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बिहार के किसानों के लिए खुशखबरी! 2,700 करोड़ से बदलेंगी 54 बाजार समितियां, मिलेंगे कोल्ड स्टोरेज और गोदाम

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पटना : बिहार के किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में राज्य सरकार ने तैयारी तेज कर दी है। इसके तहत राज्य की 54 बाजार समितियों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। करीब 2,700 करोड़ रुपये की लागत से बाजार समितियों को आधुनिक मार्केट के रूप में विकसित करने की योजना है। यहां फल, सब्जी, अनाज, दूध, मछली और फूलों की बिक्री के लिए अलग-अलग व्यवस्था होगी। इसके अलावा गोदाम, कोल्ड स्टोरेज, कैंटीन और अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।

बाजार समिति में बनेंगे बहुमंजिला मार्केट

योजना के तहत बाजार समितियों की जमीन पर बहुमंजिला मार्केट विकसित किए जाएंगे। इनमें अलग-अलग मंजिलों पर विभिन्न कृषि उत्पादों की खरीद-बिक्री की व्यवस्था होगी। निचले हिस्से में फल-सब्जी और अनाज मंडी बनाई जाएगी, जबकि ऊपरी मंजिलों पर डेयरी उत्पाद, मछली और फूलों की बिक्री के लिए अलग-अलग जोन विकसित किए जाएंगे।

इससे किसानों और व्यापारियों को एक ही परिसर में कई सुविधाएं मिल सकेंगी। उन्हें अपनी उपज बेचने के लिए अलग-अलग बाजारों में जाने की जरूरत कम होगी। वहीं, खरीदारों को भी एक ही जगह पर विभिन्न कृषि उत्पाद मिल सकेंगे।

उपज खराब होने से बचाने के लिए बनेंगे गोदाम और कोल्ड स्टोरेज

किसानों के सामने बड़ी चुनौती अपनी उपज को सुरक्षित रखने की होती है। खासकर फल, सब्जी और दूध जैसे जल्दी खराब होने वाले उत्पादों को लंबे समय तक सुरक्षित रखना मुश्किल होता है। समय पर बिक्री नहीं होने पर किसानों को नुकसान भी उठाना पड़ता है।

इस समस्या को दूर करने के लिए बाजार समिति परिसरों में बड़े गोदाम और कोल्ड स्टोरेज विकसित किए जाएंगे। इससे किसानों को अपनी उपज सुरक्षित रखने और जरूरत के अनुसार बिक्री करने का विकल्प मिलेगा। हालांकि, बेहतर कीमत मिलना बाजार की मांग, उपलब्धता और उत्पादों की गुणवत्ता पर भी निर्भर करेगा।

कैंटीन, गेस्ट हाउस और महिलाओं के लिए भी सुविधाएं

आधुनिक बाजार समितियों में खरीद-बिक्री के साथ किसानों और व्यापारियों की सुविधाओं का भी ध्यान रखा जाएगा। योजना के अनुसार, परिसर में कैंटीन और 40 बेड वाला गेस्ट हाउस बनाया जाएगा। महिलाओं के लिए विश्राम गृह और शौचालय की सुविधा भी उपलब्ध कराने की योजना है।

इसके अलावा सड़कों, नालों, बिजली और पानी की व्यवस्था को बेहतर बनाया जाएगा। सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे और सौर ऊर्जा जैसी सुविधाओं को भी विकसित किया जाएगा।

ऑनलाइन बेच सकेंगे अपनी उपज, दूसरे बाजारों तक पहुंचेगा सामान

बाजार समितियों को नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट यानी e-NAM से जोड़ने की योजना है। इससे किसानों को ऑनलाइन माध्यम से अपनी उपज बेचने का विकल्प मिल सकेगा। इस व्यवस्था के जरिए अलग-अलग बाजारों के खरीदारों और विक्रेताओं को एक मंच पर लाने का प्रयास किया जाएगा।

इससे बिहार के किसानों को दूसरे राज्यों के बाजारों तक पहुंचने का अवसर मिल सकता है। हालांकि, इसका पूरा लाभ उठाने के लिए किसानों को ऑनलाइन बिक्री, बाजार भाव और भुगतान की प्रक्रिया की जानकारी होना जरूरी होगा।

गया और वैशाली में काम पूरा, चंपारण में अंतिम चरण

बिहार कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, गया के चंदौती और वैशाली बाजार समिति में विकास कार्य पूरा हो चुका है। वहीं, पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण में काम अंतिम चरण में बताया गया है।

राज्य की 54 बाजार समितियों के जीर्णोद्धार पर करीब 2,700 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसके तहत बाजारों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और किसानों के लिए सुविधाएं विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।

किसानों को क्या होगा फायदा?

बाजार समितियों के आधुनिकीकरण से किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए बेहतर विकल्प मिल सकते हैं। गोदाम और कोल्ड स्टोरेज से भंडारण की सुविधा बढ़ेगी, जबकि ऑनलाइन बिक्री से दूसरे बाजारों तक पहुंचने का अवसर मिलेगा। एक ही परिसर में अलग-अलग उत्पादों की मंडी होने से खरीद-बिक्री की प्रक्रिया भी आसान हो सकती है।

हालांकि, किसानों को बेहतर कीमत मिलने, बिचौलियों पर निर्भरता कम होने और उनकी आय बढ़ने का वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि इन सुविधाओं का संचालन कितनी प्रभावी तरीके से होता है और किसानों को इनका कितना फायदा मिल पाता है।

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