पटना : बिहार में शिक्षा, ऊर्जा और कचरा प्रबंधन को लेकर राज्य सरकार ने कई महत्वपूर्ण लक्ष्यों की जानकारी दी है। गांधी जयंती के अवसर पर पटना के बापू टावर में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि राज्य में इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए महज 10 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। वहीं, पटना के कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन और रिसाइक्लिंग के जरिए करीब 50 करोड़ रुपये की आय का लक्ष्य रखा गया है।
38 इंजीनियरिंग कॉलेजों में 10 रुपये शुल्क
मुख्यमंत्री के अनुसार बिहार के सभी 38 सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में छात्रों से मात्र 10 रुपये का शुल्क लिया जा रहा है। इससे पहले भी मुख्यमंत्री इस शुल्क व्यवस्था का उल्लेख कर चुके हैं। जुलाई 2026 में बिहार इंजीनियरिंग यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में उन्होंने सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में 10 रुपये मासिक ट्यूशन फीस और पॉलिटेक्निक संस्थानों में 5 रुपये शुल्क की बात कही थी।
मुख्यमंत्री ने तकनीकी शिक्षा को युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता से जोड़ने पर भी जोर दिया है। उनका कहना है कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले युवाओं को केवल नौकरी तलाशने के बजाय रोजगार सृजन की दिशा में भी आगे बढ़ना चाहिए।
कचरे से होगी 50 करोड़ रुपये की आय
पटना में कचरा प्रबंधन को लेकर सरकार ने इसे केवल सफाई व्यवस्था तक सीमित रखने के बजाय आर्थिक गतिविधि से जोड़ने का लक्ष्य रखा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वैज्ञानिक तरीके से कचरे के प्रबंधन और रिसाइक्लिंग के जरिए पटना से करीब 50 करोड़ रुपये की सालाना आय का लक्ष्य है।
इस मॉडल के तहत कचरे को वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस करने और उपयोगी संसाधनों में बदलने पर जोर दिया जाएगा। इससे एक ओर शहर की सफाई व्यवस्था को मजबूती देने और दूसरी ओर कचरे से राजस्व अर्जित करने का प्रयास किया जाएगा।
किसानों के खेतों तक पहुंचेगी सौर ऊर्जा
मुख्यमंत्री ने कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा के इस्तेमाल की भी जानकारी दी। सरकार कृषि फीडरों को सोलर ऊर्जा से जोड़ने की दिशा में काम कर रही है। इसके लिए करीब 5,500 करोड़ रुपये के सरकारी अनुदान का उल्लेख किया गया है।
सरकार का लक्ष्य कृषि क्षेत्र को अधिक निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने के साथ ऊर्जा क्षेत्र में सरकारी खर्च को कम करने की दिशा में काम करना है।
ग्रीन हाइड्रोजन पॉलिसी पर भी जोर
बिहार में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए ग्रीन हाइड्रोजन पॉलिसी बनाए जाने की जानकारी भी मुख्यमंत्री ने दी। इसका उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देना, निवेश आकर्षित करना और कार्बन उत्सर्जन को कम करने वाली औद्योगिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करना है।
700 मॉडल स्कूलों में 3.5 लाख विद्यार्थी
शिक्षा के क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में करीब 700 मॉडल स्कूलों में लगभग 3.5 लाख विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ाई में सहायता देने के लिए ‘विद्यार्थी साथी’ ऐप के माध्यम से 24×7 ऑनलाइन ट्यूटर की सुविधा उपलब्ध कराने की बात भी कही गई।
बिहार में शिक्षा और विकास को लेकर सरकार के प्रमुख लक्ष्य
- सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में 10 रुपये शुल्क
- पटना के कचरे से करीब 50 करोड़ रुपये की आय का लक्ष्य
- कृषि फीडरों को सौर ऊर्जा से जोड़ने की योजना
- सोलराइजेशन के लिए 5,500 करोड़ रुपये के अनुदान का उल्लेख
- ग्रीन हाइड्रोजन पॉलिसी पर काम
- 700 मॉडल स्कूलों में करीब 3.5 लाख विद्यार्थी
बिहार सरकार की इन योजनाओं का फोकस शिक्षा को कम लागत में उपलब्ध कराने, कचरे को संसाधन में बदलने और स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ाने पर है। इन योजनाओं के वास्तविक आर्थिक और सामाजिक प्रभाव का आकलन इनके क्रियान्वयन और परिणाम सामने आने के बाद किया जा सकेगा।







