पटना : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने एक बार फिर चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि बिहार में 2025 का विधानसभा चुनाव पारदर्शी तरीके से नहीं कराया गया और इसमें कथित तौर पर फर्जीवाड़ा हुआ। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया को लेकर बड़े षड्यंत्र का भी दावा किया।
तेजस्वी यादव इससे पहले भी चुनाव आयोग की ओर से किए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मतदाता सूची को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। सितंबर 2026 में उन्होंने आरोप लगाया था कि बिहार और पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रक्रिया में बेईमानी और कथित फर्जी तरीकों का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने बिहार में दोबारा चुनाव कराने की मांग भी रखी थी।
तेजस्वी का कहना है कि चुनाव से पहले मतदाता सूची में बदलाव और SIR की प्रक्रिया को लेकर विपक्ष ने लगातार आशंकाएं जताई थीं। उनका आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया से जुड़े नियमों में बदलाव और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर भी कई सवाल खड़े हुए हैं।
चुनाव आयोग पर लगातार हमलावर रहे हैं तेजस्वी
2025 में भी तेजस्वी यादव ने SIR को लेकर चुनाव आयोग पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। अगस्त 2025 में उन्होंने चुनाव आयोग पर कथित तौर पर ‘वोट की डकैती’ का आरोप लगाया था और कहा था कि मतदाता सूची तथा चुनाव प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की चिंताओं का जवाब दिया जाना चाहिए।
वहीं, अगस्त 2025 में तेजस्वी यादव द्वारा एक वोटर आईडी कार्ड को लेकर किए गए दावे पर चुनाव अधिकारियों ने आपत्ति जताई थी। निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी के अनुसार, उनके द्वारा प्रदर्शित EPIC नंबर चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में नहीं मिला, जबकि उनका नाम एक अलग वैध EPIC नंबर के साथ मतदाता सूची में दर्ज था।
क्या है तेजस्वी का दावा?
तेजस्वी यादव का आरोप है कि 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया में गड़बड़ियां हुईं और मतदाता सूची से लेकर मतदान तथा मतगणना तक कई स्तरों पर सवाल उठते हैं। हालांकि, इन आरोपों को तेजस्वी यादव के राजनीतिक दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए। उपलब्ध रिपोर्टों में इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
ऐसे में 2025 के बिहार चुनाव को लेकर तेजस्वी यादव के आरोपों और चुनाव आयोग के आधिकारिक रिकॉर्ड/जवाब को अलग-अलग देखना महत्वपूर्ण है।
