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श्रावण महोत्सव की दूसरी संध्या में हुई एकल शास्त्रीय गायन, समूह वादन पखावज, समूह नृत्य भरतनाट्यम की प्रस्तुति

उज्जैन, 08 अगस्त : मध्य प्रदेश के उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के 21वे अखिल भारतीय श्रावण महोत्सव की दूसरी संध्या में शनिवार की शाम पं. विनोद कुमार द्विवेदी का एकल शास्त्रीय गायन, इन्दौर की चित्रांगना आंगले का समूह वादन पखावज की प्रस्तुति, बडौदा की अरनी भक्त का समूह नृत्य भरतनाट्यम’ और मंदसौर की दिव्या शर्मा के एकल शास्त्रीय गायन की प्रस्तुति हुई।

श्रावण महोत्सव की सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ पं. विनोद कुमार द्विवेदी ने राग मियाँ मल्हार में ध्रुपद शैली की चार खंडों में विस्तृत आलापचारी से किया। पश्चात पंद्रह मात्राओं के दुर्लभ ताल गजझम्पा में पंडित विनोद कुमार द्विवेदी कि स्वरचित रचना ”सावन घन गरज चहुँ ओर” जो बाबा महाकाल के झूला झूलने का वर्णन कर रही को प्रस्तुत किया गया । पश्चात इसी राग में सूलताल की स्वरचित रचना ”कारे बदरा घिर आई” प्रस्तुत की गई, जिसने वर्षा ऋतु की गंभीरता और राग मियाँ मल्हार के भाव पक्ष को अभिव्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन राग जोग में स्वरचित रचित ”बाजत शिव डमरू, डिम-डिम डिमिक-डिमिक, अनहद नाद साजे, बाबा महाकाल” से हुआ। इस रचना के माध्यम से भगवान भोलेनाथ के दिव्य स्वरूप एवं अनहद नाद की अनुभूति को ध्रुपद गायन के माध्यम से प्रस्तुत करते हुए कार्यक्रम का समापन किया गया। सह गायन पर आयुष द्विवेदी, पखावज पर मनोज सोलंके व तानपुरा पर आरती जादौन ने संगत की ।

श्रावण महोत्सव 2026 की द्वितीय प्रस्तुति इन्दौर की चित्रांगना आंगले का समूह वादन पखावाज की हुई। प्रस्तुति का प्रारंभ पखावज प्रस्तुति ‘‘शिवांजलि‘‘ के माध्यम से भगवान महाकाल के श्रीचरणों में अपनी संगीतमयी श्रद्धांजलि अर्पित की पखावज वादकों के सामूहिक वादन, लय की ऊर्जा, नाद की गूँज और ताल की गरिमा के माध्यम से यह रचना भगवान शिव के तांडव स्वरूप का कलात्मक एवं आध्यात्मिक निरूपण करती है। इस प्रस्तुति में पखावज पर सुप्रित रेशवाल, सुमित आंगले एवं दीपक झुराले तथा हारमोनियम पर दीपक खासरवाल ने संगत की।

तीसरी प्रस्तुति अरनी भक्त के समूह नृत्य भरतनाट्यम की प्रस्तुति हुई। अरनी भक्त ने अपनी प्रस्तुति का प्रारंभ सुधामयी सुधानिधे प्रथम प्रस्तुति में देवी लास्य और सौंदर्य की आराधना की। पश्चात ”एन्ना तवम् सेय्दाने यशोदा पदम्” – इस प्रस्तुति में माँ यशोदा के वात्सल्य और भगवान श्रीकृष्ण के प्रति उनके प्रेम को अभिव्यक्त किया। उसके पश्यात ”कृष्ण मन्मोहना” भगवान श्रीकृष्ण और उनकी गोपियों के प्रेम एवं भक्ति को दर्शाती मनमोहक लास्य ‘कृृृृष्णण मन्मोहना” की प्रस्तुति दी। अगली प्रस्तुुति भगवान नटराज के तांडव की दिव्य लय में राग रेवती पर आधारित ”महादेव शिव शंभो” में भगवान शिव के दिव्य स्वरूप, करुणा और महिमा का गुणगान से किया। अगली प्रस्तुति भगवान शिव की स्तुति में प्रसिद्ध शिव पंचाक्षर स्तोत्र ”नागेन्द्र हाराय त्रिलोचनाय” जिसमें त्रिनेत्रधारी, भस्म विभूषित भगवान शिव की प्रस्तुति की। अंतिम प्रस्तु्ति भगवान शिव के आनंद तांडव का दिव्य वर्णन। चिदंबरम् में नटराज के सृष्टि स्थिति और संहार के शाश्वत नृत्य को समर्पित यह प्रस्तुति लय और ताल की अद्भुत संगति को प्रस्तु्त किया। आपके साथ सहयोगी कलाकार नीरव पटेल एवं निम्मी हेरत ने संगत की।

* अंतिम प्रस्तुति दिव्या शर्मा के एकल शास्त्रीय गायन की प्रस्तुति हुई। दिव्या शर्मा ने अपनी प्रस्तुति का प्रारंभ शास्त्रीय गायन के साथ उप शास्त्रीय गायन की प्रस्तुति से किया जिसमें मुख्यत: भजन एवं झूला गायन हुआ साथ ही ख्याल गायन भी हुआ। प्रस्तुति को आगे बढाते हुए सखियन झूलन चली फूल बगिया ऋतु आई प्रस्तुति से समापन किया। आपके साथ तबले पर श्री शरद सूर्यवंशी व हारमोनियम पर श्री नारायण काटे ने संगत की।

कार्यक्रम के अतिथि ओम जैन-मध्यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसरंचना विकास मंडल के अध्यक्ष, तुलसीदास जी परोहा-विभाग अध्यक्ष पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय उज्जैन, संत रामेश्वर दास-शिप्रा तीर्थ परिक्रमा न्यास अध्यक्ष एवं डॉ सुनील जोशी हिंदू महाविद्यालय दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर द्वारा किया।

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