अरवल : बिहार के अरवल जिले के लोगों के लिए सड़क कनेक्टिविटी को लेकर बड़ी खबर है। शहर में लगने वाले भीषण जाम से निजात दिलाने के लिए करीब 600 करोड़ रुपये की लागत से 12.8 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड बाईपास का निर्माण किया जाना है। इस परियोजना के पूरा होने से शहर के अंदर भारी वाहनों का दबाव कम होने और आम लोगों को आवागमन में राहत मिलने की उम्मीद है।
12.8 किलोमीटर लंबा होगा बाईपास
प्रस्तावित ग्रीनफील्ड बाईपास राष्ट्रीय राजमार्ग-139 पर प्रसादी इंग्लिश बाजार से शुरू होकर समाहरणालय के पूर्वी हिस्से और मोथा गांव के रास्ते पिपरा बंगला के समीप दोबारा एनएच-139 से जुड़ेगा। इस सड़क के बनने से शहर के भीतर से गुजरने वाले वाहनों को वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होगा।
परियोजना के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से स्वीकृति मिलने की जानकारी पहले सामने आ चुकी है। इसकी अनुमानित लागत करीब 600 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
20 मौजा की जमीन का होगा अधिग्रहण
बाईपास निर्माण के लिए सदर प्रखंड के 20 मौजा के अंतर्गत आने वाले 756 प्लॉट की जमीन अधिग्रहित करने की योजना है। इसके लिए करीब 55.874 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता बताई गई है। फिलहाल भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया परियोजना के महत्वपूर्ण चरणों में शामिल है। जमीन संबंधी औपचारिकताएं पूरी होने और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) सहित आवश्यक प्रक्रियाओं के बाद निर्माण की अगली कार्रवाई आगे बढ़ेगी।
भगत सिंह चौक पर जाम से मिलेगी राहत
अरवल शहर में राष्ट्रीय राजमार्ग-139 और एनएच-33 के मिलन बिंदु भगत सिंह चौक के आसपास वाहनों का दबाव अधिक रहता है। खासकर बालू लदे भारी वाहनों की आवाजाही के कारण यहां अक्सर जाम की स्थिति बन जाती है। इससे आम लोगों, दुकानदारों, स्कूली बच्चों और मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार एंबुलेंस को भी जाम से निकालने में दिक्कत होती है।
ग्रीनफील्ड बाईपास बनने के बाद भारी वाहनों को शहर के अंदर प्रवेश करने की जरूरत कम पड़ेगी। इससे अरवल के साथ-साथ उमैराबाद और बैदराबाद क्षेत्र में भी यातायात व्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद है।
व्यापार और आवागमन को मिलेगा फायदा
शहर में जाम के कारण दुकानदारों और स्थानीय कारोबारियों को भी नुकसान उठाना पड़ता है। बाईपास बनने से मुख्य सड़कों पर वाहनों का दबाव घट सकता है, जिससे लोगों को बाजार आने-जाने में सुविधा मिलेगी। इसके अलावा पटना और औरंगाबाद की ओर यात्रा करने वाले लोगों के लिए भी आवागमन अधिक सुगम होने की संभावना है।
