मुजफ्फरपुर : पारू प्रखंड में प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र के लिए करीब 700 एकड़ जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। सोमवार से रैयतों और जमीन मालिकों से दावा-आपत्ति लेने का काम शुरू कर दिया गया है। इस परियोजना के दायरे में कुल पांच मौजा की जमीन आएगी। औद्योगिक क्षेत्र विकसित होने के बाद पारू और आसपास के इलाकों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
सप्ताह में तीन दिन दर्ज होगी दावा-आपत्ति
जिला भू-अर्जन कार्यालय की ओर से रैयतों और जमीन मालिकों की सुविधा के लिए दावा-आपत्ति दर्ज कराने के लिए सप्ताह में तीन दिन निर्धारित किए गए हैं। संबंधित रैयत शनिवार, सोमवार और बुधवार को जिला भू-अर्जन कार्यालय पहुंचकर अपनी आपत्ति या दावा दर्ज करा सकते हैं।
प्रशासन के अनुसार भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी की जाएगी। वास्तविक रैयतों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसका भी ध्यान रखा जाएगा। जमीन से जुड़े दस्तावेजों और दावों की जांच के बाद ही आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
दावा-आपत्ति के निबटारे के बाद मिलेगा मुआवजा
भूमि अधिग्रहण में शामिल जमीन मालिकों को मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया दावा-आपत्ति के निबटारे के बाद आगे बढ़ेगी। प्रशासन की ओर से कहा गया है कि रैयतों से प्राप्त सभी दावों और आपत्तियों का नियमानुसार निष्पादन किया जाएगा।
प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र के भूमि अधिग्रहण और विकास कार्य पर करीब 250 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का प्रावधान बताया गया है। परियोजना पूरी होने के बाद यहां उद्योगों के लिए आवश्यक आधारभूत संरचना विकसित होने की उम्मीद है।
कृषि आधारित उद्योगों की बढ़ेंगी संभावनाएं
पारू और आसपास का इलाका कृषि प्रधान है। क्षेत्र में लीची, मक्का समेत कई प्रकार की फसलों का उत्पादन होता है। ऐसे में औद्योगिक क्षेत्र विकसित होने के बाद कृषि आधारित उद्योगों के लिए भी संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
फूड प्रोसेसिंग यूनिट, कोल्ड स्टोरेज, कोल्ड चेन लॉजिस्टिक्स और पैकेजिंग से जुड़े उद्योग स्थानीय कृषि उपज के प्रसंस्करण और बाजार तक पहुंचाने में मददगार साबित हो सकते हैं। इससे किसानों को स्थानीय स्तर पर भंडारण और प्रसंस्करण की सुविधा मिलने की उम्मीद है।
छोटे और मध्यम उद्योगों को भी मिलेगा बढ़ावा
प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र में उपभोक्ता सामान, पैकेजिंग सामग्री, प्लास्टिक उत्पाद और घरेलू उपयोग की वस्तुओं से जुड़े छोटे एवं मध्यम उद्योगों के लिए भी जगह बन सकती है। इसके अलावा असेंबली, मैन्युफैक्चरिंग, वेयरहाउसिंग और ट्रांसपोर्ट से जुड़े कारोबार के विकसित होने की संभावना है।
हालांकि, क्षेत्र में कौन-कौन से उद्योग स्थापित होंगे, यह परियोजना के विकास और भविष्य में होने वाले औद्योगिक आवंटन पर निर्भर करेगा। फिलहाल प्रशासन का मुख्य फोकस भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और रैयतों की दावा-आपत्तियों का नियमानुसार निबटारा करने पर है।







