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सम्राट चौधरी की कैबिनेट बैठक होगी डिजिटल, कागजी फाइलों की जगह लैपटॉप-टैबलेट पर मिलेगा एजेंडा

पटना : बिहार में सरकारी कामकाज को आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट बैठकों को डिजिटल बनाने की तैयारी तेज हो गई है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद मंत्रियों को बैठक का एजेंडा, प्रस्ताव और जरूरी दस्तावेज कागजी फाइलों के बजाय लैपटॉप और टैबलेट पर उपलब्ध होंगे। इसके लिए राज्य सरकार ई-कैबिनेट पोर्टल विकसित कर रही है।

कागजी फाइलों से मिलेगी राहत, डिजिटल होंगे दस्तावेज

अब तक कैबिनेट की बैठकों में एजेंडे और विभिन्न प्रस्तावों से संबंधित दस्तावेज कागजी फाइलों के माध्यम से उपलब्ध कराए जाते रहे हैं। नई व्यवस्था के तहत इन दस्तावेजों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने की योजना है।

इससे मंत्रियों को बैठक से पहले ही संबंधित प्रस्तावों और एजेंडे की जानकारी अपने लैपटॉप या टैबलेट पर मिल सकेगी। उन्हें अलग-अलग कागजी फाइलों को संभालने की जरूरत भी कम होगी।

NIC तैयार कर रहा ई-कैबिनेट पोर्टल

बिहार सरकार इस व्यवस्था को लागू करने के लिए ई-कैबिनेट पोर्टल विकसित कर रही है। इसकी तकनीकी व्यवस्था तैयार करने की जिम्मेदारी राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) को सौंपी गई है।

पोर्टल तैयार होने के बाद कैबिनेट बैठक से संबंधित कई प्रक्रियाओं को ऑनलाइन किया जा सकेगा। इसमें बैठक का एजेंडा तैयार करने, प्रस्तावों से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराने और मंत्रियों तक जरूरी जानकारियां पहुंचाने जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं।

सरकारी खर्च में कमी और कामकाज में तेजी की उम्मीद

ई-कैबिनेट व्यवस्था लागू होने से सरकारी कामकाज में कागज और प्रिंटिंग पर होने वाले खर्च को कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, दस्तावेजों के वितरण और रखरखाव की प्रक्रिया भी आसान होने की उम्मीद है।

डिजिटल माध्यम से सभी जरूरी दस्तावेज एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होने से मंत्रियों को बैठक की तैयारी करने में सहूलियत मिल सकती है। इससे प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक व्यवस्थित बनाने में भी मदद मिलने की संभावना है। हालांकि, व्यवस्था लागू होने के बाद ही इसके वास्तविक प्रभाव का आकलन किया जा सकेगा।

डिजिटल होगी प्रक्रिया, लेकिन बैठक में उपस्थिति जरूरी

नई व्यवस्था का उद्देश्य कैबिनेट बैठक से जुड़े एजेंडे और दस्तावेजों को डिजिटल बनाना है। इसका अर्थ यह नहीं है कि मंत्रियों को बैठक में उपस्थित होने से छूट मिल जाएगी। बैठक में उनकी उपस्थिति पहले की तरह आवश्यक होगी।

डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में बिहार सरकार का कदम

बिहार में सरकारी कामकाज को तकनीक से जोड़ने के लिए पहले भी कई पहल की गई हैं। हाल ही में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने संकल्प डैशबोर्ड और समन्वय पोर्टल की शुरुआत की थी। इन डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए सरकारी विभागों के कामकाज, मुख्यमंत्री के निर्देशों और केंद्र तथा राज्य सरकार के बीच समन्वय से जुड़े मामलों की निगरानी करने की व्यवस्था की गई है।

ई-कैबिनेट पोर्टल इसी दिशा में एक और कदम माना जा रहा है। इसके लागू होने से बिहार में मंत्रिमंडल की बैठकों से जुड़ी प्रक्रियाएं अधिक डिजिटल और कागजों पर कम निर्भर हो सकती हैं। अब नजर इस बात पर रहेगी कि पोर्टल कब तक पूरी तरह तैयार होता है और नई व्यवस्था को किस चरण में लागू किया जाता है।

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