पटना : बिहार में अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई के दौरान जब्त किए गए हजारों वाहनों की अब नीलामी की जाएगी। खान एवं भूतत्व विभाग करीब 5 हजार वाहनों को नीलाम करने की तैयारी में जुटा है। विभाग को इस प्रक्रिया से लगभग 200 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने की उम्मीद है। नीलाम होने वाले वाहनों में ट्रैक्टर, हाईवा, डंपर, ट्रक और लोडर शामिल हैं।
विभाग ने अवैध खनन और खनिजों के अवैध परिवहन के खिलाफ अभियान के दौरान बड़ी संख्या में वाहनों को जब्त किया था। वाहन मालिकों को निर्धारित जुर्माना जमा कर अपनी गाड़ियां छुड़ाने का मौका दिया गया, लेकिन बड़ी संख्या में मालिकों ने तय समय के भीतर जुर्माना नहीं भरा। अब ऐसे वाहनों की नीलामी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
8,714 वाहन जब्त, 5 हजार की नीलामी की तैयारी
खान एवं भूतत्व विभाग के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 और 2026-27 में अवैध खनन के खिलाफ चलाए गए अभियान के दौरान विभिन्न जिलों से कुल 8,714 वाहन जब्त किए गए। इनमें बालू और अन्य खनिजों के अवैध परिवहन में इस्तेमाल किए जाने वाले वाहन भी शामिल हैं।
विभाग के मुताबिक, 70 प्रतिशत से अधिक वाहन मालिकों ने निर्धारित समय में जुर्माना जमा कर अपने वाहन नहीं छुड़ाए। इसके बाद जब्त वाहनों की नीलामी की तैयारी शुरू की गई। फिलहाल विभाग वाहनों का रिकॉर्ड जुटाने के साथ जरूरी दस्तावेजों और कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करने में लगा है।
ये वाहन लंबे समय से विभिन्न जिलों के डंपिंग यार्ड, पुलिस थानों और जिला खनन कार्यालयों में खड़े हैं। नीलामी होने से सरकार को राजस्व मिलने के साथ ही इन स्थानों पर लंबे समय से पड़े वाहनों का निपटारा भी हो सकेगा।
वाहन छुड़ाने के लिए मिलता है 30 दिन का समय
बिहार खनिज नियमावली के तहत जब्त वाहन को छुड़ाने के लिए मालिक को 30 दिनों का समय दिया जाता है। इस दौरान खनिज का मूल्य, रॉयल्टी और निर्धारित जुर्माना जमा करना होता है। इसके बाद सक्षम प्राधिकारी के समक्ष आवेदन देकर वाहन छुड़ाने की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।
यदि निर्धारित समय में जुर्माना जमा नहीं किया जाता है, तो वाहन मालिक के पंजीकृत पते पर रिमाइंडर नोटिस भेजा जाता है। इसके बाद भी भुगतान नहीं होने पर नियमानुसार वाहन को राजसात करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ऐसे वाहनों की नीलामी की जाती है।
जुर्माने की रकम अधिक होने से वाहन नहीं छुड़ाते मालिक
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, जब्त किए गए कई वाहन पुराने मॉडल के हैं और उनकी बाजार कीमत कम है। वहीं, अवैध खनन में इस्तेमाल होने के कारण उन पर लगाया गया जुर्माना वाहन की कीमत से अधिक हो सकता है। ऐसी स्थिति में कुछ वाहन मालिक जुर्माना भरकर गाड़ी छुड़ाने के बजाय उसे छोड़ देना बेहतर समझते हैं।
इसके अलावा, कुछ वाहनों के पास जरूरी दस्तावेज नहीं होते या उनमें फर्जी नंबर प्लेट का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे मामलों में भी वाहन मालिक सामने आने से बचते हैं। फाइनेंस पर खरीदे गए वाहनों के मामलों में भी स्वामित्व और भुगतान से जुड़ी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
जब्त बालू की भी होगी नीलामी
खान एवं भूतत्व विभाग जब्त वाहनों के साथ अवैध खनन के दौरान जब्त किए गए खनिज पदार्थों का भी निपटारा करेगा। इसमें जब्त बालू प्रमुख है। विभाग इसकी मात्रा और गुणवत्ता का आकलन कर उसे सरकारी निर्माण परियोजनाओं में इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है।
पहले चरण में जब्त बालू को पथ निर्माण, भवन निर्माण और ग्रामीण कार्य विभाग की परियोजनाओं के लिए उपलब्ध कराने की योजना है। इसके लिए निर्धारित सरकारी दरों के अनुसार प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसके बाद बचा हुआ बालू खुले बाजार में नीलाम किया जा सकता है।
इससे सरकारी निर्माण कार्यों में जब्त खनिज का उपयोग संभव होगा और शेष स्टॉक की बिक्री से सरकार को अतिरिक्त राजस्व भी मिल सकेगा।
कानूनी प्रक्रिया के तहत होगी नीलामी: मंत्री
खान एवं भूतत्व मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने कहा कि अवैध खनन में इस्तेमाल किए गए वाहनों और जब्त खनिज पदार्थों की नीलामी की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरी कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया और निर्धारित नियमों के अनुसार होगी। विभाग इस दिशा में तेजी से काम कर रहा है।
विभाग को उम्मीद है कि करीब 5 हजार जब्त वाहनों की नीलामी से लगभग 200 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हो सकता है। हालांकि, वास्तविक राजस्व की राशि नीलामी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
बिहार में इस कार्रवाई का उद्देश्य अवैध खनन पर अंकुश लगाने के साथ जब्त वाहनों और खनिजों का नियमानुसार निपटारा करना तथा सरकारी राजस्व बढ़ाना है।







