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बिहार में Farmer ID को लेकर बढ़ी किसानों की परेशानी, कम जमीन दर्ज होने से खाद मिलने में दिक्कत

पटना : बिहार में Farmer ID बनवाने की प्रक्रिया के बीच किसानों की परेशानियां बढ़ती नजर आ रही हैं। कई किसानों का कहना है कि Farmer ID में उनके नाम कम जमीन दर्ज होने के कारण खेती के लिए जरूरत के मुताबिक खाद नहीं मिल पा रही है। वहीं, कुछ मामलों में राशन कार्ड से नाम हटाए जाने की शिकायत भी सामने आई है। इन समस्याओं के कारण कई किसान Farmer ID बनवाने से पीछे हट रहे हैं।

54 लाख से आगे नहीं बढ़ी Farmer ID की संख्या

राज्य में Farmer ID बनाने की प्रक्रिया पिछले करीब दो महीने से लगभग स्थिर बनी हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अब तक करीब 54 लाख 5 हजार 734 किसानों की Farmer ID तैयार हुई है। पिछले दो महीनों में यह संख्या लगभग 54 लाख के आसपास ही बनी हुई है।

वहीं, राज्य में करीब 86 लाख 36 हजार 562 किसान प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ ले रहे हैं। ऐसे में कृषि विभाग के सामने अधिक से अधिक किसानों को Farmer ID से जोड़ना बड़ी चुनौती बन गया है।

कम जमीन दर्ज होने से खाद की समस्या

किसानों की सबसे बड़ी चिंता खाद के आवंटन को लेकर है। कई किसान ऐसे हैं जिनके नाम पर केवल एक-दो कट्ठा जमीन दर्ज है, जबकि वे इससे कहीं अधिक क्षेत्र में खेती करते हैं।

कृषि एप और डिजिटल वितरण व्यवस्था में खाद का आवंटन दर्ज भूमि के आधार पर किए जाने की स्थिति में कम जमीन दर्ज होने पर किसानों को कम मात्रा में खाद मिल रही है। किसानों का कहना है कि इतनी मात्रा उनकी पूरी खेती के लिए पर्याप्त नहीं होती।

पूर्वजों के नाम दर्ज है जमीन

बिहार के ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में किसान ऐसी जमीन पर खेती कर रहे हैं, जिसकी जमाबंदी अभी भी उनके पूर्वजों के नाम पर है। ऐसे किसानों के लिए अपने वास्तविक खेती क्षेत्र के आधार पर Farmer ID बनवाना चुनौतीपूर्ण हो रहा है।

कई किसानों ने अपने नाम पर केवल एक-दो कट्ठा जमीन खरीदी है और उसी रिकॉर्ड के आधार पर Farmer ID तैयार हो रही है। वहीं, बटाई पर दूसरे की जमीन लेकर खेती करने वाले किसानों के सामने भी भूमि रिकॉर्ड से जुड़ी समस्या है।

Farmer ID बनवाने से पीछे हट रहे किसान

कम जमीन दर्ज होने के कारण खाद कम मिलने की आशंका के बीच कुछ किसान Farmer ID बनवाने से परहेज कर रहे हैं। किसानों को डर है कि रिकॉर्ड में जितनी जमीन उनके नाम दर्ज होगी, उसी के आधार पर उन्हें कृषि सामग्री का लाभ मिलेगा। इससे बड़े क्षेत्र में खेती करने वाले किसानों को परेशानी होने की आशंका है।

ढाई एकड़ जमीन के कारण राशन कार्ड रद्द होने की शिकायत

खगड़िया के अलौली प्रखंड के शुभा गांव की सिंधु देवी का मामला भी सामने आया है। उनके नाम पर ढाई एकड़ जमीन दर्ज होने के आधार पर राशन कार्ड रद्द किए जाने की शिकायत है।

उन्होंने इस मामले को लेकर सहयोग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी के स्तर पर जांच की गई। जांच में उनका नाम पीएम-किसान के तहत 2.5 एकड़ से अधिक भूमि वाले किसानों की सूची में पाया गया, जिसके आधार पर आवेदन पर कार्रवाई की गई।

सिंधु देवी का कहना है कि उनके गांव में कई अन्य लोगों के नाम भी राशन कार्ड से हटाए जाने की शिकायत सामने आ रही है।

जमीन का रिकॉर्ड दुरुस्त कराने पर जोर

एग्रीस्टैक की ओर से किसानों को जमीन का रिकॉर्ड जल्द से जल्द दुरुस्त कराने यानी परिमार्जन कराने के लिए कहा जा रहा है। जिन किसानों के नाम अलग-अलग जगहों पर जमीन दर्ज है, उन्हें सभी जमीनों का रिकॉर्ड एक जगह अपडेट कराने की सलाह दी जा रही है।

इसके लिए किसानों को संबंधित पोर्टल के माध्यम से भूमि रिकॉर्ड में जरूरी सुधार कराने की प्रक्रिया अपनानी होगी।

Farmer ID की बढ़ सकती है अहमियत

आने वाले समय में Farmer ID की भूमिका और बढ़ने की संभावना है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दिसंबर या अगले साल जनवरी से कृषि योजनाओं के लाभ, खाद, बीज और अनुदान जैसी सुविधाओं को Farmer ID से जोड़ने की व्यवस्था लागू हो सकती है।

ऐसे में कृषि विभाग के सामने अधिक से अधिक किसानों की Farmer ID बनाने के साथ-साथ उनके भूमि रिकॉर्ड को सही कराने की भी चुनौती है। भूमि एवं राजस्व विभाग की ओर से करीब 1.10 करोड़ नए जमाबंदी रिकॉर्ड कृषि विभाग को उपलब्ध कराए गए हैं। विभाग के पास पहले से करीब पांच करोड़ जमाबंदी रिकॉर्ड मौजूद हैं।

किसानों से रिकॉर्ड सुधारने की अपील

एग्रीस्टैक के अधिकारी राजेश कुमार के अनुसार, किसानों की जमीन का रिकॉर्ड दुरुस्त कराने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। जिन किसानों के नाम अलग-अलग स्थानों पर जमीन दर्ज है, उन्हें पोर्टल पर जाकर सभी जमीनों का रिकॉर्ड एक जगह दर्ज कराने के लिए कहा जा रहा है।

भूमि रिकॉर्ड में सुधार होने से Farmer ID में सही भूमि विवरण दर्ज किया जा सकेगा। इससे किसानों को भविष्य में सरकारी कृषि योजनाओं का लाभ लेने में सुविधा मिलने की उम्मीद है।

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