खूंटी , 08 अगस्त : कभी बंजर पड़ी रहने वाली तोरपा प्रखंड के कोचा गांव की करीब 65 एकड़ भूमि अब हरियाली से लहलहा रही है। सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई व्यवस्था ने गांव में खेती की तस्वीर बदल दी है। अब किसान खरीफ के साथ रबी और अन्य मौसमों में भी फसल उत्पादन कर रहे हैं। सौर ऊर्जा का लाभ खेतों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सामुदायिक प्रोसेसिंग यूनिट और घरेलू बिजली की जरूरतें भी इससे पूरी की जा रही हैं।
शनिवार को खूंटी के उपायुक्त मो. जावेद हुसैन ने अधिकारियों के साथ कोचा गांव पहुंचकर सौर ऊर्जा आधारित कृषि मॉडल का जायजा लिया। उन्होंने ग्रामीणों, स्वयं सहायता समूह की महिलाओं और सामुदायिक सदस्यों से बातचीत कर इस पहल की जानकारी ली। मौके पर एसडीएम दीपेश कुमारी, एटीएमए के उप परियोजना निदेशक अमरेश कुमार, तोरपा बीडीओ नवीन चंद्र झा सहित प्रदान संस्था के अभिषेक कुमार, रवि रंजन कुमार, मोनालिश मिश्रा और एफपीओ अध्यक्ष एतवारी देवी मौजूद थीं।
कोचा गांव को क्लाइमेट स्मार्ट विलेज के रूप में विकसित करने के लिए समुदाय, श्नाइडर इलेक्ट्रिक और प्रदान संस्था के सहयोग से सौर ऊर्जा आधारित लिफ्ट सिंचाई प्रणाली स्थापित की गई है। सिंचाई सुविधा मिलने से किसानों की क्रॉपिंग इंटेंसिटी करीब 116 प्रतिशत से बढ़कर दोहरी और तिहरी फसल तक पहुंचने लगी है। इससे उत्पादन और किसानों की आय बढ़ाने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं।
उपायुक्त ने गांव में संचालित सामुदायिक प्रोसेसिंग यूनिट का भी निरीक्षण किया। तोरपा महिला कृषि बागवानी स्वावलंबी सहकारी समिति लिमिटेड (एफपीओ) के माध्यम से संचालित इस यूनिट में सौर ऊर्जा से सरसों तेल एक्सपेलर चलाया जा रहा है। वहीं लाह प्रोसेसिंग यूनिट में कच्चे लाह को प्रसंस्कृत कर वॉश्ड और क्रश्ड लाह तैयार किया जा रहा है। इससे स्थानीय कृषि एवं वन उत्पादों का मूल्य संवर्धन हो रहा है।
गांव में सोलर लिफ्ट सिंचाई, प्रोसेसिंग यूनिट के साथ घरेलू बिजली जरूरतों को भी सौर ऊर्जा से जोड़ा गया है। बिजली कटौती के दौरान ग्रामीण परिवार पंखे और रोशनी जैसी आवश्यकताओं के लिए सौर ऊर्जा का उपयोग कर रहे हैं।
उपायुक्त मो. जावेद हुसैन ने ग्रामीणों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि सामुदायिक भागीदारी और स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग से कोचा गांव एक प्रेरणादायक मॉडल बन रहा है। उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि उत्पादन बढ़ाने और आय के नए साधन विकसित करने की व्यापक संभावनाएं हैं।
