पटना: भारतीय जनता पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद संजय जायसवाल ने कहा कि विपक्ष चुनावी हार के बाद अब संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बना रहा है। एसआईआर, ईवीएम और चुनाव प्रक्रिया को लेकर भ्रम फैलाकर लोकतंत्र, संविधान और चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विधान परिषद चुनाव के परिणाम ने कांग्रेस के दावों की पोल खोल दी है।
पटना में ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान के तहत गुरुवार को आयोजित विशेष पत्रकार वार्ता में उन्होंने कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधा। इस दौरान भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं अरवल विधायक मनोज शर्मा, प्रदेश मीडिया प्रभारी दानिश इकबाल और अशोक भट्ट उपस्थित रहे।
संजय जायसवाल ने कहा कि कांग्रेस लंबे समय से बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग करती रही है। विधान परिषद चुनाव में प्रेफरेंशियल वोटिंग के कारण बैलेट से मतदान होता है। इसके बावजूद 28 सीटों में कांग्रेस को केवल एक सीट मिली है। उन्होंने कर्नाटक का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी कांग्रेस सभी चार सीटें हार गई। जायसवाल ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस लगातार चुनावी हार के बावजूद जनता के बीच भ्रम फैलाने और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल खड़े करने की राजनीति कर रही है।
भाजपा सांसद ने कहा कि एसआईआर का अधिकार संविधान के तहत चुनाव आयोग को प्राप्त है और वर्ष 1950 से यह व्यवस्था लागू है। उनके अनुसार, इससे पहले भी आठ बार एसआईआर हो चुका है, जिनमें सात बार कांग्रेस के शासनकाल में यह प्रक्रिया अपनाई गई। उन्होंने कहा कि बिहार में पिछले वर्ष एसआईआर के दौरान 47 लाख मतदाताओं के नामों में सुधार किया गया। इनमें मृत, दूसरे स्थान पर स्थानांतरित और दोहरी प्रविष्टियों वाले मतदाता शामिल थे। जायसवाल ने दावा किया कि एक वर्ष बाद भी इन नामों के सुधार को लेकर किसी प्रभावित व्यक्ति के सामने आने की जानकारी नहीं है।
उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए भारतीय नागरिकता, 18 वर्ष की आयु और संबंधित स्थान का स्थायी निवासी होना आवश्यक है। उन्होंने विपक्ष पर घुसपैठियों के मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि भारत का संविधान किसी विदेशी घुसपैठिए को मतदान का अधिकार नहीं देता। उन्होंने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में त्रुटि होने पर संबंधित व्यक्ति नोटिस का जवाब देकर और निर्वाचन अधिकारियों से संपर्क कर सुधार करा सकता है।
संजय जायसवाल ने कहा कि भारत का संविधान किसी भी घुसपैठिए को मतदान का अधिकार नहीं देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के शासनकाल में बांग्लादेशियों को फर्जी दस्तावेजों के जरिए बसाने और मतदाता सूची में शामिल कराने का चलन बढ़ा। उन्होंने कहा कि कई जगहों पर पकड़े गए बांग्लादेशी नागरिकों के पास 24 साउथ परगना के फर्जी आधार कार्ड मिलने की बात सामने आई है।
उन्होंने कहा कि भारत हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और पारसी सहित सभी धर्मों के नागरिकों का देश है, लेकिन बांग्लादेशी घुसपैठियों और रोहिंग्याओं को मतदान का अधिकार नहीं दिया जा सकता। उन्होंने कहा कि एसआईआर का उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध करना है और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मतदाता बनने वालों की पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
जायसवाल ने कहा कि विपक्ष एसआईआर के माध्यम से फर्जी, स्थानांतरित और मृत मतदाताओं के नामों में सुधार की प्रक्रिया को विवादित बनाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कांग्रेस पर चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया और कहा कि मतदाता सूची में गड़बड़ी का दावा करने वालों को ठोस प्रमाण सामने रखना चाहिए। उन्होंने बिहार की जनता से अपील की कि वह तथ्यों के आधार पर स्थिति को समझे और किसी भी भ्रामक प्रचार से प्रभावित न हो। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में सुधार लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए आवश्यक है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं अरवल विधायक मनोज शर्मा ने कहा कि एसआईआर सहित विभिन्न मुद्दों पर विपक्ष लगातार संवैधानिक संस्थाओं को सवालों के घेरे में लाने का प्रयास कर रहा है। संवैधानिक प्रक्रियाओं के खिलाफ दूषित और भ्रामक प्रचार का वातावरण बनाना गैर-जिम्मेदाराना है। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माताओं ने बहुदलीय लोकतांत्रिक व्यवस्था को स्वीकार किया है, जिसमें प्रत्येक नागरिक के मत का समान महत्व है।
भाजपा नेताओं ने दोहराया कि चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारियों के निर्वहन में बाधा डालने के बजाय सभी राजनीतिक दलों को निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव व्यवस्था को मजबूत करने में सहयोग करना चाहिए।
