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पटना के 6 बड़े नालों पर बनेगी सड़क, जलजमाव और ट्रैफिक से मिलेगी राहत; मंदिरी नाला मॉडल पर होगा विकास

पटना : राजधानी पटना में जलजमाव और ट्रैफिक की समस्या कम करने के लिए छह प्रमुख नालों के जीर्णोद्धार की योजना तैयार की जा रही है। इसके तहत पहाड़ी, मोहनपुर, योगीपुर, बादशाही पइन, सिटी मोट और खनुआ नालों को ढककर उनके ऊपर सड़क बनाने की योजना है। यह परियोजना मंदिरी नाला परियोजना की तर्ज पर विकसित की जाएगी। नगर विकास एवं आवास विभाग के तहत बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम (बुडको) इस योजना को आगे बढ़ाएगा।

इस परियोजना का उद्देश्य बारिश के पानी की निकासी को बेहतर बनाने के साथ शहर में सड़क संपर्क और यातायात व्यवस्था को सुगम बनाना है। योजना के तहत नालों की मौजूदा स्थिति, पानी के बहाव और जलनिकासी में आने वाली बाधाओं का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा।

बारिश के पानी की निकासी सुधारने पर जोर

पटना में तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण कई इलाकों में बारिश के पानी की निकासी प्रभावित होती है। नालों की सीमित क्षमता, रास्ते में आने वाली रुकावटों और ड्रेनेज नेटवर्क की खामियों के कारण जलजमाव की समस्या पैदा होती है।

प्रस्तावित परियोजना के तहत इन समस्याओं की पहचान कर नालों की क्षमता और जलनिकासी व्यवस्था में सुधार किया जाएगा। नालों को ढककर उनके ऊपर सड़क बनाने से उपलब्ध शहरी जगह का बेहतर इस्तेमाल करने की भी उम्मीद है।

ड्रोन सर्वे और हाइड्रोलिक मॉडलिंग से बनेगी योजना

छह नालों के जीर्णोद्धार के लिए ड्रोन सर्वेक्षण, टोपोग्राफिकल सर्वे और हाइड्रोलिक मॉडलिंग की मदद ली जाएगी। इसके जरिए नालों में बारिश के पानी के बहाव, उनकी क्षमता, बैकफ्लो और जलनिकासी में आने वाली बाधाओं का आकलन किया जाएगा।

अध्ययन के आधार पर जीआईएस आधारित डिजिटल नक्शा तैयार होगा। इससे नालों के पूरे नेटवर्क, सहायक नालों और पानी के बहाव की दिशा को समझने में मदद मिलेगी। इसी आधार पर निर्माण और सुधार कार्यों की रूपरेखा तैयार की जाएगी।

30 दिनों में तैयार करनी होगी डीपीआर

बुडको की योजना के तहत चयनित एजेंसी को काम शुरू होने के 30 दिनों के भीतर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर), बिल ऑफ क्वांटिटी (बीओक्यू) और निर्माण योग्य स्केच तैयार कर सौंपना होगा।

इन दस्तावेजों के आधार पर निर्माण कार्य की आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी। योजना में मुख्य नालों के साथ सर्विस ड्रेन नेटवर्क को आपस में जोड़ने पर भी जोर रहेगा, ताकि बारिश के पानी की निकासी सुचारु रूप से हो सके।

घनी आबादी वाले इलाकों से गुजरते हैं नाले

प्रस्तावित परियोजना में शामिल नाले पटना के कई महत्वपूर्ण और घनी आबादी वाले क्षेत्रों से गुजरते हैं।

  • मोहनपुर नाला: पुनाइचक से ऊर्जा पार्क के पास गांधी चौक तक फैला है।
  • योगीपुर नाला: योगीपुर से बहादुरपुर टावर होते हुए भूतनाथ मेट्रो स्टेशन तक जाता है।
  • बादशाही पइन: नंदलाल छपरा से माधोपुर तक गुजरता है।
  • पहाड़ी नाला: इसके नेटवर्क की लंबाई लगभग 6.55 किलोमीटर बताई गई है।
  • सिटी मोट और खनुआ नाला: इन दोनों नालों को भी प्रस्तावित जीर्णोद्धार योजना में शामिल किया गया है।

नालों को ढककर सड़क बनाने से संबंधित क्षेत्रों में आवागमन की सुविधा बढ़ाने और यातायात दबाव कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

पहाड़ी नाले के 6.55 किलोमीटर नेटवर्क का होगा अध्ययन

पहाड़ी नाले के पूरे नेटवर्क और उसके कैचमेंट एरिया का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि बारिश के दौरान पानी कहां से आता है, किन रास्तों से गुजरता है और किन स्थानों पर निकासी बाधित होती है।

इस अध्ययन के आधार पर जलनिकासी व्यवस्था में जरूरी सुधारों की पहचान की जाएगी, ताकि बारिश के दौरान पानी के बहाव को बेहतर बनाया जा सके।

मोहनपुर नाले की रुकावटें होंगी दूर

मोहनपुर नाले के करीब 700 मीटर हिस्से में आने वाली बाधाओं और ड्रेनेज नेटवर्क के मिसिंग लिंक को दूर करने की योजना है। इसका उद्देश्य पानी को मुख्य आउटफॉल तक सुचारु रूप से पहुंचाना है।

इसके लिए नाले और उससे जुड़े ड्रेनेज नेटवर्क की मौजूदा स्थिति का अध्ययन किया जाएगा। इसके बाद जरूरत के अनुसार सुधार कार्यों की रूपरेखा तैयार होगी।

मंदिरी नाला परियोजना की तर्ज पर होगा विकास

पटना में मंदिरी नाले को ढककर उसके ऊपर सड़क बनाई गई है। यह सड़क इनकम टैक्स गोलंबर के पास तारामंडल क्षेत्र से बांसघाट, अशोक राजपथ और जेपी गंगा पथ यानी मरीन ड्राइव की ओर संपर्क उपलब्ध कराती है।

इसी मॉडल की तर्ज पर अब अन्य प्रमुख नालों को विकसित करने की योजना है। इससे सड़क संपर्क बेहतर करने के साथ जलनिकासी व्यवस्था में सुधार का लक्ष्य रखा गया है।

कुल मिलाकर, पटना के छह प्रमुख नालों के जीर्णोद्धार की यह योजना शहर में जलजमाव की समस्या कम करने, सड़क संपर्क बढ़ाने और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकती है। हालांकि, इसका वास्तविक लाभ निर्माण कार्य पूरा होने और जलनिकासी व्यवस्था प्रभावी ढंग से संचालित होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

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