पटना : बिहार में शिक्षकों के स्थानांतरण और शिक्षा विभाग की प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से शिक्षकों से जुड़े मामलों की समीक्षा करने और प्रशासनिक त्रुटियों के कारण शिक्षकों को परेशानी नहीं होने देने की अपील की है।
शिक्षकों के मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग
शिक्षकों से जुड़े प्रशासनिक फैसलों को लेकर सामने आ रही शिकायतों के बीच तेजस्वी यादव ने सरकार से नियमों के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि किसी स्तर पर प्रशासनिक गलती हुई है, तो उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और उसका खामियाजा शिक्षकों को नहीं भुगतना पड़े।
स्थानांतरण प्रक्रिया को लेकर उठे सवाल
बिहार में सरकारी शिक्षकों के स्थानांतरण को लेकर पहले भी विवाद सामने आए हैं। अगस्त 2026 में तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर उर्दू, अरबी और फारसी विषय के शिक्षकों के स्थानांतरण की प्रक्रिया की समीक्षा करने की मांग की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि कुछ विद्यालयों में पर्याप्त छात्र संख्या होने के बावजूद शिक्षकों को अतिरिक्त बताकर स्थानांतरण सूची में शामिल किया गया।
तेजस्वी यादव ने नियमों के विपरीत पाए जाने वाले स्थानांतरणों की समीक्षा करने और संबंधित मामलों में उचित कार्रवाई की मांग की थी।
शिक्षकों की नौकरी पर क्या पड़ेगा असर?
शिक्षकों की नौकरी, स्थानांतरण और सेवा संबंधी मामलों में अंतिम निर्णय संबंधित सरकारी आदेशों, नियमों और जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगा। फिलहाल किसी शिक्षक की नौकरी जाने या सेवा समाप्त होने के संबंध में आधिकारिक आदेश की पुष्टि किए बिना ऐसा दावा करना उचित नहीं होगा।
शिक्षकों और अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे बिहार शिक्षा विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर जारी आदेशों और अधिसूचनाओं की जानकारी लेते रहें।
अब सरकार के रुख पर नजर
तेजस्वी यादव की मांग के बाद शिक्षकों से जुड़े मामलों में सरकार की ओर से होने वाली कार्रवाई पर नजर रहेगी। शिक्षकों के हितों की रक्षा, प्रशासनिक जवाबदेही और नियमों के अनुरूप निर्णय लेना इस मामले के प्रमुख पहलू हैं।
