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बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में आज से जंगल सफारी का नया सीजन शुरू, किराया और ठहरने की व्यवस्था

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पश्चिम चंपारण : अगर आप परिवार के साथ जंगल की सैर करने, वन्यजीवों को करीब से देखने और प्रकृति की खूबसूरती का आनंद लेने की योजना बना रहे हैं, तो बिहार का वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) आपके लिए शानदार पर्यटन स्थल हो सकता है। पश्चिम चंपारण स्थित इस टाइगर रिजर्व में शनिवार, 17 अक्टूबर से जंगल सफारी का नया पर्यटन सत्र शुरू होने की जानकारी दी गई है। यहां पर्यटक घने जंगलों, हरियाली, प्राकृतिक रास्तों और वन्यजीवों के बीच रोमांचक अनुभव प्राप्त कर सकते हैं।

हालांकि, यात्रा पर निकलने से पहले सफारी का किराया, ठहरने की सुविधा, निर्धारित रूट और बुकिंग की जानकारी लेना जरूरी है। इससे परिवार के बजट के अनुसार यात्रा की योजना बनाना आसान होगा।

2400 रुपये में छह लोग कर सकेंगे जिप्सी सफारी

वीटीआर की वेबसाइट पर पहले प्रकाशित दरों के अनुसार, जिप्सी सफारी का किराया प्रति वाहन 2400 रुपये रहा है। एक जिप्सी में अधिकतम छह वयस्क सफर कर सकते हैं। इस हिसाब से छह लोगों के परिवार के लिए प्रति व्यक्ति खर्च लगभग 400 रुपये होगा।

वहीं, चार सदस्यों वाला परिवार भी पूरी जिप्सी बुक करता है, तो वाहन का कुल किराया 2400 रुपये होगा। ऐसे में प्रति व्यक्ति औसत खर्च 600 रुपये पड़ेगा। कम बजट में सफारी करने वाले पर्यटकों के लिए कैंटर का विकल्प भी सूचीबद्ध रहा है, जिसका किराया 400 रुपये प्रति व्यक्ति बताया गया है।

ध्यान रहे कि ये पहले प्रकाशित दरें हैं। वर्तमान पर्यटन सत्र में लागू किराये, उपलब्धता और अतिरिक्त शुल्क की पुष्टि बुकिंग से पहले जरूर कर लें।

चार लोगों के परिवार के लिए 3660 रुपये का अनुमानित बजट

अगर चार सदस्यों का परिवार जंगल सफारी के साथ एक रात वीटीआर में रुकना चाहता है, तो पहले प्रकाशित दरों के आधार पर अनुमानित खर्च 3660 रुपये हो सकता है। इसमें जिप्सी सफारी के 2400 रुपये और मंगुराहा पर्यटन केंद्र में चार बेड वाले एसी कमरे के 1260 रुपये शामिल हैं।

इसी तरह, छह सदस्यों के परिवार को एक जिप्सी सफारी और दो ऐसे कमरे लेने पर कुल 4920 रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं। यह केवल सफारी और कमरे का अनुमान है। इसमें भोजन, आने-जाने का किराया, प्रवेश शुल्क, कर और अन्य खर्च शामिल नहीं हैं।

105 रुपये से शुरू होते हैं ठहरने के विकल्प

वीटीआर में पर्यटकों के लिए अलग-अलग बजट के अनुसार ठहरने की व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है। पहले प्रकाशित दरों के मुताबिक, कोतराहां में डॉरमेट्री का किराया 105 रुपये प्रति बेड, वाल्मीकिनगर में टेंट हट का 735 रुपये और बांस हट का 1050 रुपये रहा है।

इसके अलावा वाल्मीकिनगर में सुईट रूम का किराया 1575 रुपये प्रति कमरा सूचीबद्ध रहा है। मंगुराहा में चार बेड वाले एसी कमरे की दर 1260 रुपये, जबकि गोबर्धना में थारू एसी सुईट का किराया 2500 रुपये बताया गया है। वर्तमान दरों और कमरों की उपलब्धता की पुष्टि करना जरूरी है।

बाघ, तेंदुआ और कई वन्यजीवों को देखने का मौका

वाल्मीकि टाइगर रिजर्व बिहार का एकमात्र टाइगर रिजर्व है। यहां बाघ, तेंदुआ, भालू, गौर, सांभर, चीतल, नीलगाय, जंगली कुत्ते, लकड़बग्घे और कई प्रजातियों के पक्षी पाए जाते हैं। जंगल सफारी के दौरान पर्यटक प्राकृतिक वातावरण और वन्यजीवों के आवास को करीब से देख सकते हैं। हालांकि, सफारी के दौरान किसी खास वन्यजीव का दिखाई देना निश्चित नहीं है।

जंगल सफारी के लिए चार रूट निर्धारित

वीटीआर में पर्यटक अपनी पसंद के अनुसार अलग-अलग सफारी रूट चुन सकते हैं।

  • मदनपुर रूट: मदनपुर स्थित गेटवे ऑफ वीटीआर से मदनपुर देवी स्थान होते हुए दिल्ली कैंप तक।
  • वाल्मीकिनगर रूट: वाल्मीकिनगर पर्यटन केंद्र से गोनौली वन प्रक्षेत्र स्थित गिद्ध संरक्षण केंद्र तक।
  • वाल्मीकिनगर-गोबर्धना-मंगुराहा रूट: इसमें गोनौली, चिउटाहां और रघिया बफर जोन के साथ गिद्ध संरक्षण केंद्र का क्षेत्र शामिल है।
  • मंगुराहा रूट: भवानीपुर नाका से मानपुर तक।

सफारी रूट और उनकी वर्तमान उपलब्धता की जानकारी बुकिंग से पहले लेना बेहतर रहेगा।

वाल्मीकिनगर, मंगुराहा या गोबर्धना, कहां जाएं?

वाल्मीकिनगर उन पर्यटकों के लिए अच्छा विकल्प है, जो जंगल सफारी के साथ गंडक नदी, गंडक बराज, त्रिवेणी संगम और गोलघर जैसे स्थलों को भी देखना चाहते हैं।

मंगुराहा अपने जंगल, घास के मैदान और लालभितिया सनसेट प्वाइंट के लिए जाना जाता है। इसके आसपास भितिहरवा गांधी आश्रम, सोफा मंदिर और सहोदरा मंदिर भी हैं। वहीं, गोबर्धना क्षेत्र घने जंगलों, घाटियों और प्राकृतिक दृश्यों के लिए आकर्षक है।

तीनों पर्यटन केंद्रों के बीच दूरी लगभग 40 से 90 किलोमीटर तक हो सकती है। इसलिए सफारी रूट तय करने के बाद उसी के नजदीक ठहरने की व्यवस्था करना सुविधाजनक रहेगा।

मंगलवार को बंद रहती है जंगल सफारी

वीटीआर की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, मंगलवार को जंगल सफारी बंद रहती है। इसलिए पर्यटकों को इस दिन सफारी की योजना बनाने से बचना चाहिए।

पहले प्रकाशित समय-सारिणी के मुताबिक, सफारी के लिए सुबह 6 बजे से 10 बजे तक और दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक की समय-सीमाएं निर्धारित रही हैं। ये सफारी संचालन की शिफ्ट हैं, न कि एक सफारी की अवधि। जिप्सी सफारी की पहले सूचीबद्ध अधिकतम अवधि दो घंटे रही है। मौजूदा समय-सारिणी की पुष्टि जरूरी है।

पटना और गोरखपुर से कैसे पहुंचें वीटीआर?

वाल्मीकिनगर जाने वाले पर्यटकों के लिए बगहा रेलवे स्टेशन उपयोगी विकल्प है, जबकि मंगुराहा क्षेत्र के लिए नरकटियागंज रेलवे स्टेशन से पहुंचना सुविधाजनक हो सकता है। पर्यटक बेतिया, पटना, मुजफ्फरपुर और गोरखपुर से सड़क मार्ग से भी यात्रा कर सकते हैं। वास्तविक दूरी चुने गए पर्यटन केंद्र पर निर्भर करेगी।

वीटीआर की वेबसाइट पर बेतिया से एक दिवसीय यात्रा, पटना से दो दिन और एक रात तथा तीन दिन और दो रात के पर्यटन पैकेज भी सूचीबद्ध रहे हैं। इनकी वर्तमान कीमत और उपलब्धता की जानकारी पहले ले लें।

ऑनलाइन बुकिंग और संपर्क नंबर

पर्यटक वीटीआर की आधिकारिक वेबसाइट पर सफारी और ठहरने के विकल्प देख सकते हैं।

  • ऑनलाइन बुकिंग: https://valmikitigerreserve.com/online-booking/
  • वाल्मीकिनगर पर्यटन केंद्र: 9162219095
  • गोबर्धना पर्यटन केंद्र: 9110192512
  • मंगुराहा पर्यटन केंद्र: 9973909350, 6205671631
  • वीटीआर टूर फैसिलिटेटर, बेतिया: 6207283609

दिए गए संपर्क नंबरों और बुकिंग सुविधाओं की वर्तमान स्थिति की पुष्टि कर लें। संपर्क के लिए पहले प्रकाशित समय सुबह 9:30 बजे से शाम 7 बजे तक बताया गया है।

यात्रा से पहले इन बातों का रखें ध्यान

परिवार के साथ वीटीआर जाने से पहले सफारी टिकट, कमरे की उपलब्धता, कुल किराया और प्रवेश संबंधी नियमों की जानकारी जरूर लें। पहचान पत्र और जरूरी दवाइयां साथ रखें। जंगल में वन विभाग के निर्देशों का पालन करें और वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें।

सही रूट, ठहरने की व्यवस्था और बजट की योजना के साथ वाल्मीकि टाइगर रिजर्व की यात्रा रोमांचक और यादगार बन सकती है।

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