पटना : रविवार यानी आज से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है। नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की जाएगी। इस पर्व को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिल रहा है। अगले नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाएगी। नवरात्रि के पहले दिन घरों और मंदिरों में कलश स्थापना के साथ पूजा की शुरुआत हो गई है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एक वर्ष में चार बार नवरात्रि मनाई जाती है। इनमें चैत्र और आश्विन महीने की नवरात्रि प्रमुख होती हैं, जबकि पौष और आषाढ़ महीने में गुप्त नवरात्रि मनाई जाती है। आश्विन महीने में शरद ऋतु की शुरुआत होने के कारण इसे शारदीय नवरात्रि कहा जाता है। इस वर्ष शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू होकर 19 अक्टूबर तक चलेगी। वहीं, 20 अक्टूबर को विजयादशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा।
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना यानी कलश स्थापना का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलश स्थापना के साथ ही नवरात्रि की पूजा विधिवत शुरू होती है। इसके लिए घर के पूजा स्थल को साफ करके विधि-विधान से कलश स्थापित किया जाता है। ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा को पूजा-पाठ के लिए शुभ माना जाता है।
कलश स्थापना के शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:
– घटस्थापना मुहूर्त: सुबह 6:31 बजे से 10:27 बजे तक।
– अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:01 बजे से 12:49 बजे तक।
नवरात्रि के पहले दिन जौ बोने की भी परंपरा है। मान्यता के अनुसार, जौ की वृद्धि को समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है।
मां शैलपुत्री की पूजा का विशेष महत्व
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की उपासना की जाती है। मां शैलपुत्री को शक्ति, सौभाग्य और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उनकी पूजा करने से भक्तों को सुख-समृद्धि, आरोग्य और सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
मां शैलपुत्री की पूजा के दौरान श्रद्धालु फूल, फल, अक्षत, धूप और दीप अर्पित करते हैं। इस दिन मां के मंत्र का जाप करना भी शुभ माना जाता है।
मां शैलपुत्री का मंत्र है- “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्र्यै नमः।”
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विवाह में बाधाओं का सामना कर रहे श्रद्धालु भी मां शैलपुत्री की आराधना करते हैं और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करते हैं।
दुर्गा सप्तशती के पाठ का महत्व
नवरात्रि के नौ दिनों में दुर्गा सप्तशती का पाठ करना भी विशेष फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि मां दुर्गा की आराधना और दुर्गा सप्तशती के पाठ से भक्तों को मानसिक शांति, साहस और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
नवरात्रि का पर्व शक्ति, भक्ति और आस्था का प्रतीक है। इन नौ दिनों में श्रद्धालु व्रत रखते हैं, पूजा-अर्चना करते हैं और मां दुर्गा से परिवार की सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना करते हैं।







