पटना : बिहार के गांवों में सरकारी सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए पंचायत स्तर पर बने ‘मिनी सचिवालय’ को अधिक सक्रिय किया जा रहा है। अब इन कार्यालयों में संबंधित कर्मचारी नियमित रूप से मौजूद रहेंगे, ताकि ग्रामीणों को छोटे-छोटे सरकारी कामों के लिए प्रखंड या जिला मुख्यालय का चक्कर नहीं लगाना पड़े।
नई व्यवस्था के तहत कर्मचारियों की उपस्थिति पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। इसके लिए बायोमीट्रिक अटेंडेंस सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे यह पता चल सकेगा कि कर्मचारी निर्धारित समय पर कार्यालय पहुंच रहे हैं या नहीं।
कर्मचारियों की मनमानी पर लगेगी रोक
पंचायत स्तर पर कर्मचारियों की अनियमित उपस्थिति लंबे समय से ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण रही है। कई बार लोगों को प्रमाण पत्र, सरकारी योजनाओं से जुड़े काम या अन्य प्रशासनिक सेवाओं के लिए पंचायत कार्यालय में कर्मचारी नहीं मिलते थे। नई व्यवस्था से इस समस्या को दूर करने की कोशिश की जा रही है।
बायोमीट्रिक व्यवस्था लागू होने के बाद कर्मचारियों की उपस्थिति का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा। इससे अधिकारियों को भी कर्मचारियों की उपस्थिति की निगरानी करने में आसानी होगी।
गांव में ही मिलेंगी सरकारी सेवाएं
‘मिनी सचिवालय’ की अवधारणा का उद्देश्य पंचायत स्तर पर ही अधिक से अधिक सरकारी सेवाओं को उपलब्ध कराना है। इससे ग्रामीणों का समय और पैसा दोनों बचेंगे। साथ ही सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और आम लोगों की शिकायतों के समाधान में भी तेजी आने की उम्मीद है।
प्रशासन की ओर से कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है। लापरवाही या लगातार अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई की संभावना भी जताई जा रही है।
डिजिटल निगरानी से बढ़ेगी जवाबदेही
बायोमीट्रिक उपस्थिति के साथ पंचायत स्तर पर कर्मचारियों की जवाबदेही बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। इसका सीधा फायदा ग्रामीणों को मिलने की उम्मीद है। अगर व्यवस्था प्रभावी तरीके से लागू होती है तो गांव के लोगों को रोजमर्रा के कई सरकारी कार्यों के लिए प्रखंड मुख्यालय जाने की जरूरत कम हो सकती है।
सरकार की इस पहल का मकसद पंचायतों को सिर्फ योजनाओं के क्रियान्वयन का केंद्र बनाने के बजाय गांव का स्थानीय प्रशासनिक केंद्र बनाना है।
