पटना: बिहार के पूर्व मंत्री और जदयू के वरिष्ठ विधायक श्याम रजक ने राघोपुर नाव हादसे को लेकर अपनी ही सरकार को घेरा है। उन्होंने सवाल उठाया कि नाव दुर्घटना के बाद सरकार ने अब तक बड़ी कार्रवाई क्यों नहीं की। उन्होंने कहा कि जब सरकार की ओर से स्पष्ट आदेश जारी किए गए थे, तो उनका पालन क्यों नहीं हुआ? आदेश का पालन नहीं करने वाले बड़े अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।
राघोपुर में चिराग पासवान के विरोध को बताया सही
तेजस्वी यादव के राघोपुर दौरे के दौरान हुए विरोध पर श्याम रजक ने कहा कि चिराग पासवान दिन में वहां पहुंच गए थे, लेकिन जनता की समस्याओं से उनका कोई मतलब नहीं था। उन्होंने कहा कि इसी वजह से लोगों ने उनका विरोध किया। रजक ने आरोप लगाया कि जनसमस्याओं के समाधान पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है।
तेजस्वी यादव की जमीन की मांग पर दिया जवाब
नाव हादसे में प्रभावित परिवारों के लिए तेजस्वी यादव की ओर से जमीन देने की मांग पर श्याम रजक ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव के पास खुद बहुत जमीन है। उन्हें अपनी जमीन पीड़ित परिवारों को देने की बात कहनी चाहिए।
अनंत सिंह के विरोध के बावजूद नीरज कुमार की जीत का दावा
जदयू विधायक अनंत सिंह द्वारा अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार नीरज कुमार का विरोध किए जाने और उन्हें चुनाव के बाद सबक सिखाने संबंधी बयान पर श्याम रजक ने कहा कि कौन क्या बोलता है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने दावा किया कि नीरज कुमार की जीत सुनिश्चित है और पार्टी पूरी एकजुटता के साथ चुनाव मैदान में उतरी है।
भगवान राम पर सम्राट चौधरी के बयान से बनाई दूरी
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के भगवान प्रभु राम से जुड़े बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए श्याम रजक ने कहा कि पुरानी बातों को छोड़ देना चाहिए। उन्होंने कहा कि मंदिर वहां बन चुका है। इस बयान के जरिए उन्होंने इस मुद्दे पर विस्तार से टिप्पणी करने से परहेज किया।
कांग्रेस और राजद के गठबंधन पर कसा तंज
विधान परिषद चुनाव को लेकर कांग्रेस के चुनाव अभियान और राजद के खिलाफ मैदान में उतरने के सवाल पर श्याम रजक ने दोनों दलों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ये लोग साथ बैठकर चाय पीते हैं और बाहर निकलने के बाद एक-दूसरे को गाली देते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि इन दलों के बीच वास्तविक गठबंधन दिखाई नहीं देता।
श्याम रजक के इन बयानों से बिहार की राजनीति में नाव हादसे, विपक्षी नेताओं के दौरे और विधान परिषद चुनाव को लेकर सियासी बयानबाजी तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
