पटना : बिहार की राजनीति में मोकामा विधायक अनंत सिंह को लेकर हलचल तेज हो गई है। जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाते हुए उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की मांग की है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार को अनुशंसा पत्र के साथ 10 पन्नों के दस्तावेज और वीडियो साक्ष्य सौंपे हैं। अब इस मामले में विधानसभा अध्यक्ष की ओर से होने वाली कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।
जेडीयू ने क्यों की अनंत सिंह की विधायकी खत्म करने की मांग?
जेडीयू और अनंत सिंह के बीच विवाद की मुख्य वजह हाल ही में हुए बिहार विधान परिषद चुनाव बताए जा रहे हैं। पार्टी का आरोप है कि अनंत सिंह ने पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में जेडीयू के आधिकारिक उम्मीदवार नीरज कुमार के बजाय दूसरे उम्मीदवार के समर्थन में प्रचार किया।
रिपोर्टों के मुताबिक, अनंत सिंह ने जन सुराज समर्थित प्रत्याशी अनुज सिंह के पक्ष में प्रचार किया था। जेडीयू ने इसे पार्टी अनुशासन के खिलाफ बताते हुए उनके विरुद्ध कार्रवाई की मांग उठाई है।
पार्टी का कहना है कि अनंत सिंह की कथित गतिविधियों के समर्थन में दस्तावेजी साक्ष्य और वीडियो भी उपलब्ध कराए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित प्रक्रिया के बाद ही निकाला जा सकता है।
छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित हो चुके हैं अनंत सिंह
जेडीयू ने 24 अक्टूबर 2026 को अनंत सिंह और उनकी पत्नी एवं पूर्व विधायक नीलम देवी को कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था।
पार्टी की ओर से कार्रवाई के पीछे निर्देशों की अनदेखी, वरिष्ठ नेतृत्व के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों और विधान परिषद चुनाव में दूसरे उम्मीदवार के समर्थन में प्रचार करने जैसे आरोप बताए गए।
निष्कासन के बाद जेडीयू ने अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता को लेकर भी कदम उठाया। पार्टी ने संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत कार्रवाई की मांग की है, जो दल-बदल के आधार पर विधायकों की अयोग्यता से संबंधित प्रावधानों को शामिल करती है।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार के पास क्या है अधिकार?
इस मामले में अब विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। जेडीयू की ओर से सौंपे गए दस्तावेजों और वीडियो की समीक्षा के बाद नियमानुसार आगे की प्रक्रिया तय हो सकती है।
हालांकि, किसी राजनीतिक दल से निष्कासन होने मात्र से विधायक की विधानसभा सदस्यता अपने आप समाप्त नहीं हो जाती। सदस्यता समाप्त करने के लिए लागू संवैधानिक प्रावधानों और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार निर्णय आवश्यक है।
इसलिए फिलहाल अनंत सिंह की विधायकी समाप्त होने की पुष्टि नहीं हुई है। अंतिम स्थिति विधानसभा अध्यक्ष के निर्णय और संबंधित प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
अनंत सिंह की राजनीतिक स्थिति पर सबकी नजर
जेडीयू की कार्रवाई के बाद बिहार की राजनीति में इस घटनाक्रम को लेकर चर्चा तेज है। एक ओर पार्टी अपने आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ प्रचार करने को अनुशासनहीनता मान रही है, वहीं दूसरी ओर इस मामले में विधानसभा सदस्यता का प्रश्न संवैधानिक प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है।
अब देखना होगा कि विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और दस्तावेजों की समीक्षा के बाद आगे की कार्रवाई किस दिशा में बढ़ती है।
फिलहाल बड़ा सवाल यही है कि क्या जेडीयू की शिकायत और पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर अनंत सिंह की विधायकी पर कोई कार्रवाई होगी, या उनकी सदस्यता बरकरार रहेगी? इसका जवाब विधानसभा अध्यक्ष के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा।
