Home राज्य गंगा की तेज लहरों में समाए आशियाने, खरीक के छोटी अलालपुर में...

गंगा की तेज लहरों में समाए आशियाने, खरीक के छोटी अलालपुर में हाहाकार

0

भागलपुर : जिले के खरीक प्रखंड अंतर्गत राघोपुर पंचायत के छोटी अलालपुर गांव में गंगा नदी के भीषण कटाव ने तबाही मचा दी है। गंगा की तेज धारा और लगातार हो रहे भू-कटाव के कारण इलाके में हाहाकार की स्थिति बन गई है। देखते ही देखते गंगा नदी कई आशियानों को अपने आगोश में ले चुकी है, जिससे दर्जनों परिवार बेघर हो गए हैं। स्थिति इतनी भयावह हो गई है कि ग्रामीणों में अपनी जान और बची-खुची संपत्ति बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने की अफरा-तफरी मची हुई है।

कटाव की गंभीरता को देखते हुए भागलपुर की जिलाधिकारी अलंकृता पांडेय ने नवगछिया एसपी वैभव शर्मा, एसडीपीओ सैयम रजा और जल संसाधन विभाग के अभियंताओं की टीम के साथ शनिवार को खुद राघोपुर और छोटी अलालपुर कटाव स्थल का दौरा कर जायजा लिया। डीएम ने देर रात तक प्रभावित महादेवपुर घाट, ब्रह्मबाबा स्थान और रेलवे बांध के पास चल रहे कटाव निरोधी कार्यों की गहन समीक्षा की।

इस दौरान उन्होंने नदी में हो रही अंडरमाइनिंग की जांच करने और फ्लड फाइटिंग सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए। इस दौरान डीएम ने कहा कि प्रभावित क्षेत्र के एक-एक नागरिक की सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता है। जल संसाधन विभाग और स्थानीय प्रशासन को आपसी समन्वय के साथ चौबीसों घंटे युद्ध स्तर पर कटाव निरोधी कार्य चलाने का निर्देश दिया गया है। विस्थापित परिवारों के लिए राहत शिविर और कम्युनिटी किचन शुरू कर दिए गए हैं, जहां शुद्ध भोजन, स्वास्थ्य सुविधाएं, बच्चों के लिए दूध और पशुओं के लिए चारे की मुकम्मल व्यवस्था की जा रही है। कटाव और सुरक्षात्मक उपायों की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है, आपदा प्रबंधन में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।

स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, छोटी अलालपुर गांव में गंगा का रुख पिछले कुछ दिनों से बेहद आक्रामक बना हुआ है। राघोपुर रेल बांध का एक बड़ा हिस्सा नदी में विलीन हो चुका है। नदी की तेज लहरें जमीन को नीचे से खोखला कर रही हैं, जिसके कारण पक्के और कच्चे मकान ताश के पत्तों की तरह भरभराकर नदी में समा रहे हैं। कई लोग अपनी आंखों के सामने अपने जीवन भर की कमाई को पानी में बहते देखने को मजबूर हैं। बाढ़ और कटाव के इस दोहरे दंश के बीच पलालपुर, शंकरपुर और ननकार जैसे गांवों के पीड़ित परिवार सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने को विवश हैं।

लोग अपने मवेशियों और अनाज के साथ ऊंचे स्थानों या मुख्य सड़कों पर शरण ले रहे हैं। हालांकि प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में लाउडस्पीकर से लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी जारी कर दी है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि कटाव की रफ्तार इतनी तेज है कि उन्हें संभलने का मौका भी नहीं मिल रहा है।

बेघर हुई महिलाओं को इस आपदा के बीच अपने घरों को खोने के साथ-साथ जीविका समूहों से लिए गए कर्ज को चुकाने की दोहरी चिंता भी सताने लगी है। रेलवे तटबंध टूटने के बाद अब जाह्नवी चौक से बिहपुर को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण 14 नंबर सड़क पर भी खतरा मंडराने लगा है। हालांकि अभियंताओं के अनुसार वर्तमान में कटाव की स्थिति थोड़ी स्थिर है, लेकिन सुरक्षा को देखते हुए एनएच-31 को जोड़ने वाली इस लाइफलाइन सड़क को बचाने के लिए जियो बैग और अन्य फ्लड फाइटिंग तकनीकों का इस्तेमाल तेजी से किया जा रहा है।

लोगों ने जिला प्रशासन से बेघर परिवारों के स्थाई पुनर्वास और मुआवजे की प्रक्रिया जल्द शुरू करने की मांग की है।

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Check Also
राज्य

EPFO New Rules 2026: PF निकालने वालों के लिए बड़ा बदलाव, Form 15G और 15H की जगह अब भरना होगा Form 121

Exit mobile version