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बिहार के विकास को अंतरिक्ष तकनीक से मिलेगी नई गति, सीएम सम्राट चौधरी ने दिया नवाचार पर जोर

पटना : बिहार में विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने और प्रशासनिक व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में अंतरिक्ष आधारित तकनीक एवं वैज्ञानिक नवाचारों के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम साइंस सिटी, पटना में आयोजित दो दिवसीय ‘स्पेस एप्लीकेशन एडॉप्शन वर्कशॉप-2026’ में वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों और अधिकारियों से बिहार की जरूरतों के अनुरूप व्यावहारिक तकनीकी समाधान विकसित करने की अपील की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक तकनीक का लाभ आम लोगों, किसानों और प्रशासनिक व्यवस्था तक पहुंचना चाहिए। इसके लिए केवल नए एप्लीकेशन विकसित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका प्रभावी क्रियान्वयन भी जरूरी है। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि तकनीकी नवाचारों की उपयोगिता का आकलन कर उन्हें जनहित और विकास योजनाओं से जोड़ा जाए।

कार्यशाला की थीम ‘Empowering Governance: Leveraging Space Enabled Solutions for a Progressive Bihar’ रखी गई। इसका उद्देश्य अंतरिक्ष आधारित समाधानों के जरिए शासन व्यवस्था को सशक्त बनाना और बिहार के विकास को नई गति देना है।

‘टेककनेक्ट’ पोर्टल लॉन्च, BIRSAC और सर्वे ऑफ इंडिया में समझौता

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने ‘टेककनेक्ट’ पोर्टल का शुभारंभ किया। साथ ही, बिहार रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर (BIRSAC) और सर्वे ऑफ इंडिया (SOI) के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इन पहलों के माध्यम से तकनीकी सहयोग बढ़ाने और अंतरिक्ष आधारित अनुप्रयोगों को विकास योजनाओं में शामिल करने की दिशा में काम किया जाएगा।

कार्यक्रम की शुरुआत में मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनी का निरीक्षण किया और विभिन्न प्रतिभागियों से नए एप्लीकेशन, उपकरणों तथा उनकी उपयोगिता के बारे में जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि यह आकलन किया जाए कि इन तकनीकों का इस्तेमाल विभिन्न विभागों के कामकाज और आम जनता की सुविधाओं को बेहतर बनाने में किस तरह किया जा सकता है।

बाढ़ प्रबंधन और कृषि में उपयोगी होगी अंतरिक्ष तकनीक

मुख्यमंत्री ने बिहार की भौगोलिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य के कई इलाकों में बाढ़ एक बड़ी चुनौती है। नेपाल और दूसरे क्षेत्रों से आने वाले जल प्रवाह के कारण नदियों के जलस्तर में बदलाव होता है। ऐसे में रिमोट सेंसिंग, वैज्ञानिक आंकड़ों और अंतरिक्ष आधारित तकनीक का उपयोग बाढ़ की निगरानी, जल प्रबंधन और पूर्वानुमान को बेहतर बनाने में मददगार हो सकता है।

उन्होंने कहा कि कृषि नियोजन, प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन और विकास योजनाओं की निगरानी में भी इन तकनीकों की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। मुख्यमंत्री ने वर्षा में लगभग 32 प्रतिशत की कमी के बावजूद बाहरी क्षेत्रों से आने वाले जल प्रवाह के कारण गंगा, सोन और गंडक जैसी नदियों के जलस्तर पर पड़ने वाले प्रभाव का उल्लेख किया। उन्होंने वैज्ञानिक पूर्वानुमान, जलस्तर की नियमित निगरानी और संबंधित विभागों के बीच समन्वय को जरूरी बताया।

गंगा के जल का बेहतर उपयोग करने पर जोर

मुख्यमंत्री ने गंगा नदी के जल का वर्षभर पेयजल और सिंचाई जैसे आवश्यक कार्यों में समुचित उपयोग करने की जरूरत पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि इसके लिए वैज्ञानिक अध्ययन, प्रभावी योजना और संबंधित राज्यों के साथ समन्वय महत्वपूर्ण होगा।

उन्होंने तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए राज्य में इंजीनियरिंग कॉलेजों में 10 रुपये और पॉलिटेक्निक कॉलेजों में 5 रुपये की फीस व्यवस्था का भी उल्लेख किया। साथ ही, ऐतिहासिक विरासत से प्रेरित 12 नई टाउनशिप विकसित करने की योजना का जिक्र करते हुए कहा कि नियोजित शहरी विकास में आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का इस्तेमाल आवश्यक है।

विकसित बिहार के निर्माण में तकनीक की अहम भूमिका

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप बिहार को समृद्ध और विकसित बनाने में विज्ञान, तकनीक और नवाचार महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने बिहार की प्राचीन ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए आर्यभट्ट और आचार्य चाणक्य जैसी महान विभूतियों की विरासत को आधुनिक वैज्ञानिक सोच से जोड़ने की आवश्यकता बताई।

उन्होंने सभी संबंधित विभागों और तकनीकी संस्थानों से नए नवाचार अपनाने, आपसी सहयोग बढ़ाने और तकनीकी समाधानों को जनहित से जोड़ने की अपील की। मुख्यमंत्री के अनुसार, तकनीक का वास्तविक उद्देश्य शासन को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जनोन्मुखी बनाना है, ताकि इसका सीधा लाभ आम नागरिकों तक पहुंचे।

कई मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद

कार्यशाला में उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव, विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री शीला कुमारी, IN-SPACe के संयुक्त सचिव अनुपम आनंद, विभागीय सचिव हिमांशु शर्मा तथा IN-SPACe के निदेशक (रणनीति एवं योजना) डीबी खोत सहित कई अधिकारियों ने संबोधित किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह, पटना प्रक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक जितेंद्र राणा, जिलाधिकारी कुंदन कुमार, वरीय पुलिस अधीक्षक कार्तिकेय के. शर्मा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी, गणमान्य व्यक्ति और कार्यशाला में शामिल प्रतिभागी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के कार्यों पर आधारित एक लघु फिल्म भी दिखाई गई।

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