पटना : बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में विभिन्न विभागों से जुड़े 43 एजेंडों को मंजूरी दी गई है। बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को हुई इस बैठक में औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और छोटे एवं मध्यम उद्यमों को बढ़ावा देने से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर सहमति बनी।
बैठक में बिहार MSME नीति 2026 और सूक्ष्म एवं लघु उद्यम सुविधा परिषद नियमावली 2026 को मंजूरी दिए जाने की जानकारी सामने आई है। इन फैसलों का उद्देश्य राज्य में उद्यमिता को प्रोत्साहित करना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।
MSME नीति 2026 से उद्यमियों को मिलेगा बढ़ावा
कैबिनेट के फैसलों में बिहार MSME नीति 2026 प्रमुख है। इसके तहत सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को बढ़ावा देने, नए उद्योग स्थापित करने और राज्य में निवेश का माहौल बेहतर बनाने पर जोर दिया गया है। नीति के अंतर्गत अगले पांच वर्षों में एक करोड़ उद्यमी परिवार तैयार करने और रोजगार के अवसरों का विस्तार करने जैसे लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।
किशनगंज और गोपालगंज में निवेश प्रस्तावों को मंजूरी
बैठक में राज्य के दो जिलों में औद्योगिक इकाइयों की स्थापना से जुड़े निवेश प्रस्तावों को भी स्वीकृति मिली है।
किशनगंज: ठाकुरगंज में इमेज स्टार्च उत्पादन इकाई की स्थापना के लिए लगभग 88.62 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इससे करीब 217 लोगों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।
गोपालगंज: बैकुंठपुर में ग्रीन बेस्ट एथेनॉल उत्पादन इकाई के लिए लगभग 97.80 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव को मंजूरी मिली है। इस परियोजना से करीब 210 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना जताई गई है।
सभी 38 जिलों में MSME केंद्र बनाने का लक्ष्य
नई नीति के तहत बिहार के सभी 38 जिलों में MSME केंद्र स्थापित करने और प्रत्येक जिले में एक औद्योगिक क्लस्टर विकसित करने का लक्ष्य भी सामने आया है। इसके अलावा, राज्य में साख-जमा अनुपात को 75 प्रतिशत तक पहुंचाने की परिकल्पना की गई है, ताकि उद्यमियों को वित्तीय संसाधनों तक बेहतर पहुंच मिल सके।
रोजगार और औद्योगिक विकास पर सरकार का जोर
कैबिनेट की बैठक में स्वीकृत प्रस्तावों से राज्य में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने, निवेश आकर्षित करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर विकसित करने पर जोर दिखाई देता है। हालांकि, इन योजनाओं का वास्तविक प्रभाव इनके क्रियान्वयन, निवेश की प्रगति और रोजगार सृजन के आंकड़ों से स्पष्ट होगा।
बिहार कैबिनेट के 43 एजेंडों को मिली मंजूरी के बाद अब संबंधित विभागों की ओर से फैसलों को लागू करने की प्रक्रिया और आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
