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BRABU में PhD नामांकन पर बड़ा अपडेट, 272 सीटों के लिए आए सिर्फ 473 आवेदन; कई विषयों में सीटें खाली रहने के आसार

मुजफ्फरपुर : बीआरए बिहार विश्वविद्यालय में पीएचडी प्रवेश परीक्षा यानी PAT पर राजभवन की रोक के बाद राष्ट्रीय स्तर की पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण अभ्यर्थियों से पीएचडी नामांकन के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे गए थे। PAT 2025 और PAT 2026 के लिए आवेदन पोर्टल 3 अक्टूबर तक खुला रहा। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद सामने आए आंकड़ों से कई विषयों में सीटें खाली रहने की संभावना दिखाई दे रही है।

विश्वविद्यालय की ओर से दोनों सत्रों के लिए 18 विषयों में कुल 272 सीटें अधिसूचित की गई थीं। इसके मुकाबले कुल 473 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है। यानी औसतन एक सीट के लिए करीब 1.7 आवेदन आए हैं। हालांकि विषयवार स्थिति में काफी अंतर है। कुछ विषयों में सीटों की तुलना में आवेदन कई गुना अधिक हैं, जबकि कई विषयों में सीटों के मुकाबले आवेदन बेहद कम हैं।

केमिस्ट्री में 10 सीटों के लिए सिर्फ तीन आवेदन आए हैं। गणित में 30 सीटों पर सात, मनोविज्ञान में 20 सीटों पर सात और दर्शनशास्त्र में 15 सीटों के लिए सात अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है। संस्कृत में 12 सीटों के मुकाबले महज दो आवेदन आए हैं। पर्सियन की पांच सीटों के लिए एक भी योग्य दावेदार नहीं मिला।

PAT 2025 के आंकड़ों में भी कुछ विषयों की स्थिति कमजोर रही। केमिस्ट्री, इलेक्ट्रॉनिक्स और पर्सियन में 2025 सत्र के लिए एक भी आवेदन नहीं आया। दूसरी ओर इतिहास विषय में सबसे ज्यादा 122 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इसमें 2025 के लिए 30 और 2026 के लिए 92 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है। इतिहास में कुल 18 सीटें हैं।

हिंदी में 60 सीटों के मुकाबले 96 आवेदन आए हैं। अंग्रेजी में 45 सीटों के लिए 64, जबकि पॉलिटिकल साइंस में आठ सीटों के मुकाबले 44 आवेदन हुए हैं। कॉमर्स में तीन सीटों पर 28, इकोनॉमिक्स में आठ सीटों पर 23 और उर्दू में 10 सीटों के लिए 14 आवेदन प्राप्त हुए हैं।

इसके अलावा फिजिक्स में पांच सीटों पर 11, होम साइंस में 16 सीटों पर 20, जियोग्राफी में दो सीटों पर 10 और बॉटनी में तीन सीटों पर चार आवेदन आए हैं।

वहीं जूलॉजी, सोशियोलॉजी, बांग्ला और मैथिली में इस बार सीटें अधिसूचित नहीं की गई हैं। ऐसे में इन विषयों में पीएचडी नामांकन प्रक्रिया नहीं होगी। आवेदन के आंकड़ों से साफ है कि कुछ विषयों में अभ्यर्थियों के बीच प्रतिस्पर्धा अधिक रहेगी, जबकि कई विषयों में उपलब्ध सीटों के मुकाबले आवेदन कम होने के कारण सीटें खाली रहने की संभावना है।

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