Desk: बिहार के वैशाली में में पहली बार अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन का आयोजन आगामी 11 से 13 दिसम्बर 2026 को किया जा रहा है। तीन दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में देश-विदेश से बड़ी संख्या में बौद्ध धर्मावलंबी, विद्वान, प्रतिनिधि और पर्यटक शामिल होंगे। सम्मेलन के जरिए बिहार की समृद्ध बौद्ध विरासत को वैश्विक स्तर पर सामने लाने की कोशिश की जाएगी।
बिहार बौद्ध धर्म के इतिहास और विरासत के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण रहा है। भगवान बुद्ध के जीवन से जुड़े कई प्रमुख स्थल राज्य में मौजूद हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय स्तर के इस सम्मेलन के आयोजन को बिहार के पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
सम्मेलन के दौरान बौद्ध धर्म, दर्शन, संस्कृति, इतिहास और बिहार की बौद्ध विरासत से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ-साथ विदेशों से भी विशेषज्ञ और प्रतिनिधि इसमें हिस्सा लेंगे।
बड़ी संख्या में विदेशी मेहमानों के आने की उम्मीद
तीन दिवसीय सम्मेलन में कई देशों से प्रतिनिधियों के पहुंचने की उम्मीद है। इससे बिहार के प्रमुख बौद्ध पर्यटन स्थलों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार मिलने के साथ-साथ राज्य में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सकता है।
आयोजन के जरिए बिहार की ऐतिहासिक धरोहर, बौद्ध स्थलों और स्थानीय संस्कृति को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। माना जा रहा है कि सम्मेलन के बाद बिहार आने वाले बौद्ध पर्यटकों की संख्या में भी इजाफा हो सकता है।
बिहार की बौद्ध विरासत को मिलेगा वैश्विक मंच
बिहार में बोधगया, राजगीर, नालंदा और वैशाली जैसे महत्वपूर्ण बौद्ध एवं ऐतिहासिक स्थल हैं। अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन इन स्थलों की पहचान को वैश्विक मंच पर और मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
तीन दिनों तक चलने वाले इस आयोजन को लेकर तैयारियां तेज होने की उम्मीद है। देश-विदेश से आने वाले मेहमानों के कारण सम्मेलन के दौरान बिहार में पर्यटन गतिविधियों को भी गति मिल सकती है।







