल के महीनों में भी कुछ परीक्षाओं को लेकर सवाल उठे हैं। ऐसे में बड़ा सवाल है कि परीक्षा व्यवस्था को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए बिहार सरकार क्या कदम उठा रही है?
पेपर लीक पर सरकार का सख्त रुख
बिहार सरकार ने प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक जैसे मामलों से निपटने के लिए कानूनी कार्रवाई को सख्त करने की दिशा में कदम उठाया है। जुलाई 2026 में राज्य कैबिनेट ने पेपर लीक के आरोपियों के खिलाफ बिहार क्राइम कंट्रोल एक्ट (CCA) के तहत कार्रवाई का रास्ता साफ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसके तहत दोषियों के खिलाफ अधिक कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य पेपर लीक, संगठित अपराध और साइबर माध्यमों से होने वाली गड़बड़ियों पर अंकुश लगाना है।
परीक्षा सुधार के लिए बनेगी विशेषज्ञ समिति
बिहार सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए पांच सदस्यीय विशेषज्ञ समिति गठित करने का फैसला किया है। इस समिति की अध्यक्षता किसी कार्यरत या सेवानिवृत्त न्यायाधीश के स्तर के व्यक्ति के नेतृत्व में कराने की योजना है।
समिति माध्यमिक विद्यालयों, विश्वविद्यालयों, प्रतियोगी परीक्षाओं और प्रवेश परीक्षाओं की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा करेगी और पेपर लीक सहित दूसरी अनियमितताओं को रोकने के उपाय सुझाएगी। समिति को गठन के बाद तीन महीने में अपनी रिपोर्ट देने का लक्ष्य रखा गया है।
परीक्षा व्यवस्था में तकनीक और AI का इस्तेमाल
राज्य सरकार परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और आधुनिक बनाने के लिए तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल पर भी जोर दे रही है।
सरकार की ओर से गठित परीक्षा सुधार समिति को बोर्ड और प्रतियोगी परीक्षाओं के साथ-साथ कक्षा आधारित मूल्यांकन में तकनीकी और AI आधारित उपायों पर सुझाव देने की जिम्मेदारी दी गई है।
2024 में लागू हुआ था परीक्षा में कदाचार रोकने वाला कानून
बिहार में सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों को रोकने के लिए Bihar Public Examination (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 और इसके नियम लागू हैं। सरकारी परीक्षा से जुड़े निकायों की वेबसाइट पर भी इस कानून और नियमों को सूचीबद्ध किया गया है।
इस कानून का उद्देश्य प्रश्नपत्र लीक, नकल और परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली दूसरी अनुचित गतिविधियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का ढांचा तैयार करना है।
सिर्फ पेपर लीक नहीं, पूरी परीक्षा प्रक्रिया पर नजर
पेपर लीक को रोकने की चुनौती केवल परीक्षा केंद्र तक सीमित नहीं है। प्रश्नपत्र की तैयारी, प्रिंटिंग, पैकिंग, सुरक्षित भंडारण और परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने की प्रक्रिया भी बेहद महत्वपूर्ण है।
इसी वजह से परीक्षा सुधारों में पूरी सिक्योरिटी चेन को मजबूत करने, डिजिटल निगरानी बढ़ाने और संवेदनशील प्रक्रियाओं में तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है।
छात्रों के लिए क्यों जरूरी है परीक्षा सुधार?
प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए पेपर लीक का असर केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं रहता। परीक्षा रद्द होने पर अभ्यर्थियों का समय, पैसा और महीनों की तैयारी प्रभावित होती है।
बिहार में पिछले वर्षों में सामने आए विवादों के बाद अब सरकार के सामने चुनौती यह है कि नए कानून और सुधारों को जमीन पर कितनी प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है। विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट और उसके आधार पर होने वाले बदलावों से आने वाले समय में परीक्षा व्यवस्था में संभावित सुधारों की दिशा स्पष्ट होगी।
