गयाजी : बिहार के गया जिले के करजरा स्थित स्वामी राघवेंद्राचार्य त्रिडंडी आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय में पुरातन छात्र मिलन समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार, गया के वरीय पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार और जदयू नेता चंदन सिंह सहित कई गणमान्य लोग शामिल हुए। समारोह में देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे सैकड़ों चिकित्सकों ने हिस्सा लिया और महाविद्यालय से जुड़ी पुरानी यादें साझा कीं।
समारोह के दौरान वर्ष 1982 से 2018 तक महाविद्यालय में शिक्षा प्राप्त करने वाले पूर्ववर्ती विद्यार्थियों को मेडल, मोमेंटो और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान और वाराणसी समेत कई क्षेत्रों से पहुंचे चिकित्सकों ने अपने शैक्षणिक अनुभवों और पेशेवर सफर को साझा किया। लंबे समय बाद पुराने सहपाठियों से मिलकर पूर्ववर्ती विद्यार्थियों में उत्साह देखने को मिला।
आयुर्वेद को बढ़ावा देने पर दिया जोर
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने आयुर्वेद के विकास के लिए केंद्र और बिहार सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि आयुष मंत्रालय के गठन और आयुर्वेद संस्थानों के विकास से प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति को नई पहचान मिली है। वैज्ञानिक अनुसंधान और सरकारी सहयोग के माध्यम से आयुर्वेद को आगे बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने आयुर्वेद की परंपरा, शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में इसके योगदान को महत्वपूर्ण बताया। ऐसे आयोजनों को पूर्ववर्ती विद्यार्थियों के बीच संपर्क मजबूत करने और संस्थान की उपलब्धियों को साझा करने का अवसर माना जा रहा है।
देशभर में सेवाएं दे रहे महाविद्यालय के पूर्ववर्ती छात्र
समारोह में वेंकटेश प्रपन्नाचार्य ने बताया कि महाविद्यालय के हजारों पूर्ववर्ती छात्र सरकारी सेवाओं और प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने पूर्व छात्रों की उपलब्धियों और संस्थान से उनके जुड़ाव को रेखांकित किया।
पुरातन छात्र मिलन समारोह का उद्देश्य पुराने विद्यार्थियों को एक मंच पर लाना, उनके अनुभवों को साझा करना और महाविद्यालय के साथ उनके संबंधों को मजबूत करना रहा। कार्यक्रम में सम्मानित किए गए पूर्व छात्रों ने संस्थान से मिली शिक्षा और मार्गदर्शन को अपने व्यावसायिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
समारोह ने आयुर्वेद शिक्षा, पूर्व छात्रों के योगदान और पारंपरिक चिकित्सा पद्धति के विकास पर चर्चा के लिए एक साझा मंच उपलब्ध कराया। देश के अलग-अलग क्षेत्रों से चिकित्सकों की भागीदारी ने इस आयोजन को विशेष बना दिया।







