गया जी: नवरात्रि के मौके पर मां दुर्गा की प्रतिमाओं को आकर्षक और अनोखे रूप में सजाने की परंपरा देखने को मिलती है। इसी कड़ी में बिहार के गया जी में एक मूर्तिकार अपने अनूठे प्रयोग को लेकर चर्चा में हैं। बागेश्वरी मोहल्ले के रहने वाले मूर्तिकार विक्की बिंदू इस बार करीब 50 हजार पेंसिल, इरेजर और पेंसिल की छीलन से मां दुर्गा की प्रतिमा तैयार कर रहे हैं। खास बात यह है कि इस प्रतिमा के निर्माण में मिट्टी का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। इसके अलावा वह चूड़ियों और गहनों से भी मां दुर्गा की एक अलग प्रतिमा बना रहे हैं।
50 हजार पेंसिल से तैयार हो रही प्रतिमा
मूर्तिकार विक्की बिंदू ने बताया कि इस बार कुछ नया और अनोखा करने का विचार आया। इसके बाद उन्होंने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई में इस्तेमाल होने वाली सामग्रियों से मां दुर्गा की प्रतिमा बनाने का फैसला किया। इस प्रतिमा को तैयार करने में करीब 50 हजार पेंसिल के साथ इरेजर और पेंसिल की छीलन का इस्तेमाल किया जा रहा है।
प्रतिमा का आधार कागज से तैयार किया गया है। इसके बाद रंग-बिरंगी पेंसिल और अन्य सामग्रियों की मदद से मां दुर्गा की प्रतिमा को आकर्षक रूप दिया जा रहा है। विक्की बिंदू के मुताबिक, इस प्रतिमा को तैयार करने में करीब डेढ़ महीने का समय लगा है। इसके निर्माण में सात से आठ लोग जुटे हुए हैं। केवल पेंसिल पर लगभग 35 हजार रुपये खर्च किए गए हैं।
मां के वस्त्र और शृंगार को खास बनाने के लिए शार्पनर, रंगीन पेंसिल, इरेजर और पेंसिल से जुड़ी कई अन्य सामग्रियों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
चूड़ियों और गहनों से भी होगा मां का शृंगार
विक्की बिंदू का दूसरा प्रयोग भी बेहद खास है। वह चूड़ियों और गहनों की मदद से मां दुर्गा की एक अन्य प्रतिमा तैयार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि नवरात्रि के दौरान महिलाएं सज-संवरकर मां के दर्शन करने जाती हैं और अपने कपड़ों के अनुरूप चूड़ियां व गहने पहनती हैं। इसी विचार से उन्हें मां दुर्गा की प्रतिमा को चूड़ियों और आभूषणों से सजाने की प्रेरणा मिली।
इस प्रतिमा के निर्माण पर करीब 40 हजार रुपये खर्च होने का अनुमान है। उनका उद्देश्य मां दुर्गा के शृंगार को एक अलग और आकर्षक अंदाज में प्रस्तुत करना है।
तीन पीढ़ियों से मूर्ति बनाने की परंपरा
विक्की बिंदू का परिवार तीन पीढ़ियों से मूर्ति निर्माण के काम से जुड़ा है। उन्होंने बताया कि उनके दादा ने इस परंपरा की शुरुआत की थी, जिसे उनके पिता ने आगे बढ़ाया। पिछले 10 वर्षों से वह खुद इस काम में जुटे हैं और हर साल कुछ नया करने का प्रयास करते हैं।
2025 में पॉपकॉर्न और बांस से बनाई थी प्रतिमा
विक्की बिंदू इससे पहले भी अनूठी सामग्रियों से मां दुर्गा की प्रतिमाएं बना चुके हैं। वर्ष 2025 में उन्होंने बांस, सिल्वर फॉयल, कागज और पॉपकॉर्न का इस्तेमाल कर प्रतिमा तैयार की थी। इस बार पेंसिल और चूड़ियों से प्रतिमा बनाने का उनका प्रयोग खास आकर्षण बन सकता है।
गया जी के इस मूर्तिकार की रचनात्मकता न केवल मूर्ति निर्माण की पारंपरिक कला को नया रूप दे रही है, बल्कि यह भी दिखाती है कि श्रद्धा और कल्पनाशीलता के मेल से कला के कितने अनोखे रूप सामने आ सकते हैं।







