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UPI पर शुल्क की अफवाह से पटना में QR कोड हटाने की चर्चा, जानिए क्या है पूरा मामला

डेस्क : पटना समेत बिहार के कई हिस्सों में दुकानों पर लगे UPI QR कोड को हटाने या ढकने की चर्चा तेज हो गई है। इसकी वजह UPI भुगतान पर शुल्क लगाए जाने को लेकर व्यापारियों के बीच बनी आशंका है। हालांकि, सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप पर चल रही कई बातों के विपरीत UPI से भुगतान करने वाले आम ग्राहकों पर कोई सामान्य ट्रांजैक्शन शुल्क नहीं लगाया गया है।

केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि Person-to-Person (P2P) UPI भुगतान पूरी तरह मुफ्त रहेगा। वहीं, ₹2,000 तक के मर्चेंट भुगतान और जीरो-MDR व्यवस्था के तहत आने वाले छोटे कारोबारियों के भुगतान भी शुल्क से बाहर रहेंगे। सरकार के अनुसार करीब 96 प्रतिशत मर्चेंट UPI लेनदेन प्रभावित नहीं होंगे।

फिर पटना में दुकानदार QR कोड क्यों हटा रहे हैं?

दरअसल, विवाद की जड़ Merchant Discount Rate यानी MDR है। नए ढांचे के तहत कुछ पात्र मर्चेंट UPI लेनदेन पर ₹2,000 से अधिक की राशि होने पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होना है। यह शुल्क ग्राहक के खाते से नहीं काटा जाना है, बल्कि भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारी की ओर से भुगतान प्रणाली में वहन किया जाना है।

इसी बदलाव को लेकर कई व्यापारिक संगठनों और दुकानदारों में चिंता है। उनका कहना है कि कम मार्जिन वाले कारोबार में डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त लागत से उनकी कमाई प्रभावित हो सकती है। पटना में भी व्यापारियों के बीच इस मुद्दे पर चर्चा हुई है और कुछ दुकानदार बड़े भुगतान के लिए नकद को प्राथमिकता देने की बात कर रहे हैं।

क्या UPI बंद हो रहा है?

नहीं। UPI सेवा बंद नहीं हो रही है और न ही सभी QR कोड निष्क्रिय किए जा रहे हैं।

कुछ व्यापारी संगठन विरोध के तौर पर QR कोड हटाने या ढकने का निर्णय ले सकते हैं। हाल में बिहार के अन्य हिस्सों में भी कुछ व्यापारियों द्वारा UPI के विरोध में ऐसे कदम उठाने की खबरें सामने आई हैं।

इसका मतलब यह है कि अगर कोई दुकानदार अपना QR कोड हटा देता है, तो उस दुकान पर UPI से भुगतान करना संभव नहीं होगा, लेकिन इससे पूरे देश में UPI सेवा बंद नहीं होती।

ग्राहकों को कितना पैसा देना होगा?

ग्राहकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सिर्फ UPI से भुगतान करने के कारण बिल के ऊपर अलग से शुल्क नहीं जोड़ा जाना चाहिए।

उदाहरण के लिए, यदि किसी दुकान का बिल ₹5,000 है और ग्राहक UPI से भुगतान करता है, तो ग्राहक से ₹5,000 ही लिया जाना है। संबंधित MDR व्यापारी-पक्ष के भुगतान ढांचे से जुड़ा है। सरकार ने यह भी कहा है कि व्यापारियों द्वारा इस लागत को ग्राहकों पर डालने से रोकने के लिए निगरानी की जाएगी।

छोटे दुकानदारों को राहत

छोटे कारोबारियों के लिए भी प्रावधान रखा गया है। सरकार के अनुसार, UPI QR के जरिए ₹1 लाख तक मासिक प्राप्ति करने वाले छोटे मर्चेंट जीरो-MDR व्यवस्था के तहत बने रहेंगे। इससे स्थानीय दुकानदारों और छोटे विक्रेताओं पर नए शुल्क का असर सीमित रखने का दावा किया गया है।

पटना में क्या असर पड़ सकता है?

पटना में UPI रोजमर्रा की खरीदारी का अहम माध्यम बन चुका है। चाय-नाश्ते की दुकान से लेकर किराना, मेडिकल स्टोर, कपड़े और इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकानों तक QR कोड आम हैं।

ऐसे में यदि कुछ दुकानदार बड़े भुगतान के लिए QR कोड हटाते हैं या केवल नकद भुगतान स्वीकार करते हैं, तो ग्राहकों को असुविधा हो सकती है। खासकर महंगे सामान की खरीदारी करने वाले ग्राहकों को पहले यह पूछना पड़ सकता है कि दुकान पर UPI स्वीकार किया जा रहा है या नहीं।

अफवाह और सच्चाई

अफवाह: UPI इस्तेमाल करने पर हर ग्राहक से शुल्क लिया जाएगा।
सच्चाई: आम P2P UPI भुगतान मुफ्त रहेगा और कई मर्चेंट भुगतान भी शुल्क से बाहर हैं।

अफवाह: 15 अक्टूबर से पूरे देश में UPI QR काम करना बंद कर देंगे।
सच्चाई: ऐसा नहीं है। केवल संबंधित व्यापारी लेनदेन पर लागू नियम बदल रहे हैं; UPI सिस्टम बंद नहीं हो रहा।

अफवाह: ग्राहक को हर UPI भुगतान पर अतिरिक्त 0.4% देना होगा।
सच्चाई: 0.4% MDR कुछ पात्र मर्चेंट लेनदेन पर लागू है और इसे ग्राहक से सीधे वसूलने की अनुमति नहीं है।

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