पटना : बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के लिए शुक्रवार यानी आज मतदान कराया जा रहा है। चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में हो रहे इस चुनाव को राज्य की राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए), महागठबंधन और प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी के बीच मुकाबले ने चुनावी माहौल को दिलचस्प बना दिया है। मतगणना 27 अक्टूबर को होगी।
आठ सीटों पर हो रहा है चुनाव
बिहार विधान परिषद की जिन आठ सीटों पर मतदान हो रहा है, उनमें चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं।
स्नातक निर्वाचन क्षेत्र:
- पटना स्नातक
- दरभंगा स्नातक
- तिरहुत स्नातक
- कोसी स्नातक
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र:
- पटना शिक्षक
- दरभंगा शिक्षक
- तिरहुत शिक्षक
- सारण शिक्षक
चुनाव में कुल 150 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों से 90 और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों से 60 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। कुल 5,32,847 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकेंगे। मतदान का समय सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक निर्धारित है।
पटना स्नातक सीट पर सबसे ज्यादा चर्चा
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव इस बार खास चर्चा में है। जदयू ने अपने मौजूदा विधान पार्षद नीरज कुमार को फिर से मैदान में उतारा है। वहीं, जन सुराज ने डॉ. अनुज सिंह को उम्मीदवार बनाया है।
इस मुकाबले में मोकामा के विधायक अनंत सिंह द्वारा अनुज सिंह का समर्थन किए जाने से राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। अनंत सिंह जदयू के विधायक होने के बावजूद अपनी पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार नीरज कुमार के विरोध में प्रचार करते दिखाई दिए। इससे जदयू के भीतर मतभेदों को लेकर भी चर्चा तेज हुई है।
NDA और महागठबंधन के सामने चुनौती
एनडीए की ओर से भाजपा और जदयू ने चार-चार सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। दूसरी तरफ, महागठबंधन के घटक दलों के बीच कई निर्वाचन क्षेत्रों में सीट बंटवारे पर सहमति नहीं बन सकी। इसके कारण कुछ सीटों पर कांग्रेस और राजद के उम्मीदवार आमने-सामने हैं।
जन सुराज पार्टी सभी आठ सीटों पर चुनाव लड़ रही है। पार्टी की कोशिश स्नातक और शिक्षक मतदाताओं के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की है। निर्दलीय उम्मीदवारों की मौजूदगी ने भी कई सीटों पर मुकाबले को बहुकोणीय बना दिया है।
27 अक्टूबर को मतगणना, सभी की नजर नतीजों पर
मतदान के बाद 27 अक्टूबर को वोटों की गिनती की जाएगी। चुनाव परिणाम से यह पता चलेगा कि एनडीए अपनी मौजूदा राजनीतिक स्थिति कितनी मजबूत रख पाता है और जन सुराज को विधान परिषद के चुनाव में कितनी सफलता मिलती है।
हालांकि, इन आठ सीटों के नतीजों से राज्य सरकार का तत्काल गठन या बदलाव नहीं होगा, लेकिन परिणाम को बिहार की राजनीतिक ताकत और विभिन्न दलों के जनाधार के आकलन के रूप में देखा जा रहा है।







