पटना : राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) में एक बार फिर अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आती दिख रही है। पार्टी के तीन विधायकों-माधव आनंद, रामेश्वर महतो और आलोक सिंह-के अलग रुख ने सियासी हलकों में बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर RLM किसके फैसले से चलेगी-पार्टी अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के या तीनों विधायकों के?
मामला MLC चुनाव से जुड़ा है। तीनों विधायकों ने पार्टी नेतृत्व से अलग रुख अपनाते हुए RLM नेता रामपुकार सिन्हा के समर्थन में खड़े होने का फैसला किया है। इसके बाद पार्टी के भीतर मतभेद की चर्चा तेज हो गई है।
माधव आनंद बोले- पार्टी बचाने के लिए कुर्बानी देंगे
RLM विधायक माधव आनंद ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि अगर पार्टी को बचाने के लिए कुर्बानी देनी पड़ेगी, तो वह इसके लिए तैयार हैं। उनका कहना है कि जनता की मांग है कि RLM का अस्तित्व बना रहे और पार्टी मजबूत हो।
माधव आनंद ने यह भी संकेत दिया कि 2029 में BJP के साथ गठबंधन के लिए भी RLM का मजबूत और अस्तित्व में रहना जरूरी है। उनके इस बयान को पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बढ़ती असहमति के तौर पर देखा जा रहा है।
कुशवाहा बोले- पार्टी में कोई बगावत नहीं
दूसरी ओर, उपेंद्र कुशवाहा लगातार पार्टी में किसी भी तरह की बगावत से इनकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि RLM में कोई विधायक बागी नहीं हुआ है और पार्टी NDA उम्मीदवारों के साथ मजबूती से खड़ी है।
ऐसे में सवाल यही है कि क्या RLM में यह सिर्फ रणनीतिक मतभेद है या पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर बड़ी लड़ाई की शुरुआत? MLC चुनाव को लेकर तीन विधायकों का अलग रुख और कुशवाहा का बगावत से इनकार आने वाले दिनों में RLM की सियासत की दिशा तय कर सकता है।







