पटना: बिहार की राजधानी पटना में पुलिस विभाग के कामकाज में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर बड़ी कार्रवाई की गई है। ग्रामीण एसपी कोमल मीणा ने 11 थानों के 72 पुलिस पदाधिकारियों का वेतन अगले आदेश तक रोकने का निर्देश दिया है। यह कार्रवाई निर्धारित समय सीमा में कांडों का निष्पादन नहीं करने, अनुसंधान में ढिलाई बरतने और वरीय अधिकारियों के निर्देशों का पालन नहीं करने के मामले में की गई है।
पुलिस विभाग की ओर से सितंबर महीने में दर्ज कांडों के अनुसंधान और निष्पादन की प्रगति की समीक्षा की गई थी। इस दौरान कई अनुसंधानकर्ताओं का प्रदर्शन निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप नहीं पाया गया। समीक्षा में सामने आया कि कई पुलिस पदाधिकारी अपने जिम्मे के मामलों में न्यूनतम निष्पादन लक्ष्य भी पूरा नहीं कर सके थे। इसके बाद ग्रामीण एसपी ने संबंधित पदाधिकारियों का वेतन रोकने का आदेश जारी किया।
बख्तियारपुर थाना के 13 पदाधिकारियों पर कार्रवाई
वेतन रोकने की कार्रवाई में बख्तियारपुर थाना के सबसे अधिक 13 पुलिस पदाधिकारी शामिल हैं। इसके अलावा बाढ़ थाना के 11, अथमलगोला थाना के 10 और फतुहा थाना के आठ पदाधिकारियों पर कार्रवाई की गई है।
वहीं, खुसरूपुर थाना के सात और पंडारक थाना के छह पुलिस पदाधिकारियों का वेतन भी अगले आदेश तक रोक दिया गया है। इन थानों में लंबित मामलों के अनुसंधान और निष्पादन में अपेक्षित प्रगति नहीं मिलने के बाद यह कदम उठाया गया।
दीदारगंज और सालिमपुर के पांच-पांच अधिकारी शामिल
कार्रवाई की सूची में दीदारगंज और सालिमपुर थाना के पांच-पांच पुलिस पदाधिकारी शामिल हैं। इसके अलावा मरांची थाना के तीन तथा मोकामा और नदी थाना के दो-दो पदाधिकारियों पर भी कार्रवाई की गई है।
इस तरह पटना जिले के ग्रामीण क्षेत्र के कुल 11 थानों के 72 पुलिस पदाधिकारी विभागीय कार्रवाई की जद में आए हैं। वेतन रोकने का आदेश अगले निर्देश तक प्रभावी रहेगा।
लंबित कांडों के निष्पादन में तेजी लाने का निर्देश
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस कार्रवाई का उद्देश्य लंबित मामलों के अनुसंधान और निष्पादन की प्रक्रिया में तेजी लाना है। निर्धारित समय सीमा में कांडों का निष्पादन नहीं होने से पुलिस की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है। ऐसे में अधिकारियों को अपने दायित्वों का निर्वहन समय पर करने का निर्देश दिया गया है।
ग्रामीण एसपी कोमल मीणा ने स्पष्ट किया है कि अनुसंधान में लापरवाही बरतने, निर्धारित लक्ष्य पूरा नहीं करने और वरीय अधिकारियों के निर्देशों की अनदेखी करने वाले पदाधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
इस कार्रवाई के बाद संबंधित थानों के पुलिस पदाधिकारियों पर लंबित मामलों के निष्पादन में तेजी लाने का दबाव बढ़ेगा। पुलिस विभाग की इस पहल को अनुसंधान की गुणवत्ता सुधारने और मामलों के समयबद्ध निष्पादन को सुनिश्चित करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
