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मेरठ नीला ड्रम हत्याकांड: मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा, सौरभ राजपूत मर्डर केस में अदालत का बड़ा फैसला

मेरठ : उत्तर प्रदेश के मेरठ में चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अपनी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला के हाथों मारे गए सौरभ राजपूत के मामले में बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को जिला अदालत ने दोनों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई। मर्चेंट नेवी में काम कर चुके सौरभ की हत्या और उसके शव को सीमेंट से भरे नीले ड्रम में छिपाने की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। करीब 19 महीने बाद आए इस फैसले को मामले की न्यायिक प्रक्रिया में अहम पड़ाव माना जा रहा है।

क्या है मेरठ का चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड?

यह मामला मार्च 2025 में सामने आया था। सौरभ राजपूत की हत्या के बाद उसके शव के टुकड़े कर उन्हें एक नीले प्लास्टिक ड्रम में रखा गया था। इसके बाद ड्रम में सीमेंट भरकर शव को छिपाने की कोशिश की गई। पुलिस जांच में सौरभ की पत्नी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला की भूमिका सामने आई थी।

मामले के खुलासे के बाद यह घटना राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गई। हत्या के तरीके और शव को छिपाने की कोशिश ने लोगों को हैरान कर दिया था।

22 गवाहों और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर फैसला

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने कई अहम साक्ष्य पेश किए। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मुकदमे में 22 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। पुलिस जांच में फॉरेंसिक रिपोर्ट, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और वारदात से संबंधित अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को भी महत्वपूर्ण माना गया।

30 सितंबर 2026 को अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को हत्या तथा साक्ष्य मिटाने से जुड़े अपराधों में दोषी करार दिया था। इसके बाद सजा के मुद्दे पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं। बुधवार को अदालत ने दोनों को मृत्युदंड की सजा सुनाई।

देशभर में चर्चा में रहा मामला

सौरभ राजपूत हत्याकांड केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि अपनी क्रूरता और शव को छिपाने के तरीके के कारण लंबे समय तक सुर्खियों में रहा। पुलिस की जांच, अदालत में पेश किए गए साक्ष्य और लंबी सुनवाई के बाद अब सजा का ऐलान किया गया है।

मेरठ की अदालत के इस फैसले ने मामले को एक नया मोड़ दिया है। हालांकि, मृत्युदंड के फैसले के बाद आगे की न्यायिक प्रक्रिया और अपील की स्थिति भी महत्वपूर्ण होगी।

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