Homeराज्यविक्रमशिला सेतु बंद होने से गंगा में जहाजों के सफर में बढ़ी...

विक्रमशिला सेतु बंद होने से गंगा में जहाजों के सफर में बढ़ी परेशानी, कमिश्नर, आईजी और डीएम ने औचक निरीक्षण किया

भागलपुर : विक्रमशिला सेतु के मरम्मत कार्य के लिए बंद किए जाने के बाद भागलपुर-नवगछिया के बीच वैकल्पिक फेरी सेवा तो शुरू कर दी गई है, लेकिन यात्रियों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। उफनती गंगा नदी और जहाजों के ऊंचे रैम्प के कारण यात्रियों, विशेषकर महिलाओं और बुजुर्गों के गिरने व घायल होने की लगातार शिकायतें आ रही हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रमंडलीय आयुक्त, आईजी और जिलाधिकारी ने रविवार को संयुक्त रूप से बियाडा और बरारी घाटों का औचक निरीक्षण किया। अधिकारियों ने मौके पर स्थिति का जायजा लेते हुए रैम्प की ऊंचाई तुरंत कम करने और निर्धारित समय-सारणी के अनुसार जहाजों का परिचालन सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए हैं।

कमिश्नर ने कहा कि विक्रमशिला सेतु बंद होने के कारण यह फेरी सेवा आम जनता की सुविधा के लिए शुरू की गई है, न कि उन्हें संकट में डालने के लिए। जहाजों के रैम्प काफी ऊंचे हैं, जिससे यात्रियों को चढ़ने-उतरने में भारी कठिनाई हो रही है और गिरने की शिकायतें मिली हैं। मैंने संबंधित अधिकारियों और शिपिंग ऑपरेटरों को तत्काल रैम्प की ऊंचाई कम करने और घाटों पर पर्याप्त मिट्टी और बालू की बोरियां भरकर सुरक्षित पाथ-वे बनाने का निर्देश दिया है। यात्रियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

डीएम ने कहा कि गंगा का जलस्तर बढ़ा हुआ है, इसलिए हमने सुरक्षा के दृष्टिकोण से जहाजों के परिचालन का समय सुबह 6:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक ही तय किया है। कुछ जहाजों के देरी से चलने और निर्धारित समय का पालन न करने की शिकायत मिली है, जिसपर सख्ती से रोक लगाई जाएगी। सभी जहाजों को समय पर खुलना होगा। अगले दो दिनों तक सुरक्षा के मद्देनजर क्रूज पर मोटरसाइकिल और भारी वाहनों को ले जाने पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। घाटों पर रोशनी और मेडिकल कैंप की व्यवस्था मुकम्मल कर दी गई है।

उल्लेखनीय है कि विक्रमशिला पुल बंद होने के बाद गंगा पार करने का एकमात्र जरिया बचे जहाजों और स्टीमरों की फेरी सेवा पहले ही दिन से लड़खड़ा गई है। प्रशासनिक दावे के विपरीत 45 मिनट का सफर पूरा करने में जहाजों को दो घंटे से अधिक का समय लग रहा है। बियाडा घाट के समीप पानी कम होने और सिल्ट जमा होने के कारण जहाजों को किनारे से हटाने और धक्का देने के लिए भारी पोकलेन मशीनों की मदद ली जा रही है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जब तक रैम्प की ऊंचाई कम कर यात्रियों के लिए इसे सुगम नहीं बनाया जाता और परिचालन समयबद्ध नहीं होता, तब तक अधिकारी रोजाना स्थिति की मॉनिटरिंग करेंगे ताकि आम जनता को इस संकट काल में कम से कम परेशानी का सामना करना पड़े।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments